उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर के राजभवन में राजनीतिक नेताओं के साथ बैठक की और 3 जुलाई से शुरू होने वाली श्री अमरनाथ जी यात्रा की तैयारियों पर चर्चा की। बैठक में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सत शर्मा, डॉ. निर्मल सिंह और कविंदर गुप्ता (भाजपा), तारा चंद और गुलाम अहमद मीर (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस), शौकत अहमद मीर और जगदीश सिंह आजाद (नेशनल कॉन्फ्रेंस), मोहम्मद यूसुफ तारिगामी (सीपीआईएम), सज्जाद गनी लोन (जेएंडके पीपुल्स कॉन्फ्रेंस), सैयद मोहम्मद अल्ताफ बुखारी (जेएंडके अपनी पार्टी), सुश्री इल्तजा मुफ्ती (पीडीपी) और हकीम मोहम्मद यासीन शाह (जेएंडके पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट) शामिल हुए।
उपराज्यपाल ने पवित्र यात्रा के सुरक्षित और सफल संचालन के लिए श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड, प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सुरक्षा बलों और सभी हितधारकों द्वारा किए गए समर्पित प्रयासों को साझा किया। उपराज्यपाल ने कहा, “बाबा अमरनाथ के आशीर्वाद और आवश्यक सुविधाओं और सेवाओं में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ, इस वर्ष की तीर्थयात्रा भक्तों के लिए यादगार और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध होने का वादा करती है।
यह जम्मू कश्मीर के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत भी करेगी।” उपराज्यपाल ने वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं से प्राप्त सुझावों और इनपुट का स्वागत किया और श्री अमरनाथ जी के भक्तों के लिए यात्रा को और अधिक सुविधाजनक और परेशानी मुक्त बनाने के लिए उनका सहयोग मांगा।
उपराज्यपाल ने कहा, “सभी राजनीतिक दलों के नेता जम्मू-कश्मीर परिवार के सदस्य हैं और मेरा मानना है कि श्री अमरनाथ जी की तीर्थयात्रा इस परिवार की सामाजिक-सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। हमें सभी श्रद्धालुओं का स्वागत करने और श्री अमरनाथ जी यात्रा को सफल बनाने के संकल्प के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए।“
मुख्यमंत्री श्री उमर अब्दुल्ला और सभी वरिष्ठ नेताओं ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और पवित्र तीर्थयात्रा के लिए हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। श्री अमरनाथ जी यात्रा जम्मू-कश्मीर की समग्र संस्कृति में समाहित है और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि इस पवित्र तीर्थयात्रा का सुचारू और सफल संचालन हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। वरिष्ठ नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से श्रद्धालुओं का गर्मजोशी से स्वागत करने और यात्रा में प्रमुख हितधारकों के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का भी आग्रह किया।
पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए राजनीतिक नेताओं ने कहा कि जिस तरह से कश्मीर घाटी के लोग अपनी राजनीतिक विचारधाराओं से इतर आतंकवाद के खिलाफ सड़कों पर उतरे, उससे विरोधियों को यह कड़ा संदेश गया कि हमारे समाज में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।