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राष्ट्र आदर्शवाद, नैतिकता या अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता के आधार पर नहीं, केवल अपने हितों की खोज में कार्य करते हैं : जगदीप धनखड़ ने सावरकर को याद किया

भारत को मजबूत बनाना आज की सरकार का प्रमुख दर्शन और संकल्प है : जगदीप धनखड़

Jagdeep Dhankhar, Vice President of India, BJP, Bharatiya Janata Party, Manish Tewari, Congress, Indian National Congress
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5 Dariya News

नई दिल्ली , 23 Jun 2025

Last updated on: Jun 24, 2025, 15:34 IST

उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज वी.डी. सावरकर को याद करते हुए कहा कि, “ ‘न्यू वर्ल्ड: टवेंटी फर्स्‍ट सेंचुरी ग्लोबल ऑर्डर इन इंडिया’ के पन्नों को पलटते हुए मुझे लेखक के विचारों में विनायक दामोदर सावरकर की छाप महसूस हुई.....सावरकर, तमाम अन्‍यायपूर्ण शंकाओं और चरम सीमाओं में अन्‍यायपूर्ण शंकाओं के बावजूद, प्रसिद्ध विचारक बने रहे, जो युद्ध के बाद की व्यवस्था के शुरुआती दौर में खड़े थे। 

सावरकर, कट्टर यथार्थवादी, युद्ध के बाद की दुनिया में विश्वास करते थे, जहाँ राष्ट्र आदर्शवाद, नैतिकता या अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता के आधार पर नहीं, केवल अपने हितों की खोज में कार्य करेंगे। कल्पना कीजिए कि वह कितने दूरदर्शी रहे होंगे। पिछले पखवाड़े, पिछले तीन महीनों पर गौर कीजिए। 

हम सभी इस सबके साक्षी बने हैं। उन्होंने शांतिवादी या काल्पनिक अंतर्राष्ट्रीयवाद को खारिज कर दिया था और इस बात पर जोर दिया था कि भारत को अपनी संप्रभुता की रक्षा ताकत के माध्यम से करनी चाहिए, न कि लीग ऑफ नेशन्‍स या बाद में संयुक्त राष्ट्र जैसी पश्चिमी-प्रभुत्व वाली संस्थाओं पर निर्भर होकर, जो मानवता के छठे हिस्से को उचित स्थान देने के संबंध में अनदेखी करती हैं।”

श्री राम माधव की पुस्तक ‘न्यू वर्ल्ड: टवेंटी फर्स्‍ट सेंचुरी ग्लोबल ऑर्डर इन इंडिया’ के विमोचन के अवसर पर अपने संबोधन में श्री धनखड़ ने कहा, “मित्रों, भारत को मजबूत बनाना आज की सरकार का प्रमुख दर्शन और संकल्प है । यह अचल है, दृढ़ है, समझौता करने को तैयार नहीं है और आलोचकों के बावजूद यह बेहद मजबूत है।

राष्ट्र ने इससे पहले कभी भी अपना दृष्टिकोण इतनी दृढ़ता से पेश नहीं किया। हमें इस भटकाव से गुमराह नहीं होना चाहिए कि -किसने क्या कहा। सरकार, और भारत और इसकी जनता, राष्ट्र के लिए दृढ़ता से खड़े हैं - राष्ट्र पहले और हमारा राष्ट्रवाद… क्षणिक परिस्थितियों में धारणा कायम करने वाले लोग भारत की मानसिकता या खांचे में नहीं आते ।

 एक बार जब हम आंतरिक रूप से मजबूत हो जाते हैं, तो हम अपने रणनीतिक वातावरण को बाहरी रूप से आकार दे सकते हैं।” उन्होंने कहा, “मैं लेखक डॉ. राम माधव के क्रंदन से पूरी तरह सहमत हूं। वह वैश्विक बहुपक्षवाद में निरंतर गिरावट को रेखांकित करते हैं तथा भारत को रुमानियत त्यागने और आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते हैं।”

देश में रणनीतिक सोच की जड़ों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “तीन दशक पहले एक अमेरिकी विचारक जॉर्ज टैनहम ने एक आलेख में प्रभावी ढंग से सुझाव दिया था कि हिंदू दार्शनिक जड़े होने और साथ ही इनके पक्षधर होने के कारण भारत में रणनीतिक सोच का अभाव है। 

लेकिन श्री राम माधव की पुस्तक के साथ, जॉर्ज टैनहम सही साबित होते हैं। वह इससे अधिक गलत नहीं हो सकते थे। उनका विश्लेषण इस देश में सदियों से चली आ रही जमीनी हकीकत से कोसों दूर है... महाभारत में ‘राजधर्म’ और ‘धर्मयुद्ध’ का सिद्धांत; अशोक के शिलालेखों में धम्म कूटनीति; और कौटिल्य का मंडल सिद्धांत, सभी रणनीतिक वातावरण के सिद्धांतीकरण के उदाहरण हैं - सभी बौद्धिक खोज हैं। 

ये दर्शन हमेशा प्रासंगिक रहे हैं, लेकिन हमारे समकालीन चुनौतीपूर्ण समय में, ये वैश्विक व्यवस्था की जरूरत बन चुके हैं।” उन्होंने इस बात को रेखांकित किया, “ये ऐसे दौर हैं, जब हमें आसानी से गलत समझा जाता है। हास्‍यास्‍पद यह है कि जब आप ये बातें कहते हैं, तो मनोरोग पाखंडपूर्ण ढंग से ठीक उसी तरह उंगली उठाकर, आपको आपकी स्थिति से वंचित करने के लिए आपकी पकड़ पर हावी हो जाता है, जो उंगली सामान्य रूप से उनकी ओर उठनी चाहिए। 

मित्रों, यहाँ तक कि 50 के दशक के फैबियन समाजवादी भी देश की दिशा से असहमत नहीं हो सकते थे, जैसा कि हम हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। और हम क्या प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं? हम भारत का निर्माण नहीं कर रहे हैं, इसने 15 अगस्त 1947 को जन्‍म नहीं लिया था। 

हमने केवल औपनिवेशिक सत्ता से छुटकारा पाया था ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ यही हमारा दर्शन है। समस्‍त प्राणी सुखी हों, समस्‍त प्राणी रोग मुक्त हों।” भारत के शांतिप्रिय स्वभाव पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “मित्रों, यह देश हमेशा वैश्विक शांति और सद्भाव के लिए खड़ा रहा है, अपने इतिहास में यह कभी भी विस्तारवाद में शामिल नहीं रहा। 

आज का वैश्विक परिदृश्य खतरनाक ढंग से चिंताजनक है और साथ ही उतना ही कष्‍टप्रद भी है, खासकर भारत जैसे शांतिप्रिय देशों के लिए… जैसे-जैसे भारत सभी नागरिकों के लिए सार्वभौमिक कल्याण प्राप्त करता है, हम दूसरों के लिए आदर्श बन जाते हैं। 

हम घोषणाओं से नहीं, बल्कि उदाहरणों के द्वारा नेतृत्व करते हैं। हम पहले से ही डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में अग्रणी हैं, जहां ग्‍लोबल साउथ के देश हमारे रास्ते का अनुसरण कर सकते हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी का दूरदर्शी नेतृत्व ही था कि जी-20 के दौरान ग्‍लोबल साउथ की चिंताओं पर गौर किया जा सका। 

यह पहली बार हुआ। जी-20 के दौरान ऐसा पहली बार हुआ, जब जी-20 की सदस्यता में अफ्रीकी संघ को यूरोपीय संघ के बराबर रखा गया। मैं इसे महत्‍वपूर्ण घटनाक्रम कहूंगा। और इसलिए, जब हम भारत की प्रगति का आकलन करते हैं, तो हमारा दृष्टिकोण अलग-अलग घटनाओं से निर्धारित न होकर बहुत व्यापक होना चाहिए।”

सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा, “मित्रों, भारत के उत्थान के लिए सावधानीपूर्वक व्यापार की आवश्यकता होगी। ऐसी ताकतें हैं, जो हमारे जीवन को कठिन बनाने के लिए संकल्‍पबद्ध हैं। देश के भीतर और बाहर ऐसी ताकतें हैं। 

ये भयावह ताकतें, हमारे हितों के लिए हानिकारक हैं, जो हमें भाषा जैसे मुद्दों पर भी विभाजित करके हम पर वार करना चाहती हैं। दुनिया में ऐसा कौन सा देश है, जो भारत की तरह भाषाई समृद्धि पर गर्व कर सकता है। हमारी शास्त्रीय भाषाओं, उनकी संख्या पर गौर कीजिए।

संसद में 22 ऐसी भाषाएं हैं, जो किसी को भी अपनी बात कहने का अवसर प्रदान करती हैं। इसके लिए ऐसे अनेक विचारकों की आवश्यकता होगी, जो एक साथ आएं तथा चुनौतियों और अवसरों के बारे में बहस करें और नीति निर्माताओं को सही रणनीतिक विकल्प चुनने में सहायता करें। 

नीतियों का विकास अब अधिक प्रतिनिधित्‍वपूर्ण शैली के साथ होना चाहिए। भारत के थिंक टैंक, विभिन्न स्वरूपों, विभिन्न राजनीतिक दलों में उपलब्ध हैं। यह आवश्यक है कि वे एक साथ आएं ... राजनीतिक तापमान कम होना चाहिए। राजनीतिक दलों के बीच व्‍यापक संवाद होना चाहिए। 

मेरा दृढ़ विश्वास है कि देश में हमारा कोई दुश्मन नहीं है। हमारे दुश्मन बाहर हैं। और जो थोड़े बहुत दुश्मन हैं छोटे से हिस्से में हैं, वे बाहरी ताकतों से जुड़े हैं, जो भारत विरोधी हैं।”

 

Tags: Jagdeep Dhankhar , Vice President of India , BJP , Bharatiya Janata Party , Manish Tewari , Congress , Indian National Congress

 

 

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