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राजनाथ सिंह ने सेना कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित किया

भविष्य के युद्ध के लिए आधुनिकीकरण और तैयारी पर जोर दिया गया

Rajnath Singh, Union Defence Minister, Defence Minister of India, BJP, Bharatiya Janata Party, Sanjay Seth, Indian Army, Army Commanders Conference
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5 Dariya News

नई दिल्ली , 03 Apr 2025

Last updated on: Apr 03, 2025, 16:19 IST

सेना कमांडरों का सम्मेलन, 01 अप्रैल से 04 अप्रैल 2025 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन के दौरान, भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व ने मौजूदा सुरक्षा परिदृश्यों, सीमाओं पर मौजूदा स्थिति और वर्तमान सुरक्षा तंत्र के लिए चुनौतियों के सभी पहलुओं पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श किया। 

सम्मेलन में संगठनात्मक पुनर्गठन, रसद, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन, स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण, आला प्रौद्योगिकियों को शामिल करने और विभिन्न मौजूदा वैश्विक स्थितियों के प्रभाव के आकलन से संबंधित मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। 

सम्मेलन के तीसरे दिन का मुख्य आकर्षण रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा भारतीय सेना के वरिष्ठ नेतृत्व को दिया गया संबोधन था। इससे पहले ‘सुधारों का वर्ष’ पर एक संक्षिप्त जानकारी दी गई थी। रक्षा मंत्री ने देश के सबसे भरोसेमंद और प्रेरक संगठन के रूप में भारतीय सेना में एक अरब से अधिक नागरिकों के विश्वास की पुष्टि की। 

उन्होंने हमारी सीमाओं की रक्षा करने और आतंकवाद से लड़ने के अलावा नागरिक प्रशासन को हर समय सहायता प्रदान करने में सेना की निभाई गई सराहनीय भूमिका पर प्रकाश डाला। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि सुरक्षा, एचएडीआर, चिकित्सा सहायता से लेकर देश में स्थिर आंतरिक स्थिति बनाए रखने तक हर क्षेत्र में सेना मौजूद है। 

राष्ट्र निर्माण और समग्र राष्ट्रीय विकास में भारतीय सेना की भूमिका अतुलनीय है। उन्होंने सेना कमांडरों के सम्मेलन में उपस्थित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और राष्ट्र के ‘रक्षा और सुरक्षा’ दृष्टिकोण को नई ऊंचाइयों पर सफलतापूर्वक ले जाने के लिए सैन्‍य नेतृत्व की सराहना की।

उन्होंने अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने में भारतीय सेना के दृष्टिकोण की भी सराहना की। रक्षा मंत्री ने वर्तमान भू-रणनीतिक अनिश्चितताओं और जटिल वैश्विक स्थिति का उल्‍लेख किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान विश्व एक दूसरे से जुड़ा हुआ है और ऐसी घटनाएं चाहे हमारे पड़ोस में हो या दूर के देशों में, सभी को प्रभावित करेंगी। उन्होंने कहा कि हाइब्रिड युद्ध सहित अपरंपरागत और असममित युद्ध, भविष्य के पारंपरिक युद्धों का हिस्सा होंगे। 

साइबर, सूचना, संचार, व्यापार और वित्त सभी भविष्य के संघर्षों का अभिन्न अंग बन गए हैं। यह आवश्यक है कि सशस्त्र बलों को योजना बनाते और रणनीति बनाते समय इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना होगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान गतिशील भू-रणनीतिक परिवर्तनों और अनिश्चितताओं के साथ चल रहे वैश्विक सुरक्षा परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए सशस्त्र बलों को दीर्घकालिक और अल्पकालिक दोनों चुनौतियों का समाधान करते हुए गतिशील योजना तैयार करनी चाहिए। 

वर्तमान वैश्विक संदर्भ में आधुनिक तकनीक को शामिल करने वाली सैन्य खुफिया जानकारी के महत्व पर अधिक जोर नहीं दिया जा सकता है। उत्तरी सीमाओं पर मौजूदा स्थिति को लेकर रक्षा मंत्री ने सैनिकों पर पूरा भरोसा जताया और सशस्त्र बलों की दृढ़ता और सतर्कता की सराहना की। 

रक्षा मंत्री ने बीआरओ के प्रयासों की सराहना की जिसके कारण कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए पश्चिमी और उत्तरी दोनों सीमाओं पर सड़क संपर्क सुविधाओं में भारी सुधार हुआ है। पश्चिमी सीमाओं की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारतीय सेना के कड़े रुख की सराहना की। 

रक्षा मंत्री ने कहा, "मैं जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खतरे से निपटने में सीएपीएफ/पुलिस बलों और सेना के बीच बेहतरीन तालमेल की सराहना करता हूं। ऐसे समन्वित अभियान जम्मू-कश्मीर में क्षेत्र में स्थिरता बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं और आगे भी यह जारी रहना चाहिए।"

रक्षा मंत्री ने सैन्य बलों की उच्च स्तरीय परिचालन तैयारियों और क्षमताओं की सराहना की, जिसका अनुभव वे हमेशा अग्रिम क्षेत्रों की अपनी यात्राओं के दौरान करते रहे हैं। उन्होंने मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीरों को श्रद्धांजलि भी दी। 

उन्होंने विदेशी सेनाओं के साथ स्थायी सहयोगात्मक संबंध बनाकर हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने के लिए सैन्य कूटनीति में सेना द्वारा किए गए महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की और इसमें रक्षा अताशे की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी बल दिया। 

उन्‍होंने कहा कि हमें संगठनात्मक उद्देश्य के अनुरूप रक्षा अताशे की भूमिका के पुनर्निर्देशन पर विचार-विमर्श करना चाहिए। रक्षा मंत्री ने हर क्षेत्र में हो रही तकनीकी उन्नति का उल्‍लेख करते हुए इन्‍हें सही तरीके से अपनाने के लिए सशस्त्र बलों की सराहना की। 

उन्होंने प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों सहित असैन्‍य क्षेत्र के उद्योगों के साथ मिलकर विशिष्ट तकनीकों को विकसित करने के लिए सेना के प्रयासों की सराहना की और इस तरह 'स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण' या 'आत्मनिर्भरता ' के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की बात कही।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उभरती हुई तकनीकों के साथ सशस्त्र बलों का नियमित संपर्क जरूरी है। रक्षा मंत्री ने सेना कमांडर सम्मेलन के दौरान 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नीति आयोग के साथ की जा रही चर्चाओं की सराहना की। 

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पूर्व सैनिकों और युद्ध में हताहत हुए सैनिकों के परिजनों के कल्‍याण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। राष्ट्र, वीर सैनिकों और उनके परिवार द्वारा किए गए बलिदानों का ऋणी है। अंत में उन्होंने कहा कि रक्षा कूटनीति, स्वदेशीकरण, सूचना युद्ध, रक्षा ढांचा और सेना के आधुनिकीकरण से संबंधित मुद्दों पर हमेशा ऐसे मंच पर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। 

सशस्त्र बलों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए जब भी आवश्यक हो, सैद्धांतिक परिवर्तन किए जाने चाहिए। कमांडर्स कॉन्फ्रेंस जैसे मंच पर वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा की गई सिफारिशों और सुझावों पर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए और यदि आवश्यक हो तो मध्यावधि समीक्षा और संशोधन के साथ उन्हें तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचाया जाना चाहिए। राष्ट्र को अपनी सेना पर गर्व है और सरकार सुधारों और क्षमता आधुनिकीकरण के मार्ग पर सेना को आगे बढ़ने में सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

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