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राणा गुरजीत द्वारा सूक्ष्म सिंचाई योजना के लागूकरण के लिए ‘tupkasinchayee.punjab.gov.in ’ ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च

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5 Dariya News

चंडीगढ़ , 12 Oct 2021

Last updated on: Oct 12, 2021, 00:00 IST

भूजल के संरक्षण की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर पंजाब के मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने राज्य में सूक्ष्म सिंचाई योजना के लागूकरण के लिए आज ‘tupkasinchayee.punjab.gov.in ’ पोर्टल लॉन्च किया।यहाँ मृदा संरक्षण परिसर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की शुरूआत करते हुए राणा गुरजीत ने कहा कि पंजाब राज्य में भूजल के तेज़ी से गिर रहे स्तर को रोकने के लिए हर संभव यत्न कर रहा है और कहा कि इस प्रयास की सफलता हमारे किसानों को बेहद लाभ पहुंचाएगी और हमारी कृषि को आर्थिक तौर पर पारिस्थितिक पक्ष से टिकाऊ बनाने की तरफ बड़ा कदम साबित होगा।इस पहल के लिए विभाग की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि ऑनलाइन सूक्ष्म सिंचाई पोर्टल और अधिक कुशलता लाएगा और किसानों को काफ़ी लाभ पहुंचाएगा और उनको अपनी सुविधा के मुताबिक सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के लिए आवेदन करने का विकल्प मिलेगा। इसके अलावा इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी, क्योंकि किसान अपने आवेदन की स्थिति की रियल टाईम मॉनिटरिंग कर सकेंगे।राणा गुरजीत जो स्वयं एक उन्नतिशील और प्रगतिशील किसान रहे हैं, ने ख़ासकर राज्य में भूजल की बिगड़ती स्थिति के संदर्भ में पानी के स्रोतों के संरक्षण की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।सूक्ष्म सिंचाई योजना, जिसमें सिंचाई के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली की स्थापना शामिल है, को वर्ष 2007 के दौरान इसके मौजूदा रूप में आरंभ किया गया था और तब से इसको प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अधीन शामिल किया गया है।मंत्री ने कहा कि पंजाब साधारण श्रेणी के किसानों को 80 प्रतिशत और अनुसूचित जाति/जनजाति, महिलाओं और छोटे/सीमांत श्रेणी के किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी मुहैया करवा रहा है, जोकि देश भर में दी जा रही सबसे अधिक सब्सिडी की प्रतीशत में से एक है।उन्होंने कहा कि सब्सिडी में केंद्र की हिस्सेदारी हालाँकि कई सालों से कम रही है परन्तु राज्य अपने संसाधनों से यह सब्सिडी मुहैया करवा रहा है।क्रार्यक्रम को राज्य में मैनुअल तरीके द्वारा लागू किया जा रहा था, जहाँ किसान को नज़दीकी मृदा एवं जल संरक्षण कार्यालय में जाकर आवेदन देना पड़ता था, जिस पर आगे भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा कार्यवाही की जाती थी, जिसको मंज़ूरी देने में कई बार हफ़्ते भी लग जाते थे।हाल ही के भूजल के अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि भूजल की मौजूदा निकासी दर जारी रहती है तो पंजाब 1000 फुट तक के ज़मीनी पानी से वंचित हो जायेगा। 

इसके निष्कर्ष के तौर पर ज़मीनी पानी निकालने के लिए और ज्यादा लागत आयेगी जिससे किसानों की आय घटेगी।जि़क्रयोग्य है कि राणा गुरजीत सिंह पंजाब की कृषि और पानी के मुद्दों को सदन में उजागर करते रहे हैं, जिसके नतीजे के तौर पर सरकार ने मार्च, 2021 में भूजल के मुद्दों को हल करने के लिए एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी की रिपोर्ट, जो पहले ही स्पीकर को सौंपी जा चुकी है, परन्तु अभी विधान सभा में पेश की जानी है, उन्होंने कहा कि हमने पानी के हर पहलू को छूआ है और यह रिपोर्ट निश्चित रूप से हर क्षेत्र में जल क्षेत्र के प्रोग्रामों को लागूकरण की रूपरेखा के रूप में काम करेगी।उन्होंने आगे बताया कि कृषि में जल स्रोतों का सबसे बड़ा उपभोग होता है, इसलिए रिपोर्ट में सिंचाई क्षेत्र में कुशलता बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया है।किसानों के कल्याण के लिए पंजाब सरकार की वचनबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने अधिकारियों को प्रौद्यौगिकी का लाभ लेकर ऐसी नयी खोजें विकसित करने का न्योता दिया क्योंकि स्मार्ट खेती ही खेती का भविष्य है। उन्होंने विभाग को भूमि पर एक आनलाइन पोर्टल की तलाश करने और विकसित करने के लिए भी कहा, जहाँ किसान अपनी भूमि की हरेक छोटी से छोटी जानकारी रियल टाईम के आधार पर प्राप्त कर सकता है और ज़रुरी पौष्टिक तत्वों का प्रयोग कर सकता है जिससे और ज्यादा खाद का उपभोग घटने के साथ-साथ लागत ख़र्च घटेगा और किसानों के मुनाफे में विस्तार होगा।अतिरिक्त मुख्य सचिव, मृदा एवं जल संरक्षण पंजाब श्रीमती सीमा जैन ने इस मौके पर बोलते हुये विभाग को सूक्ष्म सिंचाई आनलाइन पोर्टल लांच करने के लिए बधाई दी, जिससे किसानों को उनके मामलों के लिए अप्लाई करने और कार्यवाही करने में आसानी होगी।उन्होंने कहा कि यह विभागीय अधिकारियों के लिए भी लाभदायक होगा क्योंकि अनुमानों को तैयार करने में गलती होने की लगभग ज़ीरो संभावना होगी क्योंकि यह सभी प्री-प्रोग्राम किये डाटा पर आनलाइन तैयार किये जाएंगे। यह आनलाइन आवेदन और ज्यादा पारदर्शिता लायेगी क्योंकि किसान अपने आवेदन की स्थिति को देखने के योग्य होगा और हरेक स्तर के अधिकारी को एक निर्धारित समय में आवेदन का निपटारा करना पड़ेगा।

पानी के बढ़ रहे संकट पर बोलते हुये उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों से विभाग का मुख्य ध्यान भूमिगत पाईपलाईनों और सूक्ष्म सिंचाई के द्वारा कृषि क्षेत्र में पानी की संभाल के प्रोग्रामों के इलावा कृषि में प्रयोग के लिए सिवरेज प्लांटों से संशोधित पानी जैसे परिवर्तनीय पानी के स्रोतों को विकसित करने पर रहा है जिससे भूजल की निकासी को घटाया जा सके।मुख्य भूमिपाल, पंजाब श्री राजेश विशिष्ट ने इस आनलाइन पोर्टल के कामकाज के बारे जानकारी देते हुये बताया कि अब किसान अपने फ़ोन या कंप्यूटर से सूक्ष्म सिंचाई के लिए अप्लाई कर सकता है। उसको सिर्फ़ बुनियादी दस्तावेज़ों जैसे कि पहचान, पता और भूमि रिकार्ड प्रमाण की ज़रूरत होगी, जो कि आवेदन के साथ फ़सल और प्रणाली की किस्म यानि ड्रिप या फव्हारा के साथ अपलोड करने पड़ेंगे। आवेदन जमा करवाने पर किसान को लागत अनुमान और भुगतान योग्य सब्सिडी का विवरण मिलेगा और अपनी संतुष्टी के बाद वह आगे की प्रक्रिया के लिए अपने आवेदन की पुष्टी कर सकता है।सारी जानकारी और दरों को आनलाइन प्रणाली में पहले से ही दर्ज किया गया है और सभी अनुमान आनलाइन तैयार किये जाएंगे जिससे कोई गलती न हो। एक बार जब किसान अपनी आवेदन की पुष्टी करता है तो यह अलग-अलग स्तरों जैसे कि सैक्शन, सब-डिवीजऩ, डिवीजऩ आदि स्तर पर सिर्फ़ आनलाइन विधि के द्वारा आगे बढ़ेगा और हरेक स्तर पर आवेदन की प्रक्रिया के लिए एक निश्चित समय सीमा दी जायेगी। किसान अपने आवेदन की प्रक्रिया सम्बन्धी अलग-अलग स्तरों पर एसएमएस प्राप्त करेगा। एक बार जब समर्थ अधिकारी द्वारा आवेदन मंज़ूर हो जाता है, विक्रेता के साथ किसान को सूचित किया जायेगा और विक्रेता प्रणाली को किसान के खेत में स्थापित करेगा जिसकी विभाग के अधिकारी द्वारा खेत के जीपीएस कोआर्डीनेटस, जो इस आनलाइन पोर्टल पर दिए जाएंगे, लेते हुये भौतिक तौर पर तस्दीक की जाऐगी।

 

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