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सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रोद्योगिकी संस्थान स्थापना दिवस

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पालमपुर , 02 Jul 2019

Last updated on: Jul 02, 2019, 00:00 IST

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा  प्रोद्योगिकी संस्थान ने 2 जुलाई 2019 को अपना 37वां स्थापना दिवस मनाया। प्रो. अखिलेश त्यागी, जे. सी. बास नेशनल फेलो, पादप आण्विक जीवविज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, साउथ कैम्पस, नई दिल्ली ने अप्रोचिंग बायोइकोनामी थू्र एग्रीबायोटेक्नोलाजी विषय पर स्थापना दिवस संभाषण दिया। अपने संबोधन में प्रो. त्यागी ने जैवआर्थिकी के लिए व्यवसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण औषधीय सगंध और अन्य पौधों की खेती को बढ़ावा देना होगा। जनसमुदाय की बढ़ती मागं तथा घटते प्राकृतिक संसाधनों के चलते कृषि जैवप्रौद्योगिकी एवं संबन्धित विज्ञान का उपयोग करते हुए आगे बढ़ना होगा तभी हम इन समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। मुख्य अतिथि प्रो. सुधीर कुमार सोपोरी, एसईआरबी विशिष्ट वैज्ञानिक, आईसीजीईबी, नई दिल्ली, पूर्व कुलपति, जेएनयू एवं ग्रुप लीडर एवं निदेशक, आईसीजीईबी ने समारोह की अध्यक्षता की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डा. सोपोरी ने किसानों से जुड़कर उनकी  नई तकनीकों एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फसलों को लगाने के लिए प्रेरित करने के लिए संस्थान के प्रयासों को सराहा। उन्होंने आगे बताया कि आज ज्ञान , नई प्रौद्योगिकी अपार हैं आवश्यकता ज्ञान प्रबन्धन की हैं। इस ज्ञान प्रबन्धन के द्वारा बहुत सी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।इससे पूर्व संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने संस्थान के वार्षिक प्रतिवेदन को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष सीएसआईआर-आईएचबीटी ने एसीइमेगो संस्थान रेंकिग में सीएसआईआर के 30 शीर्ष संस्थानों में 9वां स्थान पाया था, इस वर्ष और सुधार करते हुए हम 7वें स्थान पर हैं।सीएसआईआर-आईएचबीटी क¨ एग्री-न्यूट्री-बाय¨टेक विषय के अन्तर्गत 20 सीएसआईआर-प्रय¨गशालाओं में विभिन्न परिय¨जनाओं क¨ लागू करने के लिए न¨डल लैब के रूप में मान्यता दी गई है। 

एक नई पहल के रूप में जैवप्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों के लिए हिमालयी क्षेत्र की सूक्ष्मजैव विविधता की खोज के लिए हिमालयी क्षेत्र से माइक्रोबायोम के बायोप्रोस्पेक्शन पर शोध किया गया। परियोजना में माइक्रोबियल आइसोलेट्स को अनुक्रमित करने और मेटाजिनोमिक्स विविधता को समझने पर कार्य किया गया।उन्होंने आगे बताया कि हिमालयी सूक्ष्मजैव स्त्रोतों से एक प्रभावी एल-एस्परजिनेस एंजाइम की खोज की जिसमें कोई ग्लूटामिनेज़ गतिविधि नहीं थी तथा यह हिमोसाइटिक ल्यूकेमिया के उपचार में चिकित्सीय अनुप्रयोगों के लिए उपयोगी है। इस एंजाइम का खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में व्यापक अनुप्रयोग है।सीएसआईआर के फाइटोफार्मास्यूटिकल, अरोमा और न्यूट्रास्यूटिकल  जैसे प्रमुख मिशन म¨ड परिय¨जनाओं में भी भागीदारी की।एक लाख यूनिट प्रोटीन और फाइबर से समृद्ध बार तथा खिचड़ी को सितंबर, 2018 में केरल बाढ़ के पीड़ितों को  वितरित किया गया। चिलिंग सेब की किस्मों का विस्तार मिजोरम, मणिपुर और मेघालय में 15.6 एकड़ किया जा रहा है।सीएसआईआर-एन.बी.आर.आई , लखनऊ के निदेशक डा. सरोज कुमार बारिक इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने विशाल हिमालय की समस्याओं  के उत्थान के लिए संस्थान को हिमालयी संस्थानों का नेटबर्क बना कर आगे बढ़ना होगा।इस अवसर पर संस्थान के वार्षिक प्रतिवेदन 2018-19 का विमोचन किया गया।  कैला लिलि, वेलेरियाना, चिया  तथा किनवा पर चार ब्र¨शर के साथ-साथ संस्थान की टेक्नोलाॅजी प्रोफाइल तथा नियम पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।इस अवसर पर नेशनल इंस्यिूटयूट ऑफ़ चाइनिज मेडिसन, ताइवान से डा. फेंग राॅग चेंग, निदेशक की अध्यक्षता में वैज्ञानिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी इस समारोह में प्रतिभागिता की। कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा, एस.के. शर्मा, काॅर्ड की राष्ट्रीय निदेशक डा. क्षमा मैत्रै, उद्यमी सुरेन्द्र मोहन  सहित विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के वैज्ञानिक, उद्यमियों, प्रमुख नागरिकों और मीडिया प्रतिनिधियों ने सुशोभित किया।

 

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