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पाश्चात्य जनसंख्या के मुकाबले भारतीयों को 10 से 15 साल पहले हो रहा कोरोनरी धमनी रोग

‘कार्डियोमर्जन-2014’ में देश-विदेश के कार्डियक एक्सपर्ट और दूसरे हेल्थकेयर मैनेजमेंट प्रोफेशनल लोगों ने लिया हिस्सा, जागरुकता के लिए करवाई गई इस कॉन्फ्रेंस में कई चौंका देने वाले तथ्य आए सामने

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एस.ए.एस. नगर (मोहाली) , 02 Feb 2014

Last updated on: Feb 02, 2014, 00:00 IST

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने यह भविष्यवाणी की है कि जल्द ही भारत कोरोनरी धमनी रोग के मामले में दुनिया की राजधानी होगा। भारतीयों को कोरोनरी धमनी में रुकावट की संजीदा बीमारियां होने लगी हैं और वह भी पश्चिमी देशों के मुकाबले 10 से 15 साल पहले। यह जानकारी मोहाली के फोर्टिस हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जरी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. टी.एस. महंत ने यह जानकारी दी ‘कार्डियोमर्जन-2014’ में। इस बार की थीम रखी गई ‘हृदवाहिनी बीमारियों से लड़ने के लिए हृदय रोग विशेषज्ञों की अप्रोच’। कार्डियक केयर क्षेत्र के जाने-माने फैकल्टी मेंबर्स और एक्सपर्ट्स ने अपना ज्ञान, अनुभव और योग्यता इस मौके पर सांझी की।

फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली के कार्डियोवस्कुलर एंड थोराकिक सर्जरी के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. दीपक पुरी ‘कार्डियोमर्जन’ ग्रुप के संस्थापक भी हैं और 2011 से इसी तरह के इवेंट करवा रहे हैं। इस इवेंट में न सिर्फ कार्डियक सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, कार्डियक अनेस्थेटिस्ट और कार्डियक इंटेंसिविस्ट बल्कि इससे जुड़ी दूसरी स्पेशेलिटी के एक्सपर्ट लोग और हेल्थकेयर मैनेजमेंट प्रोफेशनल भी हिस्सा लेते हैं। इस कॉन्फ्रेंस के मकसद पर बात करते हुए डॉ. पुरी ने बताया, ‘मॉडर्न जमाने में ‘हृदवाहिनी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए यह कॉन्फ्रेंस करवाई जाती है। यह पूरे विश्व, हमारे देश, हमारे रीजन और खासकर हमारे नौजवानों के लिए तेजी से बढ़ते रिस्क की तरह है। यह हकीकत है कि कोरोनरी धमनी रोग पाश्चात्य जनसंख्या के मुकाबले भारतीयों को ज्यादा तेजी से होता है और यहां तक कि एनआरआई लोग भी इस खतरे में ही हैं। इसलिए इलाज से बेहतर इसकी रोकथाम है।’

डॉ. टी.एस. महंत ने कहा, ‘हमारे देश के अर्थ-प्रबंधन यानी इकॉनमी पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। हालांकि सर्जिकल और मध्यवर्ती तकनीक तेजी से तरक्की कर रही है। कम खतरे वाली अत्याधुनिक तकनीक जिससे कोई जख्म तक नहीं होता, वह भी उपलब्ध हैं। यहां तक कि रोबोटिक सर्जरी और हाइब्रिड प्रक्रिया भी हैं जहां कार्डियक सर्जन और कार्डियोलॉजिस्ट मिलकर मरीज का इलाज करते हैं। पर फिर भी इस बीमारी का कोई पक्का इलाज नहीं है।’ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरुक करने के लिए, खासकर हेल्थकेयर से जुड़े लोग, इवेंट के पहले दिन लाइफस्टाइल, स्ट्रेस, डाइट, न्यूट्रीशियन, कार्डियक पुनर्सुधार और हृदवाहिनी रोग में योगा की अहमियत पर बात की गई। इसके साथ-साथ हृदय रोग पर हुई रिसर्च स्टडी पर भी चर्चा हुई। दूसरे दिन रविवार को हृदवाहिनी रोगों की मैनेजमेंट पर डॉक्टरों ने अपडेट और वितर्क पेश किए। गेस्ट लेक्चर देने वालों में देश के जाने-माने कार्डियक सर्जन शामिल थे जैसे, डॉ. एच.के. बाली, डॉ. जी.एस. कालड़ा और डॉ. आर.के. जसवाल (डायरेक्टर्स-कार्डियोलॉजी, फोर्टिस मोहाली), डॉ. यू. कौल (हेड-एकेडमिक्स, फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड), डॉ. रोहित मनोज (पीजीआई), डॉ. आई.एस. विरदी (एलकेमिस्ट हॉस्पिटल, पंचकूला), डॉ. युगल मिश्रा (फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली), डॉ. के.पी. सिंह (सीनियर कंसल्टेंट, फोर्टिस मोहाली)।

विदेश से आई फैकल्टी में शामिल थे डॉ. तोशीहीरो फुजीमत्सू (अध्यक्ष, होकूतो सोशल मेडिकल कॉर्पोरेशन, ओबीहीरो शहर, जापान) जो कि एऑर्टिक आर्क एन्योरिज्म सर्जरी में एक्सपर्ट हैं। इस तरह की सर्जरी बहुत पेचीदा होती है और इसे जानलेवा माना जाता है। भारत में अभी तक कोई भी डॉक्टर इस तरह की सर्जरी को सफलता से नहीं कर पाए हैं। डॉ. फुजीमत्सू ने हिस्सा लेने वालों को इस सर्जरी के बारे में शिक्षित किया।

पहले दिन के स्पीकर:

डॉ. दीपक पुरी, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली (कॉन्फ्रेंस की थीम)

डॉ. प्रीति प्रधान, डीन, चितकारा स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज (हृदवाहिनी रोग से पीड़ित मरीजों की जानकारी बढ़ाना)

डॉ. पल्लवी जस्सल, डायटीशियन (अर्बन इंडिया में बढ़ते लाइफस्टाइल रोगों)

डॉ. सोनिया गांधी, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली (फूड सप्लिमेंट्स के इस्तेमाल)

डॉ. मधू अरोड़ा, जीएमसीएच, चंडीगढ़ (डायबिटिक मरीजों के लिए न्यूट्रीशनल डाइट)

डॉ. स्मिता, मुंबई से (हृदवाहिनी रोगों में अपरंपरागत थेरेपी की भूमिका)

डॉ. प्रतीक और डॉ. शुभी भटनागर, हैदराबाद से (हृदवाहिनी पुनर्सुधार)

डॉ. एच.एस. बेदी, सीएमसी, लुधियाना (हृदवाहिनी रोगों में योगा की अहमियत)

डॉ. मुनीश, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली (कार्यस्थल परिस्थिति विज्ञान)

डॉ. सोनू मल्होत्रा, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली (मैनेजमेंट का दृष्टिकोण)

डॉ. मनप्रीत सोहल (हृदवाहिनी रोग में मेडिको-कानूनी मुद्दों के अपडेट)

डॉ. रचना, आर्टेमिस, दिल्ली (लाइफस्टाइल और स्ट्रेस का हृदवाहिनी रोग पर प्रभाव)

दूसरे दिन के स्पीकर:

डॉ. फुजीमत्सू, जापान (एऑर्टिक आर्क एन्योरिज्म रिपेयर की तकनीक पर भारतीय दृष्टिकोण)

डॉ. एच.के. बाली, डायरेक्टर-कार्डियोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली (कोलेस्ट्रोल मैनेजमेंट)

डॉ. एम.एल. चावला, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली (हाइपरटेंशन मैनेजमेंट)

डॉ. जे.एस. ग्रेवाल (कोरोनरी इंटरवेंशन मैनेजमेंट)

डॉ. आई.एस. विरदी, एलकेमिस्ट हॉस्पिटल, पंचकूला (एसीएस में सर्जिकल रीवस्कुलराइजेशन की टाइमिंग)

डॉ. जी.एस. कालड़ा (कार्डियक केयर यूनिट में इंटेंसिव केयर)

डॉ. आर.के. जसवाल (एसीएस में ट्रांस रेडिकल पीसीआई)

डॉ. यू. कौल (बलून एंजियोप्लास्टी, स्टंट के खत्म होने)

डॉ. रोहित मनोज, पीजीआई, चंडीगढ़ (जन्मजात हृदय रोग को मात्र लैब से ही ठीक करना)

डॉ. युगल मिश्रा, एस्कॉर्ट्स, दिल्ली (कम जोखिम भरी कार्डियक सर्जरी)

डॉ. अंबुज चौधरी, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली (री-डू ओपीकैब की तकनीक और परिणाम)

डॉ. रावुल जिंदल, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली (पेचीदा एऑर्टिक ऐन्योरिज्म पैथोलॉजी की मैनेजमेंट)

डॉ. वी.पी. सिंह, डीएमसी, लुधियाना (हृदवाहिनी रोगों की मैनेजमेंट में बदलते मेडिको-कानूनी मुद्दे)

 

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