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हरित आवरण वृद्धि के लिए हिमाचल सरकार के नवीन प्रयास

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5 Dariya News

शिमला , 02 Sep 2018

Last updated on: Sep 02, 2018, 00:00 IST

हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार ने कई कदम उठाए हैं। वर्तमान प्रदेश सरकार ने वानिकी विकास के लिए तीन वानिकी परियोजनाएं आरम्भ की हैं और वनों के संरक्षण और विकास में स्थानीय लोगों की भगीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।प्रदेश में वानिकी गतिविधियों में युवक व महिला मण्डलों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘सामुदायिक वन संवर्द्धन योजना’ शुरू की गई है। योजना के तहत युवक व महिला मण्डलों को उपयोगी पौधों की प्रजातियों के वृक्षारोपण के लिए वन भूमि में भू-खण्ड आवंटित किए जाएंगे। इसी प्रकार से ‘विद्यार्थी वन मित्र योजना’ के तहत स्कूलों को भी पौधरोपण के उद्देश्य से भू-खण्ड आवंटित किए जाएंगे। ‘वन समृद्धि, जन समृद्धि’ योजना के तहत लोगों को ग्रामीण वनों से जड़ी-बूटियां एकत्रित कर स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, मूल्य वृद्धि व विपणन प्रदान किया जायेगा।प्रदेश सरकार ने सामुदायिक वन संवर्द्धन योजना और विद्यार्थी वन मित्र योजनाओं के तहत वांच्छित परिणाम हासिल करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री महिला वन मित्र पुरस्कार व मुख्यमंत्री युवा वन मित्र पुरस्कार योजनाएं आरम्भ की हैं। इसी तरह से सरकारी व निजी स्कूलों के लिए मुख्यमंत्री बाल वन मित्र पुरस्कार योजना आरम्भ की गई है। मुख्यमंत्री महिला वन मित्र पुरस्कार व मुख्यमंत्री युवा वन मित्र पुरस्कार योजनाओं के तहत महिला व युवक मण्डलों को वनों को अग्नि बचाव में उत्कृष्ट योगदान, उत्कृष्ट पौध रोपण, जैव विविधता संरक्षण, वनों के भोगाधिकार में दीर्घकालीन विकास व तंत्र प्रक्रिया को सांझा करने के लिए प्रशस्ति पत्र के साथ क्रमशः 50-50 हजार, 40-40 हजार व 30-30 हजार रुपये के नकद प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।  मुख्यमंत्री बाल वन मित्र पुरस्कार योजना के तहत सरकारी व नीजि स्कूलों को पौधरोपण में उत्कृष्ट कार्य करने, पौध उगाने व उसके बचाव के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने व वन संरक्षण में जागरूकता योगदान के लिए प्रशस्ति प्रत्र के साथ क्रमशः एक लाख, 75 हजार व 50 हजार रुपये के नकद प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। वानिकी एवं पर्यवरण संरक्षण सरकार के उचित मार्गदर्शन व जन-सहभागिता के बिना सफल नहीं हो सकता है। वानिकी गतिविधियों व पर्यावरण संरक्षण में पंचायतों की सहभागिता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वानिकी गतिविधियों में पंचायतों की अधिक से अधिक भूमिका सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री वन मित्र पंचायत पुरस्कार’ योजना आरम्भ की गई है।

 योजना के तहत पंचायतों को वनों को अग्नि बचाव में उत्कृष्ट योगदान, उत्कृष्ट पौध रोपण, जैव विविधता संरक्षण, वनों के भोगाधिकार में दीर्घकालीन विकास व तंत्र प्रक्रिया को सांझा करने के लिए प्रशस्ति पत्र के साथ क्रमशः एक लाख, 75 हजार व 50 हजार रुपये के नकद प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में हरित आवरण बढ़ाने के सरकारी प्रयासों के तहत वन विभाग द्वारा संयुक्त वन प्रबन्धन तथा सार्वजनिक वन प्रबन्धन समितियां गठित की गई हैं। ये समितियां पौधरोपण कर हरित आवरण बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन समितियों को वानिकी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री सर्वोत्म वन प्रबन्धन समिति पुरस्कार’ योजना आरम्भ की गई है। योजना के तहत इन समितियों को वनों को अग्नि बचाव में उत्कृष्ट योगदान, उत्कृष्ट पौध रोपण, जैव विविधता संरक्षण, वनों के भोगाधिकार में दीर्घकालीन विकास व तंत्र प्रक्रिया को सांझा करने के लिए प्रशस्ति पत्र के साथ क्रमशः एक लाख, 75 हजार व 50 हजार रुपये के नकद प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।सरकार प्रदेश के हरित आवरण को बढ़ाने के लिए सदैव संजीदा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने 69वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव के अवसर पर जिला सिरमौर के राजगढ़ में स्वयं देवदार का पौधा रोपित कर प्रदेश में पौध-रोपण अभियान की शुरूआत की। इस बार वन महोत्सव को जन आन्दोलन का रूप देते हुए वर्षा ऋतु के दौरान 12 से 14 जुलाई, 2018 तक तीन दिवसीय पौधरोपण अभियान के दौरान प्रदेश भर में रिकार्ड संख्या में 17.51 लाख पौधे रोपित किए गए। वन विभाग द्वारा चलाए गए इस अभियान में समाज के विभिन्न वर्गों के 86,231 लोगों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। इस अभियान के दौरान वन विभाग के कुल 13 वृत्तों के 41 वन मण्डलों में 600 स्थलों पर पौधरोपण किया गया। प्रदेश में वन संर्वद्धन को आजीविका से जोड़ने के लिए जाईका द्वारा वित्तपोषित 800 करोड़ रुपये की ‘हिमाचल प्रदेश वन पारिस्थितिकीय तंत्र प्रबन्धन एवं आजीविका परियोजना’ आरम्भ की गई है, जिसे कुल्लू, मण्डी, लाहौल-स्पीति, बिलासपुर, शिमला तथा किन्नौर सहित छः जिलों में आरम्भ किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत 460 समितियों का गठन कर वन एवं पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता एवं जीव जन्तु, संरक्षण, आजीविका में सुधार जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।सरकार के इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरुप प्रदेश के हरित आवरण में लागातार वृद्धि दर्ज हो रही है। वर्ष 2017 की भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट में वर्ष 2015 की तुलना में प्रदेश के वन क्षेत्र में एक प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है जबकि 2015 की रिपोर्ट के अनुसार 13 वर्ग कि.मी. वन क्षेत्र की वृद्धि दर्ज की गई है। 

 

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