मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि व्यक्ति विशेष के विकास और प्रगति का आधार शिक्षा है तथा देश के नागरिकों के भविष्य को संवारने में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री आज धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने इस मौके पर 108 स्कूलों के 72 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया।इस अवसर पर विद्यार्थियों और उनके शिक्षकों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षण उनके लिए गौरवमयी हैं कि शिक्षा एवं अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की अहमियत को समझती है और राज्य में शिक्षा के ढांचे को और सुदृढ़ बनाने के लिए पर्याप्त अधोसंरचना विकसित की गई है। प्रदेश में 15534 स्कूलों के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान की जा रही है। गत तीन वर्षों के दौरान 994 स्कूल स्तरोन्नत व आरम्भ किए गए जबकि 25 नए डिग्री कालेज प्रदेश के दूर-दराज एवं दुर्गम क्षेत्रों में आरम्भ किए गए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 94 डिग्री कालेज हैं और इनमें से अधिकांश कालेज कांग्रेस कार्यकाल में ही खोले गए।
श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी व केंद्रीय विद्यालय के विद्यार्थियों को निशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। राजीव गांधी डिजीटल योजना के अन्तर्गत इस वित्त वर्ष के दौरान दसवीं और 10 जमा दो के 10 हजार मेधावी विद्यार्थियों को नेट बुक्स व लैप-टाॅप प्रदान किए जा रहे हैं। इसके अलावा, सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को साल में दो बार स्कूल वर्दी प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज जहां सुविधाएं बढ़ी हैं वहीं प्रतिस्पर्धा व चुनौतियां भी बढ़ीं हैं। आज के सूचना प्रौद्योगिकी के बदलते परिपेक्ष्य में प्रत्येक को बदलते आधुनिक प्रचलन को अपनाना होगा। उन्होंने आशा जताई कि जिन मेधावी विद्यार्थियों को आज पुरस्कृत किया गया है वे इन सभी चुनौतियों का सामना करते हुए दूसरों के लिए भी आदर्श स्थापित करेंगे।
श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि वे स्कूल जो बेहतर परिणाम देने में असफल रहे हैं अथवा जहां विद्यार्थी अंक प्राप्त नहीं कर सके हैं, ऐसे स्कूलों के शिक्षकों के कार्य निष्पादन का मूल्यांकन किया जाएगा तथा अच्छे परिणाम न आने के कारणों की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर व्यक्ति का यह दायित्व बनता है कि वे राज्य की समृद्ध संस्कृति व रीति-रिवाजों का संरक्षण करे तथा अपने से बढ़ों व शिक्षकों का आदर करें।मुख्यमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि शिक्षा बोर्ड तकनीकी अधोसंरचना को स्तरोन्नत कर विभिन्न प्रकार की प्रवेश एवं भर्ती परीक्षाओं का आयोजन कर रहा है। इसके अतिरिक्त, बोर्ड द्वारा बायोमीट्रिक आधारित हाजि़री प्रणाली को अपनाया है, जिससे कार्य में और दक्षता आई है।इससे पूर्व, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष श्री बलबीर तेगटा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया तथा समारोह की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बोर्ड द्वारा प्रभावी कार्यान्वय के लिए चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी।स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव श्री विनय धीमान ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।वन मंत्री श्री ठाकुर सिंह भरमौरी, विधायक श्री अजय महाजन, राज्य वन विकास निगम के उपाध्यक्ष श्री केवल सिंह पठानिया, पूर्व विधायक श्री सुरेन्द्र काकू, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सदस्य श्री सीता राम शास्त्री तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।