Thursday, 18 April 2024



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Punjab Cyber Crime Division Directs Banks To Appoint Nodal Officers To Coordinate With Police To Prevent Cyber Financial Frauds

ADGP Cyber Crime Holds Meeting With Leading Banks, Seeks Cooperation To Spread Awareness About Helpline 1930

V Neeraja, ADGP Cyber Crime, Punjab Police, Police, Punjab Admin, Chandigarh
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5 Dariya News

Chandigarh , 25 Feb 2024

In order to enhance coordination between the police and bank authorities to prevent Cyber Financial frauds in the state as desired by Chief Minister Bhagwant Singh Mann, Cyber Crime Division of Punjab Police has asked the banks to appoint a separate Nodal Officers for 1930 Cyber Helpline to ensure priority blocking of bank accounts and also for providing details regarding suspect bank accounts in timely manner.

The decision came during the coordination meeting conducted by ADGP Cyber Crime V Neeraja with representatives of several banks to reduce the response time of the Banks on complaints registered on CFCFRMS portal. The meeting was organised on the directions of Director General of Police (DGP) Punjab Gaurav Yadav, which was attended by 17 officials from 11 leading banks including State Bank of India, HDFC Bank, ICICI Bank, Punjab National Bank, Axis Bank, RBL Bank, Union Bank of India, Bank of Baroda, Yes Bank, Indian Bank and IDFC First Bank. 

DIG Cyber Crime Nilambari Jagdale and DSP Cyber Crime Prabhjot Kaur were also present in the meeting. ADGP V Neeraja said that Cyber Helpline 1930 is a Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System (CFCFRMS), which allows victims of cyber financial frauds to freeze their money in the accounts of the accused/suspects immediately after the registration of complaint on this helpline.

During the meeting, detailed discussions were held regarding the challenges being faced in tackling Cyber financial frauds and the procedure to expedite the processing of complaints filed via Cyber Crime helpline 1930, she said. She said that banks have been requested to carry out awareness campaigns on Cyber Financial Frauds to sensitise people about reporting such cyber frauds on the 1930 Helpline number. 

Banks were also asked to prominently display 1930 helpline number on flex boards or posters within and outside of the banks, besides, promoting it on their official websites, she added. The ADGP said that banks were also asked to cooperate with Punjab Police during investigation of cases by providing the UPI/Internet Banking logs, Bank statements, ATM Footage and KYC documents regarding suspect bank accounts in a time bound manner. 

Banks have also been directed to ensure physical verification of home addresses while opening fresh bank accounts to prevent opening of fake accounts, she said. She said that till now, approximately Rs 20 crores has been freezed in suspect bank accounts through 1930 Helpline, out of which approximately Rs 1.5 Crore has been refunded to the victims with the help of State Legal Services Authority, Punjab.

Meanwhile, the officials of the Banks have assured to extend full cooperation to the law enforcement agency in preventing cyber fraudsters from causing financial fraud on innocent public and help during investigation of cases.

पंजाब साईबर क्राइम डिवीजऩ ने साईबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए बैंकों को पुलिस के साथ तालमेल करने के लिए नोडल अफ़सर नियुक्त करने के लिए कहा  

एडीजीपी साईबर क्राइम ने प्रमुख बैंकों के साथ की मीटिंग, हेल्पलाइन 1930 संबंधी जागरूकता फैलाने के लिए सहयोग की माँग की  


मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों के अनुसार राज्य में साईबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए पुलिस और बैंक अधिकारियों के दरमियान तालमेल बढ़ाने के लिए, पंजाब पुलिस की साईबर क्राइम डिविजऩ ने 1930 साईबर हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों के निपटारे के लिए बैंकों को अलग नोडल अफ़सर नियुक्त करने के लिए कहा है, जिससे बैंक खातों को पहल के आधार पर ब्लॉक करना और संदिग्ध बैंक खातों के विवरण समय पर मुहैया करवाना सुनिश्चित बनाया जा सके।  

यह फ़ैसला एडीजीपी साईबर क्राइम वी. नीरजा द्वारा सी.एफ.सी.एफ.आर.एम.एस. पोर्टल पर दर्ज शिकायतों सम्बन्धी बैंकों द्वारा जवाब देने के समय को घटाने के लिए अलग-अलग बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ की गई तालमेल बैठक के दौरान लिया गया। यह मीटिंग डायरैक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) पंजाब गौरव यादव के दिशा-निर्देशों पर करवाई गई थी, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एच.डी.एफ.सी. बैंक, आई.सी.आई.सी.आई. बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, ऐक्सिस बैंक, आर.बी.एल. बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ोदा, यैस बैंक, इंडियन बैंक और आई.डी.एफ.सी. फस्र्ट बैंक समेत 11 प्रमुख बैंकों के 17 अधिकारियों ने भाग लिया। 

मीटिंग में डीआईजी साईबर क्राइम नीलांबरी जगदले और डीएसपी साईबर क्राइम प्रभजोत कौर भी उपस्थित थे। एडीजीपी वी. नीरजा ने कहा कि साईबर हेल्पलाइन 1930 एक सिटिजन फाइनेंशियल साईबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) है, जिसकी मदद से साईबर वित्तीय धोखाधड़ी के पीडि़तों द्वारा इस हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद मुलजि़मों/संदिग्ध व्यक्तियों के खातों में पीडि़तों द्वारा जमा करवाए गए पैसों को फ्रीज कर दिया जाता है।  

उन्होंने बताया कि मीटिंग के दौरान साईबर वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए दरपेश चुनौतियों और साईबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के द्वारा दर्ज शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज करने संबंधी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि बैंकों को साईबर वित्तीय धोखाधड़ी संबंधी जागरूकता मुहिम चलाने की अपील की गई, जिससे लोगों को 1930 हेल्पलाइन नंबर पर ऐसी साईबर धोखाधडिय़ों की रिपोर्ट करने संबंधी जागरूक किया जा सके। 

उन्होंने आगे कहा कि बैंकों को 1930 हेल्पलाइन नंबर को बैंकों के अंदर और बाहर फ्लैक्स बोर्डों या पोस्टरों पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ अपनी अधिकृत वैबसाईटों पर दिखाने के लिए भी कहा गया है। एडीजीपी ने कहा कि बैंकों को समयबद्ध ढंग से संदिग्ध बैंक खातों संबंधी यूपीआई/ इंटरनैट बैंकिंग लॉग, बैंक स्टेटमैंट्स, एटीएम फुटेज और केवाईसी दस्तावेज़ मुहैया करवा कर ऐसे मामलों की जांच के दौरान पंजाब पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए कहा गया है।

उन्होंने कहा कि नकली खाते खोलने से रोकने के लिए बैंकों को नये बैंक खाते खोलने के समय घरों के पतों की व्यक्तिगत तौर पर जाँच करने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 1930 हेल्पलाइन के द्वारा संदिग्ध बैंक खातों में लगभग 20 करोड़ रुपए फ्रीज किए जा चुके हैं, जिसमें से लगभग 1.5 करोड़ रुपए राज्य कानूनी सेवा अथॉरिटी, पंजाब की मदद से पीडि़तों को वापस किये जा चुके हैं। ताने योग्य है कि बैंकों के अधिकारियों द्वारा भोले-भाले लोगों को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए लॉ एंफोर्समैंट एजेंसी को पूरा सहयोग देने और मामलों की जांच के दौरान मदद का आश्वासन दिया गया।

ਪੰਜਾਬ ਸਾਈਬਰ ਕ੍ਰਾਈਮ ਡਿਵੀਜ਼ਨ ਨੇ ਸਾਈਬਰ ਵਿੱਤੀ ਧੋਖਾਧੜੀ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਬੈਂਕਾਂ ਨੂੰ ਪੁਲਿਸ ਨਾਲ ਤਾਲਮੇਲ ਕਰਨ ਵਾਸਤੇ ਨੋਡਲ ਅਫਸਰ ਨਿਯੁਕਤ ਕਰਨ ਲਈ ਕਿਹਾ 

ਏਡੀਜੀਪੀ ਸਾਈਬਰ ਕ੍ਰਾਈਮ ਨੇ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਬੈਂਕਾਂ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਮੀਟਿੰਗ, ਹੈਲਪਲਾਈਨ 1930 ਬਾਰੇ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਫੈਲਾਉਣ ਲਈ ਸਹਿਯੋਗ ਦੀ ਕੀਤੀ ਮੰਗ 


ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਦੀ ਨਿਰਦੇਸ਼ਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਸੂਬੇ ਵਿੱਚ ਸਾਈਬਰ ਵਿੱਤੀ ਧੋਖਾਧੜੀ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਪੁਲਿਸ ਤੇ ਬੈਂਕ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਦਰਮਿਆਨ ਤਾਲਮੇਲ ਵਧਾਉਣ ਵਾਸਤੇ, ਪੰਜਾਬ ਪੁਲਿਸ ਦੀ ਸਾਈਬਰ ਕਰਾਈਮ ਡਵੀਜ਼ਨ ਨੇ 1930 ਸਾਈਬਰ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ‘ਤੇ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਸ਼ਿਕਾਇਤਾਂ ਦੇ ਨਿਪਟਾਰੇ ਲਈ ਬੈਂਕਾਂ ਨੂੰ ਵੱਖਰੇ ਨੋਡਲ ਅਫ਼ਸਰ ਨਿਯੁਕਤ ਕਰਨ ਲਈ ਕਿਹਾ ਹੈ ਤਾਂ ਜੋ ਬੈਂਕ ਖਾਤਿਆਂ ਨੂੰ ਪਹਿਲ ਦੇ ਆਧਾਰ 'ਤੇ ਬਲਾਕ ਕਰਨਾ ਅਤੇ ਸ਼ੱਕੀ ਬੈਂਕ ਖਾਤਿਆਂ ਦੇ ਵੇਰਵੇ ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਮੁਹੱਈਆ ਕਰਵਾਉਣਾ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਇਆ ਜਾ ਸਕੇ।

ਇਹ ਫੈਸਲਾ ਏਡੀਜੀਪੀ ਸਾਈਬਰ ਕ੍ਰਾਈਮ ਵੀ. ਨੀਰਜਾ ਵੱਲੋਂ ਸੀ.ਐਫ.ਸੀ.ਐਫ.ਆਰ.ਐਮ.ਐਸ. ਪੋਰਟਲ 'ਤੇ ਦਰਜ ਸ਼ਿਕਾਇਤਾਂ ਸਬੰਧੀ ਬੈਂਕਾਂ ਵੱਲੋਂ ਜਵਾਬ ਦੇਣ ਦੇ ਸਮੇਂ ਨੂੰ ਘਟਾਉਣ ਲਈ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਬੈਂਕਾਂ ਦੇ ਨੁਮਾਇੰਦਿਆਂ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਗਈ ਤਾਲਮੇਲ ਮੀਟਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਲਿਆ ਗਿਆ। ਇਹ ਮੀਟਿੰਗ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਜਨਰਲ ਆਫ਼ ਪੁਲਿਸ (ਡੀਜੀਪੀ) ਪੰਜਾਬ ਗੌਰਵ ਯਾਦਵ ਦੇ ਦਿਸ਼ਾ-ਨਿਰਦੇਸ਼ਾਂ 'ਤੇ ਕਰਵਾਈ ਗਈ ਸੀ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਸਟੇਟ ਬੈਂਕ ਆਫ਼ ਇੰਡੀਆ, ਐਚ.ਡੀ.ਐਫ.ਸੀ. ਬੈਂਕ, ਆਈ.ਸੀ.ਆਈ.ਸੀ.ਆਈ. ਬੈਂਕ, ਪੰਜਾਬ ਨੈਸ਼ਨਲ ਬੈਂਕ, ਐਕਸਿਸ ਬੈਂਕ, ਆਰ.ਬੀ.ਐਲ. ਬੈਂਕ, ਯੂਨੀਅਨ ਬੈਂਕ ਆਫ ਇੰਡੀਆ, ਬੈਂਕ ਆਫ ਬੜੌਦਾ, ਯੈੱਸ ਬੈਂਕ, ਇੰਡੀਅਨ ਬੈਂਕ ਅਤੇ ਆਈ.ਡੀ.ਐਫ.ਸੀ. ਫਸਟ ਬੈਂਕ ਸਮੇਤ 11 ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਬੈਂਕਾਂ ਦੇ 17 ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਨੇ ਭਾਗ ਲਿਆ। 

ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਡੀਆਈਜੀ ਸਾਈਬਰ ਕਰਾਈਮ ਨੀਲਾਂਬਰੀ ਜਗਦਲੇ ਅਤੇ ਡੀਐਸਪੀ ਸਾਈਬਰ ਕਰਾਈਮ ਪ੍ਰਭਜੋਤ ਕੌਰ ਵੀ ਹਾਜ਼ਰ ਸਨ। ਏਡੀਜੀਪੀ ਵੀ. ਨੀਰਜਾ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਾਈਬਰ ਹੈਲਪਲਾਈਨ 1930 ਇੱਕ ਸਿਟੀਜ਼ਨ ਫਾਈਨੈਂਸ਼ੀਅਲ ਸਾਈਬਰ ਫਰਾਡ ਰਿਪੋਰਟਿੰਗ ਐਂਡ ਮੈਨੇਜਮੈਂਟ ਸਿਸਟਮ (ਸੀਐਫਸੀਐਫਆਰਐਮਐਸ) ਹੈ, ਜਿਸ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਸਾਈਬਰ ਵਿੱਤੀ ਧੋਖਾਧੜੀ ਦੇ ਪੀੜਤਾਂ ਵੱਲੋਂ ਇਸ ਹੈਲਪਲਾਈਨ 'ਤੇ ਸ਼ਿਕਾਇਤ ਦਰਜ ਹੋਣ ਤੋਂ ਤੁਰੰਤ ਬਾਅਦ ਮੁਲਜ਼ਮਾਂ/ਸ਼ੱਕੀ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਖਾਤਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪੀੜਤਾਂ ਵੱਲੋਂ ਜਮ੍ਹਾ ਕਰਵਾਏ ਪੈਸਿਆਂ ਨੂੰ ਫਰੀਜ਼ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। 

ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਮੀਟਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਸਾਈਬਰ ਵਿੱਤੀ ਧੋਖਾਧੜੀ ਨਾਲ ਨਜਿੱਠਣ ਲਈ ਦਰਪੇਸ਼ ਚੁਣੌਤੀਆਂ ਅਤੇ ਸਾਈਬਰ ਕਰਾਈਮ ਹੈਲਪਲਾਈਨ 1930 ਰਾਹੀਂ ਦਰਜ ਸ਼ਿਕਾਇਤਾਂ ਦੇ ਨਿਪਟਾਰੇ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਤੇਜ਼ ਕਰਨ ਬਾਰੇ ਵਿਸਥਾਰਪੂਰਵਕ ਚਰਚਾ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਬੈਂਕਾਂ ਨੂੰ ਸਾਈਬਰ ਵਿੱਤੀ ਧੋਖਾਧੜੀ ਬਾਰੇ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਮੁਹਿੰਮ ਚਲਾਉਣ ਦੀ ਅਪੀਲ ਕੀਤੀ ਗਈ ਤਾਂ ਜੋ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ 1930 ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ 'ਤੇ ਅਜਿਹੀਆਂ ਸਾਈਬਰ ਧੋਖਾਧੜੀਆਂ ਦੀ ਰਿਪੋਰਟ ਕਰਨ ਬਾਰੇ ਜਾਗਰੂਕ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕੇ। 

ਉਨ੍ਹਾਂ ਅੱਗੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਬੈਂਕਾਂ ਨੂੰ 1930 ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ ਨੂੰ ਬੈਂਕਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਤੇ ਬਾਹਰ ਫਲੈਕਸ ਬੋਰਡਾਂ ਜਾਂ ਪੋਸਟਰਾਂ 'ਤੇ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਿਤ ਕਰਨ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਆਪਣੀਆਂ ਅਧਿਕਾਰਤ ਵੈੱਬਸਾਈਟਾਂ 'ਤੇ ਦਰਸਾਉਣ ਲਈ ਵੀ ਕਿਹਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਏਡੀਜੀਪੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਬੈਂਕਾਂ ਨੂੰ ਸਮਾਂਬੱਧ ਢੰਗ ਨਾਲ ਸ਼ੱਕੀ ਬੈਂਕ ਖਾਤਿਆਂ ਬਾਰੇ ਯੂਪੀਆਈ/ਇੰਟਰਨੈੱਟ ਬੈਂਕਿੰਗ ਲੌਗ, ਬੈਂਕ ਸਟੇਟਮੈਂਟਾਂ, ਏਟੀਐਮ ਫੁਟੇਜ ਅਤੇ ਕੇਵਾਈਸੀ ਦਸਤਾਵੇਜ਼ ਮੁਹੱਈਆ ਕਰਵਾ ਕੇ ਅਜਿਹੇ ਕੇਸਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਦੌਰਾਨ ਪੰਜਾਬ ਪੁਲਿਸ ਨਾਲ ਸਹਿਯੋਗ ਕਰਨ ਲਈ ਕਿਹਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਫਰਜ਼ੀ ਖਾਤੇ ਖੋਲ੍ਹਣ ਤੋਂ ਰੋਕਣ ਲਈ ਬੈਂਕਾਂ ਨੂੰ ਨਵੇਂ ਬੈਂਕ ਖਾਤੇ ਖੋਲ੍ਹਣ ਸਮੇਂ ਘਰਾਂ ਦੇ ਪਤਿਆਂ ਦੀ ਵਿਅਕਤੀਗਤ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਤਸਦੀਕ ਕਰਨ ਲਈ ਵੀ ਨਿਰਦੇਸ਼ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਹਨ।

ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਹੁਣ ਤੱਕ 1930 ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਰਾਹੀਂ ਸ਼ੱਕੀ ਬੈਂਕ ਖਾਤਿਆਂ ਵਿੱਚ ਲੱਗਭੱਗ 20 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਫਰੀਜ਼ ਕੀਤੇ ਜਾ ਚੁੱਕੇ ਹਨ, ਜਿਸ ਵਿੱਚੋਂ ਲਗਭਗ 1.5 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਸਟੇਟ ਕਾਨੂੰਨੀ ਸੇਵਾਵਾਂ ਅਥਾਰਟੀ, ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਪੀੜਤਾਂ ਨੂੰ ਵਾਪਸ ਕੀਤੇ ਜਾ ਚੁੱਕੇ ਹਨ। ਦੱਸਣਯੋਗ ਹੈ ਕਿ ਬੈਂਕਾਂ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਵੱਲੋਂ ਭੋਲੇ-ਭਾਲੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਵਿੱਤੀ ਧੋਖਾਧੜੀ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਲਾਅ ਇੰਫੋਰਸਮੈਂਟ ਏਜੰਸੀ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਸਹਿਯੋਗ ਦੇਣ ਅਤੇ ਮਾਮਲਿਆਂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਦੌਰਾਨ ਮਦਦ ਦਾ ਭਰੋਸਾ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ।



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