Thursday, 18 April 2024



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Successful organization of 'Project Amrit' of Sant Nirankari Charitable Foundation

Water is a gift from God, we have to take care of this nectar - Satguru Mata Sudiksha Ji Maharaj

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5 Dariya News

New Delhi , 25 Feb 2024

Inauguration of the second phase of 'Clean Water, Clean Mind' project under 'Amrit Project' under the holy patronage of Satguru Mata Sudiksha Ji Maharaj and Nirankari Rajpita Ramit Ji on the Chhath of Yamuna River.  Done from Ghat, I.T.O, Delhi.

Under the supervision of Chandigarh Sanyojak Sh. Navneet Pathak ji and area Mukhies, members of Nirankari Sewa Dal and Sadhsangat cleaned the surroundings of Sant Nirankari Satsang Bhawans of Sector 30-A, Sector 15 D, Maloya, Sector 45, Manimajra.

Shri Navneet Pathak ji told that Inspired by the teachings of Baba Hardev Singh Ji Maharaj, this project was organized on a large scale with the help of more than 11 lakh volunteers at more than 1533 places in 27 states and union territories across India.

Taking inspiration from the eternal teachings of Baba Hardev Singh Ji, ‘Project Amrit’ was organized under the aegis of Sant Nirankari Charitable Foundation, the social wing of Sant Nirankari Mission.  This year, the project took the form of public awareness through the basic message of ‘Aao Swaare, Yamuna Kinare’.  

On this occasion, all the officials of Sant Nirankari Mission, distinguished guests and thousands of volunteers and Sewa Dal members participated.  The program was broadcast live through the website of Sant Nirankari Mission, the benefit of which was availed by all the devotees sitting in the country and abroad.  

On this occasion, thousands of students and teachers of Delhi University along with many organizations and many dignitaries associated with environmental protection participated.  Radio Channel 92.7-BIG F.M.  And the Ministry of Culture of the Government of India also participated on this occasion.

Giving detailed information, Shri Joginder Sukhija, Secretary and Social Welfare In-charge of Sant Nirankari Mandal, said that during 'Project Amrit' every statutory safety parameter was properly followed.  In this program, proper arrangements were made for seating, refreshments, parking, ambulance and medical facilities etc. for all the servants and visitors.  

More and more youth participated actively in this project.  Shri Sukhija informed that this campaign will not last only for one day but will continue every month with the cleanliness of different ghats and water sources.Inaugurating the second phase of 'Project Amrit', Nirankari Rajpita Ramit Ji in his address before Satguru Mata Ji said that Baba Hardev Singh Ji inspired us through his life that the spirit of service should be in a selfless form and not in any form.  

In search of praise.  While doing service, we should focus on its basic spirit instead of making noise about its performance.  Our effort should be to change ourselves because only our internal change can bring change in the society and the world.  Satvik transformation begins only with a clean and pure mind.

 Satguru Mata Ji, in her blessings on the occasion of Project Amrit, said that water has great importance in our lives and it is like nectar.  Water is the basic basis of our life.  It is our duty to take care of this clean and beautiful creation that God has given us.  We, as humans, have misused and polluted this invaluable heritage.  

We have to keep nature in its original form and clean it.  We have to inspire everyone with our actions and not just with words.  When we connect with God who is present in every particle and when we take basis of Him, then we start loving every form of His creation.  Our effort should be that when we leave this world, we leave this earth in a more beautiful form.

At the conclusion of the program, the guests present praised the Mission profusely and also expressed their heartfelt gratitude to Nirankari Satguru Mata Ji and said that the Mission has definitely contributed towards nature conservation through this welfare project of water conservation and water sanitation.  An important step has been taken for this.

संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का सफल आयोजन

जल परमात्मा का वरदान है, हमें इस अमृत की संभाल करनी है :  सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज


सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में ‘अमृत प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ परियोजना के दूसरे चरण का शुभारम्भ यमुना नदी के छठ घाट, आई. टी. ओ, दिल्ली से किया गया। चंडीगढ़ के संयोजक श्री नवनीत पाठक जी और एरिया के मुखियों  की  देखरेख मे सैक्टर 30-ए, सैक्टर 15 डी, मलोया, सैक्टर 45,  मणिमाजरा के संत निरंकारी सत्संग भवनों के आस पास निरंकारी सेवादल और साधसंगत के मेंबरो ने सफाई की।

श्री नवनीत पाठक जी ने बताया कि बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की शिक्षाओं से प्रेरित यह परियोजना समस्त भारतवर्ष के 27 राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों के 1533 से अधिक स्थानों  पर 11 लाख से भी अधिक स्वंयसेवकों के सहयोग से एक साथ विशाल रूप में आयोजित की गई। संत निरंकारी मिशन की सामाजिक शाखा संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वाधान में बाबा हरदेव सिंह जी की अनंत सिखलाईयों से प्रेरणा लेते हुए ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का आयोजन किया गया।

इस वर्ष ‘आओ संवारे, यमुना किनारे’ के मूल संदेश द्वारा इस परियोजना को एक जन-जागृति का रूप प्राप्त हुआ। इस अवसर पर संत निरंकारी मिशन के सभी अधिकारीगण, गणमान्य अतिथि तथा हजारों की संख्या में स्वयंसेवक और सेवादल के सदस्य सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण संत निरंकारी मिशन की वेबसाईट के माध्यम से किया गया जिसका लाभ देश एवं विदेशों में बैठे सभी श्रद्धालु भक्तों ने प्राप्त किया।

इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों एवं शिक्षकों के साथ-साथ कई संस्थाओ व पर्यावरण संरक्षण से जुड़े हुए अनेक गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। रेडियो चैनल 92.7-बिग एफ.एम. एवं भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की भी इस अवसर पर भागीदारी रही।संत निरंकारी मण्डल के सचिव एवं समाज कल्याण प्रभारी श्री जोगिन्दर सुखीजा ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि ‘ प्रोजेक्ट अमृत’ के दौरान सुरक्षा के हर वैधानिक मापदण्ड का उचित रूप से पालन किया गया।

इस कार्यक्रम में सभी सेवादारों एवं आंगतुको के बैठने, जलपान, पार्किंग, एम्बुलेंस एवं मेडिकल सुविधाओं इत्यादि का समुचित प्रबंध किया गया। इस परियोजना में अधिक से अधिक युवाओं का सक्रिय योगदान रहा। श्री सुखीजा ने सूचित किया कि यह मुहिम केवल एक दिन की न होकर हर महीने भिन्न भिन्न घाटों व जल स्त्रोतों की स्वच्छता के साथ निरंतर चलती रहेगी।

 ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के दूसरे चरण का आरम्भ करते हुए निरंकारी राजपिता रमित जी ने सतगुरु माता जी से पूर्व अपने संबोधन में कहा कि बाबा हरदेव सिंह जी ने अपने जीवन से हमें यही प्रेरणा दी कि सेवा की भावना निष्काम रूप में होनी चाहिए न की किसी प्रसंशा की चाह में। हमें सेवा करते हुए उसके प्रदर्शन का शोर करने की बजाय उसकी मूल भावना पर केन्द्रित रहना चाहिए।  हमारा प्रयास स्वयं को बदलने का होना चाहिए क्योंकि हमारे आंतरिक बदलाव से ही समाज एवं दुनियां में परिवर्तन आ सकता है। एक स्वच्छ और निर्मल मन से ही सात्विक परिवर्तन का आरम्भ होता है।

सतगुरु माता जी ने प्रोजेक्ट अमृत के अवसर पर अपने आर्शीवचनों में फरमाया कि हमारे जीवन में जल का बहुत महत्व है और यह अमृत समान है। जल हमारे जीवन का मूल आधार है। परमात्मा ने हमें यह जो स्वच्छ एवं सुंदर सृष्टि दी है, इसकी देखभाल करना हमारा कत्र्तव्य है। मानव रूप में हमने ही इस अमूल्य धरोहर का दुरुपयोग करते हुए इसे प्रदूषित किया है। हमें प्रकृति को उसके मूल स्वरूप में रखते हुए उसकी स्वच्छता करनी होगी। हमें अपने कर्मो से सभी को प्रेरित करना है न कि केवल शब्दों से।

कण -कण में व्याप्त परमात्मा से जब हमारा नाता जुड़ता है और जब हम इसका आधार लेते है तब हम इसकी रचना के हर स्वरूप से प्रेम करने लगते है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि जब हम इस संसार से जाये तो इस धरा को और अधिक सुंदर रूप में छोड़कर जाये। कार्यक्रम के समापन पर सम्मिलित हुए अतिथि गणों ने मिशन की भूरी-भूरी प्रशंसा की और साथ ही निरंकारी सत्गुरु माता जी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मिशन ने जल संरक्षण एवं जल स्वच्छता की इस कल्याणकारी परियोजना के माध्यम से निश्चित ही प्रकृति संरक्षण  हेतु एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

ਸੰਤ ਨਿਰੰਕਾਰੀ ਚੈਰੀਟੇਬਲ ਫਾਊਂਡੇਸ਼ਨ ਦੇ 'ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਅੰਮ੍ਰਿਤ' ਦਾ ਸਫ਼ਲ ਆਯੋਜਨ

ਪਾਣੀ ਪ੍ਰਮਾਤਮਾ ਦੀ ਦਾਤ ਹੈ, ਅਸੀਂ ਇਸ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਦੀ ਸੰਭਾਲ ਕਰਨੀ ਹੈ:  ਸਤਿਗੁਰੂ ਮਾਤਾ ਸੁਦੀਕਸ਼ਾ ਜੀ ਮਹਾਰਾਜ


ਸਤਿਗੁਰੂ ਮਾਤਾ ਸੁਦੀਕਸ਼ਾ ਜੀ ਮਹਾਰਾਜ ਅਤੇ ਨਿਰੰਕਾਰੀ ਰਾਜਪਿਤਾ ਰਮਿਤ ਜੀ ਦੀ ਛਤਰ-ਛਾਇਆ ਹੇਠ ਅੱਜ ਯਮੁਨਾ ਨਦੀ ਦੇ ਛੱਠ ਘਾਟ ਵਿਖੇ 'ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ' ਦੇ ਤਹਿਤ 'ਸਵੱਛ ਜਲ , ਸਵੱਛ ਮਨ' ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪੜਾਅ ਦਾ ਉਦਘਾਟਨ  ਆਈ.ਟੀ.ਓ., ਦਿੱਲੀ ਤੋਂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦੇ ਸੰਯੋਜਕ ਸ਼੍ਰੀ  ਨਵਨੀਤ ਪਾਠਕ ਜੀ ਅਤੇ ਏਰਿਯਾ ਦੇ  ਮੁਖੀਆਂ ਦੀ ਦੇਖ-ਰੇਖ ਹੇਠ ਨਿਰੰਕਾਰੀ ਸੇਵਾ ਦਲ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਅਤੇ ਸਾਧਸੰਗਤ ਨੇ ਸੈਕਟਰ 30-ਏ, ਸੈਕਟਰ 15 ਡੀ, ਮਲੋਆ, ਸੈਕਟਰ 45, ਮਨੀਮਾਜਰਾ  ਦੇ ਸੰਤ ਨਿਰੰਕਾਰੀ ਸਤਿਸੰਗ ਭਵਨਾਂ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਦੀ ਸਫਾਈ ਕੀਤੀ।

ਸ਼੍ਰੀ  ਨਵਨੀਤ ਪਾਠਕ ਜੀ ਨੇ ਨੇ ਦਸਿਆ ਕਿ  ਬਾਬਾ ਹਰਦੇਵ ਸਿੰਘ ਜੀ ਮਹਾਰਾਜ ਦੀਆਂ ਸਿੱਖਿਆਵਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਹੋ ਕੇ, ਇਹ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਪੂਰੇ ਭਾਰਤ ਦੇ 27 ਰਾਜਾਂ ਅਤੇ ਕੇਂਦਰ ਸ਼ਾਸਤ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ 1533 ਤੋਂ ਵੱਧ ਸਥਾਨਾਂ 'ਤੇ 11 ਲੱਖ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਲੰਟੀਅਰਾਂ ਦੇ ਸਹਿਯੋਗ ਨਾਲ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਆਯੋਜਿਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਬਾਬਾ ਹਰਦੇਵ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦੀਆਂ ਸਦੀਵੀ ਸਿੱਖਿਆਵਾਂ ਤੋਂ ਪ੍ਰੇਰਨਾ ਲੈਂਦਿਆਂ ਸੰਤ ਨਿਰੰਕਾਰੀ ਮਿਸ਼ਨ ਦੇ ਸਮਾਜਿਕ ਵਿੰਗ ਸੰਤ ਨਿਰੰਕਾਰੀ ਚੈਰੀਟੇਬਲ ਫਾਊਂਡੇਸ਼ਨ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਹੇਠ ‘ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਅੰਮ੍ਰਿਤ’ ਦਾ ਆਯੋਜਨ ਕੀਤਾ ਗਿਆ।

ਇਸ ਸਾਲ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਨੇ 'ਆਓ ਸਵਾਰੇਂ , ਯਮੁਨਾ ਕਿਨਾਰੇ' ਦੇ ਮੂਲ ਸੰਦੇਸ਼ ਰਾਹੀਂ ਜਨ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਦਾ ਰੂਪ ਧਾਰਿਆ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਸੰਤ ਨਿਰੰਕਾਰੀ ਮਿਸ਼ਨ ਦੇ ਸਮੂਹ ਅਧਿਕਾਰੀ, ਪਤਵੰਤੇ ਸੱਜਣ ਅਤੇ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਵਲੰਟੀਅਰਾਂ ਅਤੇ ਸੇਵਾਦਲ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੇ ਸ਼ਮੂਲੀਅਤ ਕੀਤੀ। ਇਸ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਦਾ ਸੰਤ ਨਿਰੰਕਾਰੀ ਮਿਸ਼ਨ ਦੀ ਵੈੱਬਸਾਈਟ ਰਾਹੀਂ ਸਿੱਧਾ ਪ੍ਰਸਾਰਣ ਕੀਤਾ ਗਿਆ, ਜਿਸ ਦਾ ਦੇਸ਼-ਵਿਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਬੈਠੇ ਸਮੂਹ ਸ਼ਰਧਾਲੂਆਂ ਨੇ ਲਾਭ ਉਠਾਇਆ।

ਇਸ ਮੌਕੇ ਦਿੱਲੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਅਤੇ ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਕਈ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਅਤੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਸੁਰੱਖਿਆ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਕਈ ਪਤਵੰਤੇ ਸੱਜਣਾਂ ਨੇ ਸ਼ਮੂਲੀਅਤ ਕੀਤੀ। ਰੇਡੀਓ ਚੈਨਲ 92.7-ਬਿਗ ਐਫ਼.ਐੱਮ ਅਤੇ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਸੱਭਿਆਚਾਰਕ ਮੰਤਰਾਲੇ ਨੇ ਵੀ ਇਸ ਮੌਕੇ ਆਪਣੀ ਹਾਜ਼ਰੀ ਭਰੀ। ਸੰਤ ਨਿਰੰਕਾਰੀ ਮੰਡਲ ਦੇ ਸਕੱਤਰ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਕਲਿਆਣ ਇੰਚਾਰਜ ਸ਼੍ਰੀ ਜੋਗਿੰਦਰ ਸੁਖੀਜਾ ਨੇ ਵਿਸਤ੍ਰਿਤ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੰਦੇ ਹੋਏ ਦੱਸਿਆ ਕਿ 'ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਅੰਮ੍ਰਿਤ' ਦੌਰਾਨ ਹਰ ਵਿਧਾਨਕ ਸੁਰੱਖਿਆ ਮਾਪਦੰਡਾਂ ਦਾ ਸਹੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਪਾਲਣ ਕੀਤਾ ਗਿਆ।

ਇਸ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਵਿੱਚ ਸਮੂਹ ਸੇਵਾਦਾਰਾਂ ਅਤੇ ਮਹਿਮਾਨਾਂ ਲਈ ਬੈਠਣ, ਰਿਫਰੈਸ਼ਮੈਂਟ, ਪਾਰਕਿੰਗ, ਐਂਬੂਲੈਂਸ ਅਤੇ ਮੈਡੀਕਲ ਸਹੂਲਤਾਂ ਆਦਿ ਦਾ ਢੁੱਕਵਾਂ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ। ਇਸ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਵਿੱਚ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੇ ਸਰਗਰਮੀ ਨਾਲ ਹਿੱਸਾ ਲਿਆ। ਸ਼੍ਰੀ ਸੁਖੀਜਾ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਇਹ ਮੁਹਿੰਮ ਸਿਰਫ ਇੱਕ ਦਿਨ ਤੱਕ ਨਹੀਂ ਚੱਲੇਗੀ ਸਗੋਂ ਹਰ ਮਹੀਨੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਘਾਟਾਂ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਸੋਮਿਆਂ ਦੀ ਸਫਾਈ ਦੇ ਨਾਲ ਜਾਰੀ ਰਹੇਗੀ।

'ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਅੰਮ੍ਰਿਤ' ਦੇ ਦੂਜੇ ਪੜਾਅ ਦਾ ਉਦਘਾਟਨ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਨਿਰੰਕਾਰੀ ਰਾਜਪਿਤਾ ਰਮਿਤ ਜੀ ਨੇ ਸਤਿਗੁਰੂ ਮਾਤਾ ਜੀ ਦੀ ਹਜ਼ੂਰੀ ਵਿੱਚ ਆਪਣੇ ਸੰਬੋਧਨ ਵਿਚ ਕਿਹਾ ਕਿ ਬਾਬਾ ਹਰਦੇਵ ਸਿੰਘ ਜੀ ਨੇ ਆਪਣੇ ਜੀਵਨ ਰਾਹੀਂ ਸਾਨੂੰ ਪ੍ਰੇਰਿਆ ਦਿੱਤੀ ਕਿ ਸੇਵਾ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਨਿਰਸਵਾਰਥ ਰੂਪ ਵਿਚ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਨਾ ਕਿ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪ੍ਰਸ਼ੰਸਾ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ। ਸੇਵਾ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਦੀ ਕਾਰਗੁਜ਼ਾਰੀ ਬਾਰੇ ਰੌਲਾ ਪਾਉਣ ਦੀ ਬਜਾਏ ਇਸ ਦੀ ਮੂਲ ਭਾਵਨਾ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਸਾਡੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਬਦਲਣ ਦੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਸਾਡੀ ਅੰਦਰੂਨੀ ਤਬਦੀਲੀ ਹੀ ਸਮਾਜ ਅਤੇ ਸੰਸਾਰ ਵਿੱਚ ਤਬਦੀਲੀ ਲਿਆ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਸਾਤਵਿਕ ਪਰਿਵਰਤਨ ਕੇਵਲ 'ਸਵੱਛ ਜਲ ਅਤੇ ਸਵੱਛ ਮਨ' ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।

ਸਤਿਗੁਰੂ ਮਾਤਾ ਜੀ ਨੇ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਮੌਕੇ ਆਪਣੇ ਅਸ਼ੀਰਵਾਦ ਵਿੱਚ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਾਣੀ ਦਾ ਸਾਡੇ ਜੀਵਨ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੈ। ਪਾਣੀ ਸਾਡੇ ਜੀਵਨ ਦਾ ਮੂਲ ਆਧਾਰ ਹੈ। ਇਹ ਸਾਡਾ ਫਰਜ਼ ਹੈ ਕਿ ਅਸੀਂ ਇਸ ਸਾਫ਼-ਸੁਥਰੀ ਅਤੇ ਸੁੰਦਰ ਰਚਨਾ ਦੀ ਸੰਭਾਲ ਕਰੀਏ ਜੋ ਸਾਨੂੰ ਪਰਮਾਤਮਾ ਨੇ ਦਿੱਤੀ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਮਨੁੱਖ ਵਜੋਂ, ਇਸ ਅਨਮੋਲ ਵਿਰਸੇ ਦੀ ਦੁਰਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਇਸ ਨੂੰ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਤ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਸਾਨੂੰ ਕੁਦਰਤ ਨੂੰ ਇਸ ਦੇ ਅਸਲੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਰੱਖਣਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਕਰਨਾ ਹੈ।

ਸਾਨੂੰ ਸਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਕੰਮਾਂ ਨਾਲ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕਰਨਾ ਹੋਵੇਗਾ ਨਾ ਕਿ ਸਿਰਫ਼ ਸ਼ਬਦਾਂ ਨਾਲ। ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਹਰ ਕਣ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਪਰਮਾਤਮਾ ਨਾਲ ਜੁੜ ਜਾਂਦੇ ਹਾਂ ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਉਸ ਦਾ ਆਸਰਾ ਲੈਂਦੇ ਹਾਂ, ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਉਸ ਦੀ ਰਚਨਾ ਦੇ ਹਰ ਰੂਪ ਨੂੰ ਪਿਆਰ ਕਰਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਾਂ। ਸਾਡੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਇਹ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਿ ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਇਸ ਸੰਸਾਰ ਨੂੰ ਛੱਡੀਏ, ਅਸੀਂ ਇਸ ਧਰਤੀ ਨੂੰ ਹੋਰ ਸੁੰਦਰ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਛੱਡ ਕੇ ਜਾਈਏ।

ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਦੀ ਸਮਾਪਤੀ 'ਤੇ ਹਾਜ਼ਰ ਮਹਿਮਾਨਾਂ ਨੇ ਮਿਸ਼ਨ ਦੀ ਭਰਪੂਰ ਪ੍ਰਸ਼ੰਸਾ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਨਿਰੰਕਾਰੀ ਸਤਿਗੁਰੂ ਮਾਤਾ ਜੀ ਦਾ ਤਹਿ ਦਿਲੋਂ ਧੰਨਵਾਦ ਕੀਤਾ ਅਤੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮਿਸ਼ਨ ਨੇ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਤੌਰ 'ਤੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸੰਭਾਲ ਅਤੇ ਜਲ ਸਵੱਛਤਾ ਦੇ ਇਸ ਕਲਿਆਣਕਾਰੀ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਰਾਹੀਂ ਕੁਦਰਤ ਦੀ ਸੰਭਾਲ ਲਈ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾਇਆ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਇੱਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਕਦਮ ਹੈ।


Tags: Nirankari , Satguru Mata Sudiksha ji Maharaj , Sant Nirankari charitable Foundation , Sant Nirankari Mission



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