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मुफ्ती मोहम्मद सईद के गले की हड्डी बना मसरत!

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5 Dariya News

श्रीनगर , 17 Apr 2015

Last updated on: Apr 17, 2015, 00:00 IST

जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की अलगाववादियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लाने की मुहिम के तहत हाल ही में रिहा किए गए अलगाववादी नेता मसरत आलम ने उन्हें जोर का झटका दिया है। सईद के लिए आगे कुआं, पीछे खाई वाली स्थिति बन गई है। जिस मसरत की रिहाई को सईद कल तक न्यायोचित ठहरा रहे थे, अब वही उनके गले की हड्डी बन गया है। अलगाववादियों की बुधवार को हुई एक रैली में मसरत के समर्थकों ने पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए और पाकिस्तानी झंडे लहराए, जिसके बाद सईद अपनों तथा विपक्ष दोनों के निशाने पर आ गए हैं।साल 2010 में मसरत की गिरफ्तारी को सुरक्षा बलों व खुफिया एजेंसियों ने एक बड़ी सफलता मानी थी, जिसने घाटी में एक खूनी आंदोलन का सूत्रपात किया था, जिसकी वजह से सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प में 110 युवक मारे गए थे।

इससे पहले, आलम की सूचना देने वाले को अधिकारियों ने 10 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। साल 2010 की गर्मियों में घाटी में छाई अशांति मसरत की गिरफ्तारी के साथ ही लगभग खत्म हो गई थी। राज्य की सत्ता पर आसीन होने के मात्र छह दिनों के अंदर ही सईद ने उत्तरी कश्मीर के बारामूला स्थित एक जेल से मसरत को रिहा करने का आदेश दिया।अपने इस कदम को न्यायोचित ठहराते हुए राज्य के गृह विभाग ने कहा कि लोक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत आलम की हिरासत अवधि खत्म हो चुकी है और उसे हिरासत में रखने का कोई आधार नहीं बनता, इसलिए रिहाई अपरिहार्य हो गया है। 

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के अन्य नेताओं ने कहा कि यह फैसला पिछली सरकार ने ही लिया था, क्योंकि कट्टरवादी नेता को बिना किसी कानूनी आधार के ही हिरासत में लिया गया था।सईद ने कहा था कि हिंसा से अलग करने के लिए अलगाववादियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जगह देने और उनके विचारों को देश की लोकतांत्रिक रूपरेखा में निहित करने की जरूरत है।मुख्यमंत्री के इस बयान की सरकार की घटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), विपक्षी कांग्रेस तथा नेशनल कांफ्रेस (नेकां) ने कड़ी आलोचना की थी।इसके बाद हालांकि चीजें सुलझती दिख रही थीं, लेकिन बुधवार को अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की एक जनसभा में मसरत और उसके समर्थकों की करतूत से मुफ्ती बैकफुट पर आ गए।मसरत को चारों तरफ से घेरे उसके समर्थकों ने न सिर्फ पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाए, बल्कि पाकिस्तान का झंडा भी फहराया। यहां तक कि उन्होंने मीडिया को दिखाने के लिए इलाके के पुलिस मुख्यालय की बाहरी दीवार पर पाकिस्तान का झंडा तक गाड़ दिया।

इस दौरान, हालांकि मसरत ने न कुछ बोला और न ही पाकिस्तानी झंडा फहराया, लेकिन इस बात में कोई शक नहीं कि अपने समर्थकों को ऐसा करने के लिए उसी ने उकसाया था।पाकिस्तानी झंडा लहराने तथा भारत विरोधी नारे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सईद ने कहा, "यह अस्वीकार्य है। मैं यही कह सकता हूं कि कानून अपना काम करेगी।"नाम जाहिर न करने की शर्त पर कांग्रेस के एक नेता ने आईएएनएस से कहा, "मसरत की हिरासत या दोबारा गिरफ्तारी के लिए पुख्ता आधार की जरूरत होगी।"गिलानी ने जहां सईद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का सहायक करार दिया है, वहीं आरएसएस ने उन्हें पाकिस्तान समर्थक मुख्यमंत्री करार दिया है।अब सईद के लिए सरकार चलाना आगे कुआं पीछे खाई वाली स्थिति हो गई है। आतंकवादियों तथा पाकिस्तान के प्रति नरम रुख रखने वाले सईद के लिए अपने कदम को न्यायोचित ठहराना मुश्किल हो गया है। 

 

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