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जल संरक्षण बांधों ने बदली किसानों की तकदीर

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5 दरिया न्यूज (विजयेन्दर शर्मा)

ऊना , 21 Feb 2013

Last updated on: Feb 21, 2013, 00:00 IST

ऊना जिला के किसान अब केवल बारिश पर निर्भर नहीं हैं बल्कि जल संरक्षण बांधों के जरिए वे फसल चक्र में बदलाव लाने के साथ- साथ अपनी आर्थिकी को भी समृद्ध कर रहे हैं । इन बांधों से जहां सूखते जल स्रोतों को पुर्नजीवन मिल रहा है, वहीं किसानों को खेती के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो रहा है। ऊना जनपद के किसानों की आर्थिकी में आए इस क्रांतिकारी बदलाव की पटकथा स्वां नदी एकीकृत जलागम प्रबंधन परियोजना ने लिखी है । खास बात यह है कि इन जल सरंक्षण बांधों का निर्माण जन सहभागिता व पंचायती राज संस्थाओं के सहयोग से किया गया है। जिला ऊना के विभिन्न स्थानों पर परियोजना द्वारा अब तक 82 जल संग्रहण बांधों का निर्माण किया जा चुका है जिनका जल अधिग्रहण क्षेत्र 7090 हैक्टेयर व कमांड क्षेत्र 1498 हैक्टेयर है। इन जल सरंक्षण बांधों की जल भंडारण क्षमता 14 लाख घनमीटर है। किसानों की आर्थिकी को नया मोड़ देने वाले इन बांधों के बनने से बाढ़ का प्रकोप भी कम हुआ है और भूमिगत जल रिचार्ज में भी वृद्धि हुई है। हिमाचल प्रदेश सरकार और जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग संस्था (जाइका ) के तत्वाधान में ऊना जिला की 96 पंचायतों में वर्ष 2006-07 से वन विभाग द्वारा क्रियान्वित की जा रही इस परियोजना का मुख्य उदेश्य जल, जंगल,भूमि का विकास व संसाधनों को अपघटन से बचाना है। इस परियोजना की आरंभिक लागत 160 करोड़ रूपए और अवधि 8 साल की थी लेकिन जब इस परियोजना ने किसानों की तकदीर व इलाके की तस्वीर बदलनी शुरू की तो इसकी क्रियान्वयन अवधि भी एक साल बढ़कर नौ वर्ष की हो गई और बजट भी बढ़कर 214.04 करोड़ रूपए हो गया। इस राशि का 85 प्रतिशत हिस्सा जाइका व 15 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश सरकार का है। परियोजना निदेशक टीडी शर्मा का कहना है कि इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण बात सटीक योजना निर्माण से लेकर इसके क्रियान्वयन तक पंचायती राज संस्थाओं व स्थानीय समुदायों की पूरी भागेदारी सुनिश्चित करना है। इसके लिए समस्त 96 ग्राम पंचायतों में पंचायत विकास समितियों का गठन करके उनका पंजीकरण सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत किया गया है। परियोजना प्रशासन, योजना व क्रियान्वयन के लिए वन विभाग द्वारा ऊना में परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की गई है जिसमें अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन, परियोजना निदेशक हैं तथा क्रियान्वयन के बेहतर प्रबंधन के लिए तीन उपनिदेशकों की देखरेख में ऊना, अंब व गगरेट में परियोजना क्रियान्वयन इकाईयां स्थापित की गई हैं। कृषि, बागवानी व पशुपालन विभाग इस परियोजना के सहयोगी विभाग हैं। ऊना जिला की कुल 235 पंचायतों में से 181 पंचायतें स्वां नदी के जल संरक्षण क्षेत्र में आती हैं। जल अधिग्रहण क्षेत्र को 42 उप जलागम क्षेत्रों में बांटा गया है, जिसमें 619 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 22 उप जलागमों के तहत आने वाली 96 पंचायतों का चयन इस परियोजना के तहत किया गया है। इस परियोजना से न केवल कृषि भूमि को बचाने में मदद मिली है बल्कि जल प्रबंधन, मृदा सरंक्षण व वनीकरण कार्यों ने खुशहाली की एक नई इबारत भी लिखी है। इस परियोजना के तह निर्मित जल सरंक्षण बांधों से लाभान्वित होने वाले कई किसानों ने यह स्वीकार किया है कि इन बांधों की बदौलत वे केवल मौसम के मिजाज पर ही निर्भर नहीं रहे बल्कि कारगर सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित होने से उनके कृषि उत्पादन में भी वृद्धि हुई है और उन्होंने फसल चक्र में बदलाव की पटकथा भी लिखी है।

 

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