Saturday, 13 June 2026

 

 

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भारत के विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ मुक्त व्यापार समझौते विकास, नवाचार, बेहतर गुणवत्ता और रोजगार निर्माण को बढ़ावा देंगे : पीयूष गोयल

नीतिगत सुधार और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर भारत में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण कर रहे हैं : पीयूष गोयल

Piyush Goyal, BJP, Bharatiya Janata Party, New Delhi, India Global Innovation Connect
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नई दिल्ली , 11 Jun 2026

Last updated on: Jun 12, 2026, 12:09 IST

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में आयोजित भारत वैश्विक नवाचार सम्मेलन की 5वीं वार्षिक बैठक के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया। सभा को संबोधित करते हुए मंत्री जी ने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में प्रवेश करने की भारत की रणनीति वैश्विक साझेदारी बढ़ाकर, निवेश आकर्षित कर, नवाचार को प्रोत्साहित कर, रोजगार निर्माण कर, गुणवत्ता में सुधार कर और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भार के सहयोग को बढ़ाकर राष्ट्र की दीर्घकालिक प्रगति की आकांक्षाओं को सहयोग करने के अनुसार तैयार की गई है।

श्री गोयल ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के मध्य विशेष नाता हैं और उन्होंने बताया कि भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) देशों के बीच हस्ताक्षर किए गए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) ने व्यापार, निवेश और नवाचार आधारित साझेदारियों के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता स्विस और भारतीय कंपनियों को एक-दूसरे के साथ जुड़ने और दीर्घकालिक साझेदारियां बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है, जिससे दोनों देशों को लाभ मिलेगा।

श्री गोयल ने विशेष रूप से ईएफटीए समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड ने 15 वर्ष में भारत में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने और दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार निर्माण करने में सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि जहां भारत इन देशों के लिए एक विशाल और विकसित बाजार खोल रहा है, वहीं निवेश की यह प्रतिबद्धता समझौते का अभिन्न अंग है और दोनों पक्षों के हितों में संतुलन बनाने में सहायक है।

उन्होंने बताया कि भारत वर्तमान में समझौते के कार्यान्वयन के दूसरे वर्ष में है और इसके अंतर्गत निवेश को लेकर सक्रिय चर्चाएं चल रही हैं। मंत्री जी ने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत का संबंध प्रतिस्पर्धा के बजाय पूरकता पर आधारित है। यूरोप, अमेरिका, कनाडा, इजरायल, खाड़ी देशों, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इन अर्थव्यवस्थाओं की प्रति व्यक्ति आय भारत से कहीं अधिक है और बढ़ती उम्र की आबादी के चलते इन्हें जनसांख्यिकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

दूसरी ओर, भारत को युवा कार्यबल का लाभ मिल रहा है, जिसकी औसत आयु 30 वर्ष से कम है और अगले तीन दशकों में भी यह लाभ जारी रहने की उम्मीद है। श्री गोयल ने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादन और अनुसंधान एवं विकास की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे वहां उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा कि भारत और इन देशों के बीच साझेदारी से भारत की युवा प्रतिभा, प्रतिस्पर्धी लागत और बढ़ते बाजार के साथ-साथ विकसित अर्थव्यवस्थाओं में उपलब्ध पूंजी, प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता का संयोजन करके पारस्परिक रूप से लाभकारी मौके पैदा होते हैं। मंत्री जी ने इस विषय पर प्रकाश डाला कि भारत ने पिछले तीन से साढ़े तीन वर्ष में 38 देशों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं।

उन्होंने कहा कि इन सभी भागीदार देशों की प्रति व्यक्ति आय भारत से काफी अधिक है। उन्होंने आगे कहा कि ये समझौते भारत को नए बाजारों तक पहुंच प्रदान करते हैं, उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को प्रोत्साहन देते हैं और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अधिक एकीकरण को सक्षम बनाते हैं, साथ ही निवेश और रोजगार निर्माण के मौके भी पैदा करते हैं।

श्री गोयल ने इस विषय पर जोर दिया कि इनमें से कई देशों के पास प्रचुर मात्रा में पूंजी है, जो उत्पादक निवेश के मौकों की तलाश में है और भारत, अपनी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और 1.4 बिलियन महत्वाकांक्षी उपभोक्ताओं के विशाल घरेलू बाजार के साथ, ऐसे निवेशों के लिए एक आकर्षक गंतव्य है। उन्होंने कहा कि बढ़ती घरेलू मांग, तकनीकी प्रगति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का संयोजन भारत को अपने दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक मजबूत स्थिति में रखता है।

मंत्री जी ने कहा कि सुधारों का मुख्य उद्देश्य नीतियों, प्रक्रियाओं और अनुपालनों का बोझ कम करना, कराधान को सरल बनाना, दिवालियापन संबंधी सुधार लागू करना, कानूनी जटिलताओं को कम करना और अधिक पूर्वानुमानित कारोबारी माहौल बनाना है। उन्होंने कहा कि इसका समग्र उद्देश्य कंपनियों को भारत में निवेश करने, संचालन करने और विस्तार करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना है।

श्री गोयल ने इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकार के व्यापक निवेश पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है, जो न केवल वर्तमान जरूरतों के लिए बल्कि भविष्य के विकास के लिए भी उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि देश को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रणालियों में तेजी से प्रगति करने की क्षमता से लाभ हुआ है। ऊर्जा क्षेत्र पर बोलते हुए श्री गोयल ने कहा कि आज भारत में 500 गीगावॉट से अधिक क्षमता का एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड है।

उन्होंने बताया कि 2014 से पहले देश क्षेत्रीय ग्रिडों के माध्यम से संचालित होता था और सरकार की ओर से उठाए गए शुरुआती कदमों में से एक इन सभी को एक राष्ट्रीय ग्रिड में एकीकृत करना था। मंत्री के अनुसार, एकीकृत ग्रिड ने स्थिरता में सुधार किया है, दक्षता को बढ़ाया है और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के पर्याप्त एकीकरण को सक्षम बनाया है।

मंत्री जी ने कहा कि भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अब नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त होता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने पेरिस समझौते के अंतर्गत निर्धारित राष्ट्रीय योगदान (आईएनडीसी) को तय समय से पहले ही हासिल कर लिया है और जी20 देशों के भीतर जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने वाले अग्रणी देशों में शुमार है।

श्री गोयल ने कहा कि एकीकृत विद्युत ग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में बढ़ोतरी के सम्मिलन ने डेटा केंद्रों के लिए भारत को एक आकर्षक गंतव्य के रूप में मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि भारत एक स्थिर लोकतांत्रिक प्रणाली, कानून के शासन का पालन, मजबूत डेटा संरक्षण और गोपनीयता फ्रेमवर्क और प्रभावी बौद्धिक संपदा संरक्षण प्रदान करता है, ये सभी वैश्विक निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं।

मंत्री जी ने भारत के प्रतिस्पर्धी लाभों पर प्रकाश डाला, जिनमें विश्व में सबसे कम डेटा लागत, अपेक्षाकृत कम निर्माण लागत, किफायती औद्योगिक और कार्यालय इंफ्रास्ट्रक्चर, और प्रतिस्पर्धी लागतों पर उपलब्ध उच्च कुशल कार्यबल शामिल हैं। ये कारक, 1.4 बिलियन लोगों के घरेलू बाजार की ओर से प्रदान किए जाने वाले विशाल आकार के साथ मिलकर, भारत में विनिर्माण और सेवा संचालन स्थापित करने की इच्छुक वैश्विक कंपनियों की बढ़ती रुचि को बढ़ावा दे रहे हैं।

नवाचार और अनुसंधान के मुद्दे पर बोलते हुए श्री गोयल ने स्वीकार किया कि भारत को नवाचार संस्कृति के निर्माण में और अधिक निवेश करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार नवाचार आधारित निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कंपनियों और अन्य देशों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है। उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि प्रोत्साहन की भूमिका तो है ही, साथ ही अनुसंधान और विकास गतिविधियों को आकर्षित करने के लिए एक सहायक वातावरण का निर्माण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मंत्री जी ने कहा कि सरकार बौद्धिक संपदा संबंधी ढांचों की लगातार समीक्षा कर रही है, जिससे वे आधुनिक बने रहें और नवाचार को बढ़ावा दें। उन्होंने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की बढ़ती ताकत पर भी प्रकाश डाला, जिसे सार्वजनिक वित्तपोषण और निजी निवेश दोनों के माध्यम से सहयोग मिल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारत में नवाचार के लिए महत्वपूर्ण लाभ मौजूद हैं, जिनमें प्रचुर मात्रा में युवा प्रतिभा, कम बुनियादी फ्रेमवर्क लागत और एक विशाल इकोसिस्टम शामिल है जो प्रयोगों और नैदानिक ​​परीक्षणों का सहयोग कर सकता है।

मंत्री ने कहा कि भारत और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी लागत, पैमाने और प्रतिभा की उपलब्धता से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने के साथ-साथ नवाचार परिणामों को गति प्रदान करने में सहायक हो सकती है। श्री गोयल ने जानकारी दी कि सरकार का लगभग ₹1 लाख करोड़ का अनुसंधान एवं विकास नवाचार कोष हाल ही में कार्य करना शुरू कर चुका है और इस पहल के अंतर्गत परियोजनाओं के पहले चरण को मंजूरी भी मिल चुकी है।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका, स्विट्जरलैंड और इजरायल जैसे देशों में सफल नवाचार इकोसिस्टम कई वर्ष में तैयार हुए हैं और उन्होंने भरोसा जताया कि भारत भी समय के साथ इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति करेगा। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को संबोधित करते हुए मंत्री जी ने कहा कि हालांकि कुछ देशों ने विशिष्ट घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए उपाय किए हैं, फिर भी वैश्विक व्यापार काफी हद तक नियमों पर आधारित ढांचे के भीतर ही संचालित होता है।

उन्होंने स्वीकार किया कि देश अक्सर अपने घरेलू हितों के आधार पर अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि भारत संवाद, सहयोग और पारस्परिक लाभप्रद जुड़ाव के माध्यम से ऐसी चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री गोयल ने दोहराया कि भारत उन सभी कंपनियों का स्वागत करता है, जो देश में उत्पादन करती हैं और रोजगार एवं आर्थिक विकास में योगदान देती हैं।

उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि सरकार भारतीय और विदेशी दोनों उद्यमों को समान मौके प्रदान करने का प्रयास करती है और कंपनियों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सेवाएं देने के लिए भारत को आधार बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। मंत्री जी ने भरोसा जताया कि व्यापारिक साझेदारियों, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, नवाचार-आधारित विकास और वैश्विक सहभागिता की ओर से समर्थित भारत का आर्थिक बदलाव, देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देगा और आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका को परिभाषित करने में मदद करेगा।

 

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