मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के तहत हिसार एयरपोर्ट पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के विकास हेतु हरियाणा के नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में 2988 एकड़ भूमि के हस्तांतरण पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की अनुसूची 1-ए के अनुच्छेद 23(ए) के तहत देय स्टाम्प शुल्क तथा पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 78 एवं 79 के तहत देय पंजीकरण शुल्क को माफ करने की मंजूरी दी गई।
अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के तहत हिसार एयरपोर्ट पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) विकसित करने के उद्देश्य से कुल 2988 एकड़ भूमि, जिसमें प्रथम चरण में 1605 एकड़ तथा द्वितीय चरण में 1383 एकड़ भूमि शामिल है, हरियाणा के नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) अर्थात नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में हस्तांतरित किए जाने का प्रस्ताव है।
इस हस्तांतरण पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 तथा पंजीकरण अधिनियम, 1908 के प्रावधानों के तहत स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क में छूट/माफी प्रदान की जाएगी। हरियाणा के नागरिक उड्डयन विभाग से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिसमें अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के तहत हिसार एयरपोर्ट पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) के विकास के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) अर्थात नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में 2988 एकड़ भूमि — जिसमें प्रथम चरण में 1605 एकड़ तथा द्वितीय चरण में 1383 एकड़ भूमि शामिल है — के हस्तांतरण पर स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क में छूट/माफी प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।
स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क को माफ करने से लगभग 132.41 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रभाव पड़ेगा, जिसमें लगभग 131.91 करोड़ रुपये स्टाम्प शुल्क तथा 50 हजार रुपये पंजीकरण शुल्क शामिल हैं, जिन्हें माफ किया जाना है। हिसार एयरपोर्ट पर प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर को एक बड़े औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किए जाने की परिकल्पना की गई है, जिससे योजनाबद्ध औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा, घरेलू एवं विदेशी निवेश आकर्षित होंगे, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा क्षेत्र एवं राज्य के आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी।
यह परियोजना हरियाणा में कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर तथा व्यापार सुगमता को भी बढ़ावा देने की संभावना रखती है। चूंकि भूमि का हस्तांतरण एक सरकारी विभाग द्वारा विशेष रूप से AKIC परियोजना के क्रियान्वयन हेतु एक सरकारी समर्थित विशेष प्रयोजन वाहन के पक्ष में किया जाना प्रस्तावित है, इसलिए स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क लगाए जाने से परियोजना पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, जबकि व्यावहारिक रूप से राज्य को इससे कोई अतिरिक्त राजस्व लाभ प्राप्त नहीं होगा।
ऐसे में शुल्क में छूट/माफी प्रदान करने से परियोजना का सुचारु एवं किफायती क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा तथा औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना के समयबद्ध कार्यान्वयन को समर्थन मिलेगा। उल्लेखनीय है कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 9 के अंतर्गत राज्य सरकार को ऐसे शुल्कों में आंशिक अथवा पूर्ण माफी प्रदान करने का अधिकार प्राप्त है।
यह प्रावधान सरकार को भविष्य अथवा पूर्व प्रभाव से देय शुल्क को कम करने अथवा माफ करने की शक्ति प्रदान करता है।