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भारत बंद ने खेती कानून रद्द करने की ज़रूरत की अहमीयत दिखाई : कैप्टन अमरिन्दर सिंह

केंद्र को आढ़तियों, मंडियों और गारंटीशुदा एम.एस.पी. की मौजूदा प्रणाली को बनाए रखने के लिए कहा

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चंडीगढ़ , 08 Dec 2020

Last updated on: Dec 08, 2020, 00:00 IST

खेती कानूनों को किसान विरोधी और सम्बन्धित पक्षों के साथ चर्चा किए बिना लाने की बात दोहराते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत बंद के द्वारा किसानों की एकजुटता ने खेती कानूनों को रद्द करने और बाद में कृषि सुधारों पर विस्तार में चर्चा करने की अहमीयत को दिखा दिया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र देशभर में प्रदर्शन कर रहे और इन कानूनों को रद्द करके सम्बन्धित पक्षों के साथ नये सिरे से बातचीत करने की किसानी माँगों की तरफ ध्यान क्यों नहीं दे रहा। उन्होंने कहा, ‘‘यदि मैं उन की जगह होता तो मैं अपनी गलती मानने और कानूनों को वापस लेने के लिए एक मिनट न लगाता।’’यह बताते हुए कि सारा देश किसानी के दर्द और उनके अस्तित्व के लिए लड़े जा रहे संघर्ष के साथ है, कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि केंद्र को आढ़तियों और मंडी व्यवस्था को ख़ारिज करने की बजाय मौजूदा प्रणाली को बरकरार रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इसको ख़त्म क्यों कर रहे हैं? उनको यह किसानों पर छोड़ देना चाहिए कि वह क्या चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी प्राईवेट खरीददार को खरीद से नहीं रोकता परन्तु यह पूरी तरह स्थापित प्रणाली की कीमत पर आज्ञा नहीं दी जानी चाहिए जिस व्यवस्था ने किसानों को दशकों से फ़ायदा पहुँचाया है।मुख्यमंत्री ने आगे माँग की कि भारत सरकार एम.एस.पी. को कानूनी हक देने के लिए क्यों नहीं तैयार अगर वह ईमानदारी के साथ दावा कर रही है कि इसको ख़त्म नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि एम.एस.पी. हमारा हक है। उन्होंने आगे कहा कि अगर एम.एस.पी. की गारंटी नहीं है और यदि कांग्रेस और भाजपा जो समर्थन मूल्य के स्थायी रहने का वादा करती है, को छोडक़र अन्य राजसी पार्टी केंद्र में सत्ता पर आती है तो इस बात की कौन गारंटी लेगा कि किसानों को न्यूनतम मूल्य मिलेगा।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि कोई कारण नजऱ नहीं आता कि केंद्र ठंड की मार झेल रहे किसानों की बात क्यों नहीं सुन सकता और उनकी चिंताओं के हल के बाद उनको ख़ुशी-ख़ुशी घर वापस भेजे। उन्होंने कहा कि यही बात उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी कही थी। उन्होंने अमित शाह से अपील की थी कि गरीब किसानों की चिंताओं के हल के लिए हर संभव प्रयास किया जायें। यही भारत की सुरक्षा के हित में है।भाजपा के दोष कि कांग्रेस के मैनीफैस्टो में ए.पी.एम.सी. कानून रद्द करने की बात कही गई थी, को स्पष्ट तौर पर रद्द करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी या डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने यह बात कभी भी नहीं की थी कि मौजूदा प्रणाली को ख़त्म कर दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेसी मैनीफैस्टो में आधुनिकीकरण बारे कहा गया था, न कि यह कि जो कुछ चल रहा है, उसे बंद कर दिया जायेगा। 

यह स्पष्ट करते हुए कि निजी कंपनियों के कोई खि़लाफ़ नहीं है, मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अब भी यू.ई.ए. के साथ गेहूँ और चावल की सप्लाई बारे बात कर रहे हैं और देश को पंजाब समेत भारत में भंडारण सामथ्र्य बनाने की ज़रूरत है। दरअसल मुख्यमंत्री के तौर पर उनके पिछले कार्यकाल के दौरान उन्होंने कृषि सम्बन्धित क्षेत्रों जैसे कि भंडारण, कोल्ड चेन, फूड प्रोसैसिंग आदि में निजी निवेशकों को बढ़ावा देने के लिए खेत से प्लेट तक प्रोग्राम शुरू किया था परन्तु बाद में अकालियों ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था।पंजाब और इसके किसानों को मुल्क की ज़रूरत के समय इस्तेमाल कर लेने के बाद उनको भुलाने के भारत सरकार के कदम से ख़ुद को परेशान बताते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि बेशक इस समय मुल्क अब आत्मनिर्भर हो गया हो परन्तु भविष्य में अनाज की कमी की संभावना को अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जब उनको ज़रूरत थी, हमें इस्तेमाल कर लिया और अब जब बाकी मुल्क गेहूँ और धान की फ़सल पैदा करने लग पड़ा है तो हमें अपने रहमो-कर्म पर छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंडी प्रणाली का ख़ात्मा करके पंजाब को ग्रामीण विकास के लिए अति आवश्यक फंडों से वंचित किया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को पंजाब के कृषि विकास को बट्टे खाते में न डालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आबादी के बढऩे से संकट आएगा और अगला साल, सूखे वाला साल रहने की भविष्यवाणी की जा रही है। मुल्क को हमारी ज़रूरत है और कोविड संकट के समय के दौरान हम यह सिद्ध कर चुके हैं जब गरीब का पेट भरने के लिए रोज़ाना 50 रेल गाड़ीयाँ अनाज की भेजते थे। उन्होंने भारत सरकार को अदूरदर्शी वाली पहुँच न अपनाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की खाद्य समस्याएँ ख़त्म नहीं होने जा रहीं। हम आपके लिए अन्न पैदा करते हैं।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने फिर दोहराया कि इस मुद्दे पर पंजाब के साथ चर्चा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि चाहे खेती सुधारों बारे पहली मीटिंग पंजाब को मैंबर के तौर पर शामिल करने से पहले की गई थी जबकि दूसरी मीटिंग में सिफऱ् वित्तीय मसले विचारे गए और इसमें मनप्रीत बादल ने शिरकत की थी और तीसरी मीटिंग सचिवों के स्तर पर हुई थी जहाँ सिफऱ् लिए गए फ़ैसलों बारे जानकारी दी गई थी।मुख्यमंत्री ने कहा कि असली बात यह है कि अकाली काले खेती कानून लाने की प्रक्रिया के हिस्सेदार बने। उन्होंने कहा कि चाहे हरसिमरत कौर बादल खेती ऑर्डीनैंसों को मंजूरी देने के समय केंद्रीय कैबिनेट का हिस्सा थीं और दूसरी तरफ़ उन्होंने (कैप्टन अमरिन्दर सिंह) की तरफ से इस मुद्दे पर बुलाई गई पहली सर्वदलीय बैठक में सुखबीर बादल ने कच्चा-पक्का सा स्टैंड लिया और दूसरी मीटिंग में आना भी बेहतर नहीं समझा। उन्होंने कहा कि बादलों ने केंद्र सरकार और किसानों को खुश करने के चक्कर में सबको निराश किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि राज्य का विषय होने के कारण मोदी सरकार को कानून लाने से पहले सभी पक्षों के साथ चर्चा करनी चाहिए थी और इन कानूनों को संसद के द्वारा किसानों पर थोपना नहीं चाहिए था। उन्होंने कहा कि यहाँ तक कि सभी राज्यों के किसानों के साथ भी सलाह की जा सकती थी क्योंकि हर राज्य की अपनी समस्याएँ हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने तो पंजाब के साथ सलाह तक नहीं की जिसको भारत के अन्न भंडार के तौर पर जाना जाता है।

 

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