Thursday, 04 June 2026

 

 

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने 16वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत की अध्यक्षता की

985 लंबित मामलों पर समाधान के लिए सुनवाई हुई

Dr Jitendra Singh, Bharatiya Janata Party, BJP, 16th All India Pension Adalat, New Delhi
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नई दिल्ली , 13 May 2026

Last updated on: May 14, 2026, 12:53 IST

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि पिछले दशक में देश के पेंशन प्रशासन में उल्लेखनीय बदलाव आया है और अब यह प्रक्रिया-बद्ध प्रणाली से विकसित होकर प्रौद्योगिकी-सक्षम, जन-केंद्रित तंत्र बन गया है, जो पेंशनभोगियों की गरिमा, पारदर्शिता और जीवन सुगमता पर केंद्रित है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 16वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत को संबोधित करते हुए कहा कि पेंशनभोगियों को सरकारी सहायता लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में बहुमूल्य योगदानकर्ताओं के रूप में देखना चाहिए, जिनका अनुभव, विशेषज्ञता और संस्थागत स्मृति राष्ट्रीय धरोहर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सरल, सहानुभूति भरा और दायित्वपूर्ण पेंशन प्रशासन सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयास किए हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेंशन अदालत व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता है कि सभी हितधारक साझा मंच पर बैठकर प्रायः मौके पर ही विवाद का सामूहिक समाधान करते हैं, बजाय इसके कि बातचीत केवल नियमित फाइल हस्तांतरण और आधिकारिक पत्राचार तक सीमित रहे। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रत्यक्ष भागीदारी से प्रशासनिक नज़रिये में भी बदलाव आता है और शासन के प्रति अधिक व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलता है।

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा आयोजित 16वीं पेंशन अदालत में विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों से संबंधित 985 लंबित पेंशन शिकायतों पर त्वरित निवारण हेतु सुनवाई हुई। कार्यक्रम के दौरान इस पहल की सफलता से संबंधी पर्चे जारी करने के साथ ही पेंशन अदालत के दिशा-निर्देश जारी किए गए और संयुक्त सचिव (पेंशन) ने डॉ. जितेंद्र सिंह के समक्ष महत्वपूर्ण पेंशन मामले प्रस्तुत किए।

पेंशन अदालत ने 37 मंत्रालयों और विभागों से संबंधित 985 मामलों पर गौर किया, जो 15 अप्रैल, 2026 तक 45 दिनों से अधिक समय से लंबित थे। कुल शिकायतों में से अब तक 728 मामले/लगभग 74 प्रतिशत का निपटारा हो चुका है। कार्यवाही के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह के समक्ष 16 मंत्रालयों और विभागों से संबंधित कुल 26 महत्वपूर्ण मामले प्रस्तुत किए गए। इनमें रक्षा मंत्रालय के 12, गृह मंत्रालय के 8 और रेल मंत्रालय के 2 थे, जबकि शेष मामले अन्य मंत्रालयों और विभागों से संबंधित थे।

पेंशन अदालत में आठ पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित हुए, जिनमें महाराष्ट्र के अकोला और उत्तराखंड के हल्द्वानी से आए लाभार्थी शामिल हुए जबकि 18 अन्य पेंशनभोगी हिमाचल प्रदेश के मंडी और राजस्थान के बीकानेर से लेकर कोलकाता और तमिलनाडु के इरोड तक देश के विभिन्न हिस्सों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा शामिल हुए। यह इस पहल की देश में बढ़ती व्यापकता दर्शाता है।

पेंशन अदालत तंत्र द्वारा निवारण किए गए मामलों में एक में, 74 लाख रुपये से अधिक के पेंशन लाभ जारी किए गए, जबकि दो अन्य मामलों में, लाभार्थियों को लगभग 46 लाख रुपये के लाभ का भुगतान किया गया। पेंशन अदालत की कार्यवाही में पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी, मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधि, पेंशनभोगी संघ, बैंक और अन्य हितधारक शामिल हुए।

वर्ष 2014 से पेंशन सुधारों का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एक समय ऐसा था जब पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग लोगों की ध्यान से काफी हद तक बाहर रहते हुए  सीमित प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत संचालित होता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में निरंतर सुधारों, डिजिटल उपायों और नागरिक-केंद्रित निर्णय द्वारा यह सरकार के सबसे सक्रिय विभागों में से एक बन गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और डिजिटल तकनीक द्वारा जीवन प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया सरल बनाने की सरकार की पहल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान अब जन भागीदारी पहल में बदल गया है और इससे वृद्ध पेंशनभोगियों की कठिनाइयों में काफी कमी आई है। उन्होंने कहा कि एक करोड़ से अधिक पेंशनभोगी पहले ही इस प्रणाली से लाभान्वित हुए हैं, जिससे पेंशन वितरण अधिक सुलभ, पारदर्शी और बाधा मुक्त हो गया है।

केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्री ने हाल के वर्षों में किए गए कई सुधारों का भी उल्लेख किया, जिनमें पारिवारिक पेंशन नियमों का सरलीकरण, गुमशुदा व्यक्तियों से संबंधित पुराने प्रावधानों को हटाना, तलाकशुदा और अलग हुई बेटियों से संबंधित प्रक्रियाओं में ढील और दिव्यांग आश्रितों के लाभ संबंधी सुधार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सुधार व्यावहारिक वास्तविकताओं और पेंशनभोगियों और उनके परिवारों की कठिनाइयों के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।

मिशन कर्मयोगी का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शासन को नियमों की यांत्रिक व्याख्या से आगे बढ़कर सार्वजनिक सेवा प्रदान करने के व्यापक उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासकों को समाधान-उन्मुख मानसिकता के साथ काम करना चाहिए ताकि लोगों को प्रक्रियात्मक जटिलताओं में उलझने के बजाय समय पर सार्थक परिणाम मिल सकें।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेंशन अदालतें जटिल और दीर्घ अवधि से लंबित शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी संस्थागत तंत्र बनकर उभरी हैं। 2017 में यह पहल आरंभ होने के बाद से अब तक कुल 15 पेंशन अदालतें आयोजित की गई हैं, जिनमें 27,812 मामलों पर सुनवाई हुईं। इनमें से 19,948 शिकायतों का समाधान अदालतों में ही हो गया, जो 71.72 प्रतिशत से अधिक की सफलता दर दर्शाता है।

शेष मामलों का समाधान बाद में अंतर-मंत्रालयी समन्वय और समीक्षा तंत्र द्वारा किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेंशन संबंधी सुधारों और शिकायत निवारण मंचों के बारे में व्यापक जागरूकता और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने विभागों और संगठनों से सोशल मीडिया और आधुनिक संचार साधनों का व्यापक उपयोग करने को कहा ताकि देश भर के पेंशनभोगी, सरकार की पहल से अवगत हों और इससे जुड़े रहें।

 

Tags: Dr Jitendra Singh , Bharatiya Janata Party , BJP , 16th All India Pension Adalat , New Delhi

 

 

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