भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने 25 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। अधिकारियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमता को स्थानीय उत्पादन और निर्यात दोनों के लिए विस्तारित करने के भारत सरकार के दृढ़ संकल्प और इस परिकल्पना को साकार करने में भारतीय राजनयिकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
रक्षा क्षेत्र में विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को आत्मसात करने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत रक्षा उपकरणों के प्रमुख आयातक से लेकर सभी क्षेत्रों में प्लेटफार्मों के निर्माता और निर्यातक बनने तक का लंबा सफर तय कर चुका है। श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक समुदाय भारत की विकास गाथा पर बारीकी से नजर रख रहा है और उसकी नेतृत्वकारी भूमिका की सराहना कर रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि भारत की सकारात्मक छवि को और मजबूत किया जा सके। उन्होंने उनसे कहा कि विदेश में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय वे हमेशा याद रखें कि वे 1.4 बिलियन भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने उनसे हर संस्कृति के नए विचारों, लोगों और दृष्टिकोणों के प्रति खुले रहने और भारत की सभ्यतागत ज्ञान के मूल्यों को अपने साथ रखने का आग्रह किया।
उन्होंने प्रतिष्ठित भारतीय विदेश सेवा में शामिल होने के लिए किए गए उनके परिश्रम के लिए उन्हें बधाई दी। इस संवाद से पहले, प्रशिक्षु अधिकारियों को रक्षा मंत्रालय के विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा रक्षा कूटनीति की विभिन्न पहलों, रक्षा बजट, त्रि-सेवा एकीकरण और रक्षा संबंधी खरीद के बारे में जानकारी दी गई। इस बैच में 55 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल थे, जिनमें 53 भारतीय प्रशिक्षु और भूटान के 2 प्रशिक्षु थे।