परीक्षा पे चर्चा 2026 का केंद्रीकृत ऑन-एयर प्रसारण पीएम श्री गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-18 में माननीय मुख्य सचिव, श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से देशभर के विद्यार्थियों को एक प्रेरणादायी और सशक्त संदेश दिया गया, जिसका मूल विचार “मन को जोड़ो, मन को जोतो” रहा—अर्थात मन को एकाग्र कर लक्ष्य पर केंद्रित रहकर अनुशासित प्रयास करना।
विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई की जिम्मेदारी स्वयं लेने, आत्मप्रेरित रहने तथा शैक्षणिक और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया। असम के गमछा का प्रतीकात्मक भेंट स्वरूप प्रस्तुतिकरण महिला सशक्तिकरण और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा।
संवाद के दौरान शिक्षा, खेल और निरंतर कौशल विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व पर बल दिया गया तथा कौशल को दो भागों—जीवन कौशल और व्यावसायिक कौशल—में विभाजित करते हुए दोनों के सुनियोजित विकास पर जोर दिया गया। अनुशासन, सकारात्मक सामाजिक आचरण और व्यावसायिक दक्षता को सफलता के आवश्यक गुण बताया गया।
विद्यार्थियों को जीवन के इस चिंतनशील सिद्धांत की भी याद दिलाई गई—“बीता है उसकी गिनती न करो, बचा है जो उसको ध्यान से देखो”—जिसका संदेश अतीत पर न रुककर भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करने का था। यह भी रेखांकित किया गया कि जीवन स्वयं कोई परीक्षा नहीं है, बल्कि परीक्षाएं जीवन को बेहतर दिशा देने वाले पड़ाव मात्र हैं।
विद्यार्थियों को अगले दिन की योजना पहले से बनाने, दैनिक कार्यसूची तैयार करने तथा नियमित रूप से अपने कार्यों की समीक्षा करने की सलाह दी गई, ताकि समय प्रबंधन कौशल सुदृढ़ हो सके। विद्यार्थियों को यह भी मार्गदर्शन दिया गया कि वे परीक्षाओं को बोझ नहीं बल्कि उत्सव की तरह लें, यह समझें कि अंक महत्वपूर्ण हैं परंतु वे किसी व्यक्ति की सम्पूर्ण पहचान नहीं होते, सत्यनिष्ठा और वास्तविक अनुभव से आत्मविश्वास बढ़ता है, तथा सार्थक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आराम और सुविधा से बाहर निकलना आवश्यक है।
साथ ही, यह भी कहा गया कि सपने देखना जरूरी है, लेकिन उन्हें निरंतर परिश्रम से साकार करना चाहिए; व्यावहारिक और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए; अपने लक्ष्य स्पष्ट और व्यक्तिगत रखने चाहिए; छोटी-छोटी अच्छी आदतों से बड़े परिवर्तन संभव होते हैं; जीवन चरित्रों और आत्मकथाओं का अध्ययन करना चाहिए; राष्ट्रीय महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेनी चाहिए; तथा वैदिक गणित का अभ्यास कर विश्लेषणात्मक क्षमता को मजबूत करना चाहिए।
विद्यार्थियों को विकसित भारत 2047 के संकल्प में सक्रिय योगदान देने के लिए भी प्रेरित किया गया, जिसमें स्वदेशी को बढ़ावा देना, स्वच्छता बनाए रखना, उत्तम स्वास्थ्य का ध्यान रखना और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना शामिल है। इस अवसर पर श्री नितीश सिंगला, निदेशक स्कूल शिक्षा, चंडीगढ़ प्रशासन, सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
परीक्षा पे चर्चा 2026 में चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाली छात्रा अनन्या शर्मा भी अपनी एस्कॉर्ट शिक्षिका सुश्री हरजीत कौर (जीएमएसएसएस-20डी) के साथ कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित रहीं और उन्होंने अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। परीक्षा पे चर्चा 2026 ने यह संदेश पुनः सुदृढ़ किया कि वास्तविक सफलता केवल अंकों पर नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास, सकारात्मक आदतों और निरंतर प्रयास पर आधारित होती है।