उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पर्यटन की ²ष्टि से उत्तर प्रदेश समृद्ध प्रदेश है, लेकिन यहां जितने प्रयास होने चाहिए थे, उतने नहीं हुए। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यूपी को पर्यटन में पहले स्थान पर लाना हमारी प्राथमिकता है।मुख्यमंत्री रविवार को 'उत्तर प्रदेश में पर्यटन विकास' विषयक सेमिनार के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। इस मौके पर उन्होंने यूपी के 8 महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के लिए वेबसाइट्स भी लॉन्च कीं। सेमिनार में सीएम योगी ने कहा, "हमसे पहले की सरकारों ने पर्यटन के क्षेत्र में जरा भी रुचि नहीं दिखाई वरना तो हमारा प्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी होता। पर्यटन को लेकर उचित प्रयास नहीं किया गया। अब आने वाले दिनों में यूपी को पर्यटन में पहले स्थान पर लाना हमारी प्राथमिकता है।"उन्होंने कहा कि हमारी सभ्यता तथा संस्कृति पर सभी को नाज है। उत्तर प्रदेश में बहुत सारे धार्मिक स्थल है। अंकोरवाट मंदिर का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा? कि विदेशों ने हमारी संस्कृति को संभाल कर रखा लेकिन हम लोगों ने नहीं रखा। सेक्युलरिज्म की पट्टी बांध ली, इसलिए लोग अयोध्या का नाम लेना नहीं चाहते।
उन्होंने कहा कि दुनिया के बहुत से देशों की आबादी से ज्यादा लोग प्रयागराज में कुंभ के दौरान आते हैं। रामनवमी में दुनिया के कई देशों की आबादी से लोग आते हैं। देवी मंदिरों में भी ऐसी स्थिति देख सकते हैं। 5000 वर्ष पहले भागवत में उल्लेख होता है कि शुक्रताल का हजारों वर्षों का इतिहास है। चित्रकूट में 8000 वर्षों का इतिहास है।योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में राम कृष्ण, शंकर और देवी के मंदिर हैं। यह पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसको जोड़ने का काम नहीं किया गया। पर्यटन की दिशा में काम करना पड़ेगा इसलिए रामायण सर्किट, कृष्ण सर्किट व बुद्ध सर्किट का निर्माण करना पड़ेगा।उन्होंने कहा, "अब पर्यटन को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता है। हम जेवर और कुशीनगर को इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में हैं।" मुख्यमंत्री ने कहा, "पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक स्थलों से जुड़े विज्ञापन जारी होने चाहिए। कुंभ की तैयारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में हमें वहां सभी सुविधाएं देनी चाहिए। हम वहां स्टीमर और शिप चलाएंगे, ताकि धर्मिक स्थल और पर्यटन को बढ़ावा मिले।" इस दौरान उनके साथ डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा और पर्यटन मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी भी थे।