Wednesday, 10 June 2026

 

 

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सी.पी. राधाकृष्णन को जल शक्ति मंत्रालय की प्रमुख नदी अंतर्संबंध और जल संरक्षण पहलों के बारे में जानकारी दी गई

“नदी अंतर्संबंध में सबसे बड़ी चुनौती पैसा नहीं, बल्कि सोच है” : सी.पी. राधाकृष्णन

CP Radhakrishnan, Chandrapuram Ponnusami Radhakrishnan, Vice President of India, BJP, Bharatiya Janata Party, CR Paatil, Chandrakant Raghunath Paatil, Dr Raj Bhushan Choudhary, New Delhi
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Armaan

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नई दिल्ली , 09 Jun 2026

Last updated on: Jun 09, 2026, 17:33 IST

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी और जल शक्ति मंत्रालय में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग (डीओडब्ल्यूआर, आरडी और जीआर) के वरिष्ठ अधिकारियों ने आज उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान, उपराष्ट्रपति को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की ओर से चलाई जा रही विभिन्न पहलों और परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।

उपराष्ट्रपति ने जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को मजबूत करने के लिए शुरू की गई विभाग की प्रमुख पहल "जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी)" की सराहना की। इस पहल में सरकारों, समुदायों, उद्योगों और नागरिक समाज संगठनों को शामिल करते हुए समग्र समाज दृष्टिकोण अपनाया गया है। उन्हें बताया गया कि जेएसजेबी 2.0 के तहत 1.55 करोड़ से अधिक जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण संरचनाओं की स्थापना की गई है, जो लक्ष्य से काफी अधिक है।

उपराष्ट्रपति को केन-बेतवा लिंक परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना और गोदावरी-कावेरी लिंक परियोजना सहित प्रमुख नदी-जोड़ परियोजनाओं की प्रगति से भी अवगत कराया गया। श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ने से जल संकट को दूर करने, सूखे से राहत दिलाने, सिंचाई क्षेत्र का विस्तार करने और संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करने में बड़ी सहायता मिल सकती है।

उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसी प्रमुख राष्ट्रीय जल अवसंरचना परियोजनाओं का वृत्तचित्रों और अभिलेखीय रिकॉर्डों के माध्यम से व्यापक रूप से दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए ताकि भावी पीढ़ियां राष्ट्र निर्माण के इन ऐतिहासिक प्रयासों की सराहना कर सकें और उन पर गर्व महसूस कर सकें। नदी जोड़ने के समर्थन में अपनी पिछली पदयात्रा को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नदी जोड़ने की परियोजनाओं को लागू करने में धन की उपलब्धता मुख्य चुनौती नहीं है।

उन्होंने कहा कि मानसिकता संबंधी मुद्दे और राजनीतिक विचार अक्सर बाधा बन जाते हैं। उन्होंने व्यापक राष्ट्रीय हित में जल प्रबंधन के लिए दूरदर्शी और सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल और जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी ने उपराष्ट्रपति को सितंबर 2026 में आयोजित होने वाले भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह में आमंत्रित किया।

 

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