Wednesday, 10 June 2026

 

 

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चुनौतियों के समाधान के लिए जन-जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और प्रभावी विधायी नेतृत्व की आवश्यकता : नायब सिंह सैनी

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ इंडिया रीजन के जोन-2 के तीन दिवसीय सम्मेलन का हुआ आगाज

Nayab Singh Saini, Chief Minister of Haryana, BJP Haryana, Harvinder Kalyan, Mahipal Dhanda, Dr Krishan Lal Middha, Om Birla, Harivansh Narayan Singh
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चंडीगढ़ , 08 Jun 2026

Last updated on: Jun 09, 2026, 11:56 IST

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पूरी दुनिया अभूतपूर्व परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा की बढ़ती जरूरतें, डिजिटल अर्थव्यवस्था, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक असमानताएं हमारे सामने नई चुनौतियां बनकर खड़ी हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल प्रशासनिक निर्णयों से संभव नहीं है। 

इसके लिए जन-जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और प्रभावी विधायी नेतृत्व की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री सोमवार को हरियाणा विधानसभा के तत्वावधान में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ इंडिया रीजन के जोन-2 के तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने किया। 

इस अवसर पर राज्य सभा के उप-सभापति श्री हरिवंश नारायण सिंह, विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविन्द्र कल्याण, उपाध्यक्ष डॉ कृष्ण मिड्ढा, हरियाणा के संसदीय कार्य मंत्री श्री महिपाल ढांडा भी उपस्थित थे। तीन दिन तक चलने वाले सम्मेलन में देश के 15 विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारी, उप-पीठासीन अधिकारी और विधायक भी भाग ले रहे है। 

उद्घाटन सत्र के दौरान हरियाणा के इतिहास पर एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने उपस्थित अतिथियों का हरियाणा पधारने पर अभिनंदन करते हुए कहा कि हरियाणा विधानसभा का यह सदन इस राष्ट्रीय सम्मेलन का साक्षी बना है, यह प्रदेश के लिए गर्व की बात है। 

लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि यह सदन स्वयं एक जीती-जागती विरासत है। इन दीवारों ने पिछले छह दशकों में लोकतंत्र की अनेक गाथाएं सुनी हैं, जन आकांक्षाओं को स्वर लेते देखा है, महत्वपूर्ण मुद्दों को आत्मसात किया है और अनेक ऐतिहासिक निर्णयों की साक्षी बनी हैं।

उन्होंने कहा कि 1966 में जब हरियाणा बना, तब लोगों ने कहा कि यह छोटा राज्य है। संसाधन कम हैं। रास्ता कठिन है। लेकिन हरियाणा की इस मिट्टी का स्वभाव ही कुछ और है। यह वही धरती है, जहां अर्जुन को यह ज्ञान मिला था कि "कर्म कर, फल की चिंता मत कर"। 

इस मिट्टी के लोग चुनौती देखकर झुकते नहीं बल्कि वे और मजबूत हो जाते हैं। और यही कारण है कि आज छह दशकों के अपने सफर में हरियाणा की धरती सदैव राष्ट्र निर्माण में अग्रणी रही है। चाहे कृषि हो, खेल हो, सेना हो, उ‌द्योग हो या सामाजिक परिवर्तन, हरियाणा ने देश को नई ऊर्जा और नई प्रेरणा दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन का विषय 'भविष्य की चुनौतियों से निपटने और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में जागरूक समाज और विधायकों की भूमिका' है। यह विषय आज के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है और वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप है। 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जब वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा, तो वह केवल एक घोषणा नहीं थी। वह 140 करोड़ भारतीयों के सपनों को दिशा देने वाला राष्ट्रीय संकल्प था। विकसित भारत के इस संकल्प को केवल सरकार अकेले पूरा नहीं कर सकती। 

इसमें जागरूक समाज, जनप्रतिनिधियों और प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमें ऐसे निर्णय और ऐसी नीतियां बनानी होंगी, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाएं। हमारा लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से समृद्ध भारत नहीं, बल्कि ऐसा भारत है जो आत्मनिर्भर हो, हर नागरिक को अवसर देने वाला हो, तकनीक और नवाचार में अग्रणी हो, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार हो, सामाजिक न्याय से परिपूर्ण हो और लोकतांत्रिक मूल्यों के बल पर विश्व को नई दिशा देने वाला हो।

2047 का हरियाणा कैसा होगा यह सब तय हो रहा

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा ने "विकसित भारत @2047" के विज़न को केवल एक नारे के रूप में नहीं, बल्कि एक सामूहिक संकल्प के रूप में आत्मसात किया है। और सरकार ने इसे केवल कागज़ों पर नहीं लिखा बल्कि ज़मीन पर उतारा है। 

उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि वर्ष 2025 में सरकार ने डिपार्टमेंट आफ फ्यूचर की स्थापना की जो देश में अपनी तरह की अनूठी पहल है, क्योंकि हम भविष्य की तैयारी कल पर नहीं छोड़ना चाहते। 2047 का हरियाणा कैसा होगा, उसकी नीतियां, सुधार और प्राथमिकताएं यह सब आज से ही तय हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने 'विकसित भारत-2047' के संकल्प को आधार बनाकर अपना 'हरियाणा विज़न डॉक्यूमेंट-2047' तैयार किया है। इसका अनावरण केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा 24 दिसंबर, 2025 को किया गया। यह दस्तावेज केवल एक नीति-पत्र नहीं, बल्कि आने वाले दो दशकों के लिए राज्य के विकास का व्यापक रोडमैप है। 

सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक हरियाणा को 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था तथा 40 लाख रुपये से अधिक प्रति व्यक्ति आय वाला राज्य बनाना है। सरकार ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने शार्ट टर्म और लांग टर्म लक्ष्य निर्धारित करें, ताकि विकास योजनाबद्ध हो, परिणाम स्पष्ट हों और कार्य समय पर पूरा हो।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि साथ ही सरकार ने अर्जुन स्पेशल परपर्ज व्हीकल (SPV), विदेशी सहयोग विभाग और हरियाणा इनोवेशन फारम का गठन किया है ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य की तकनीकें हमारे सुशासन की सहयोगी बनें। सरकार, उ‌द्योग, शिक्षण संस्थान और स्टार्टअप्स, सब मिलकर हरियाणा को एक नवाचार-सक्षम राज्य के रूप में आगे ले जाएं। 

उन्होंने कहा कि विकसित भारत की यह यात्रा कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं है अपितु एक जन-आंदोलन है और किसी भी जन-आंदोलन की असली ताकत होती है जनप्रतिनिधि।

विधायकों व अन्य जनप्रतिनिधियों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण

उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश ने यह पहले ही समझ लिया है कि विकसित हरियाणा की यात्रा में विधायकों व अन्य जनप्रतिनिधियों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, और 'विकसित विधानसभा' का खाका जनप्रतिनिधि ही खींचेंगे क्योंकि अपनी जनता को हमसे बेहतर कोई नहीं जानता। इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि हरियाणा के सभी विधायकों के लिए एक चिंतन शिविर आयोजित किया जाएगा। 

मुख्यमंत्री ने सम्मेलन के बारे में कहा कि यह कोई औपचारिक बैठक नहीं होगी, यह एक मंथन होगा। जहां हर विधायक अपनी विधानसभा का दर्पण सामने रखेगा। समस्याएं क्या हैं, समाधान क्या हो सकते हैं, जनता की अपेक्षाएं क्या हैं, और हमारी 'विकसित विधानसभा' कैसी होनी चाहिए। 

उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि आप इस सम्मेलन में केवल आज की समस्याओं पर नहीं, कल की चुनौतियों पर भी गहन मंथन करें। आज के तेजी से बदलते युग को देखते हुए यह आवश्यक है कि हम हमारे आने वाले भविष्य की नींव को और मजबूत करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डाटा सिक्योरिटी, साइबर क्राइम,  जल सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण, सोशल मीडिया का प्रभाव, ये विषय अब केवल विशेषज्ञों की बैठकों तक सीमित नहीं हैं। ये हमारे विधायी विमर्श का अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। 

जो विधायक आज इन विषयों को समझेगा, वही कल के समाज को दिशा दे सकेगा। इसलिए हमें समय के अनुरूप अपनी विधायी दृष्टि को भी विकसित करना होगा। और इसी दिशा में यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि इस सम्मेलन में "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानवाधिकार" जैसे अत्यंत समसामयिक विषय पर भी विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नवाचार और नैतिकता के बीच संतुलन बनाना यह हम सभी जनप्रतिनिधियों की साझा जिम्मेदारी है। हमें समय के अनुरूप अपनी विधायी दृष्टिकोण को भी विकसित करना होगा। आज लोकतंत्र की सफलता इसी बात से मापी जाती है कि वह अपने नागरिकों के जीवन में कितना सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। जब समाज जागरूक होता है, तब नीतियां प्रभावी बनती हैं। 

जब विधायक दूरदर्शी होंगे, तब विकास टिकाऊ बनता है। और जब दोनों मिलकर कार्य करते हैं, तब राष्ट्र नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कहा भी गया है, एक विधायक ही हर गली, हर गांव की पहचान रखता है, वही विकास की नई मिसाल रखता है। 

उन्होंने उपस्थित अतिथियों से आह्वान किया कि सम्मेलन समाप्त होगा तो हम अपने-अपने राज्यों को लौट जाएंगे। लेकिन यहां से एक संकल्प लेकर जाएं कि आइए मिलकर ऐसा भारत बनाएं जो आर्थिक रूप से समृद्ध हो, सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण हो, तकनीक में अग्रणी हो और संवेदना में विश्व में सबसे आगे हो। 

और यह संकल्प केवल विधानसभा की दीवारों तक सीमित न रहे, बल्कि आम इंसान की ज़िंदगी में बदलाव और उजाला बनकर दिखे।

 

 

 

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