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उबलता पानी और जहरीली गैसें... पृथ्वी का सबसे गर्म और खतरनाक इलाका, रहस्यों से भरा है 'डालोल'

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5 Dariya News

नई दिल्ली , 26 Mar 2026

Last updated on: Mar 26, 2026, 13:38 IST

दुनिया जहान में ऐसी कई जगह हैं जहां प्रकृति की केवल खूबसूरत ही नहीं बल्कि खतरनाक और रहस्यमयी झलक भी दिखती है। इथियोपिया के डानाकिल डिप्रेशन में स्थित डालोल क्षेत्र पृथ्वी पर सबसे खतरनाक और अनोखे स्थानों में से एक है। यहां हाइड्रोथर्मल सिस्टम में नमक की चिमनियां, गर्म झरने और बेहद अम्लीय पानी है।

डालोल क्षेत्र नमक से भरे ज्वालामुखी के मुख यानि क्रेटर पर स्थित है। जलतापीय गतिविधियों के कारण इस क्रेटर से लगातार उबलता पानी और जहरीली गैसें निकलती रहती हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, यह इलाका रंग-बिरंगा और साइकेडेलिक दिखता है। पीले जमाव सल्फेट से बने हैं, लाल हिस्से आयरन ऑक्साइड के हैं व कॉपर सॉल्ट पानी को हरा रंग देते हैं।

सुपरसैचुरेटेड पानी का तापमान 94 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तक पहुंच जाता है। वहीं, पीएच लेवल 0.25 तक गिर जाता है जो बेहद अम्लीय है। इलाका अत्यधिक नमकीन भी है जहां नमक की चिमनियां आम हैं। स्पेन के एस्ट्रोबायोलॉजी सेंटर के डॉ. फेलिप गोमेज की अगुवाई वाली अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस क्षेत्र का अध्ययन किया।

सैंपल जनवरी 2017 में इथियोपिया की फील्ड ट्रिप के दौरान लिए गए थे। नतीजे साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित हुए। टीम ने पीली नमक की चिमनी की दीवारों से नमक के जमाव और आसपास के नीले पानी के पूल से सैंपल इकट्ठा किए। इन्हें स्टेराइ शीशियों में स्पेन ले जाकर इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी, केमिकल एनालिसिस और डीएनए सीक्वेंसिंग से जांचा गया।

वैज्ञानिकों ने हाल ही में यहां बहुत छोटे बैक्टीरिया की खोज की है जो इन कठिन परिस्थितियों में भी जीवित हैं और फल-फूल रहे हैं। वैज्ञानिकों ने नमक के सैंपल में छोटे-छोटे गोलाकार संरचनाएं पाईं जिनमें कार्बन की मात्रा ज्यादा थी। ये संरचनाएं बायोलॉजिकल मूल की थीं। ये बैक्टीरिया सामान्य बैक्टीरिया से 20 गुना तक छोटे हैं। 

डॉ. गोमेज ने बताया, “यह एक अनोखा मल्टी-एक्सट्रीम माहौल है। यहां जीवों को अत्यधिक तापमान, ज्यादा नमक और बहुत कम पीएच में जीवित रहना पड़ता है। इन बैक्टीरिया को ये हालात पसंद हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने खुद को इन परिस्थितियों के अनुकूल बनाया या इन्हीं हालात से विकसित हुए हैं?

डालोल समुद्र तल से करीब 125-155 मीटर नीचे है। यहां भूगर्भीय गतिविधि के कारण गर्म पानी, खनिज और गैसें सतह पर आती हैं। इलाका 1926 में बने एक छोटे ज्वालामुखी के आसपास फैला है। डालोल को पृथ्वी का सबसे गर्म बसा हुआ स्थान माना जाता है। यहां औसत तापमान 34-35 डिग्री सेल्सियस साल भर रहता है। 

गर्म झरनों में पानी उबलता है और अत्यधिक अम्लीय, नमकीन व जहरीली गैसें निकलती हैं। रंग-बिरंगे खनिज (पीला, लाल, हरा) इसे दूसरे ग्रह जैसा बना देते हैं। यहां क्लोरीन, सल्फर जैसी जहरीली गैसें हवा में रहती हैं। यह क्षेत्र इतना कठिन है कि मानव जीवन के लिए लगभग नामुमकिन है, फिर भी सूक्ष्म जीव यहां जीवित हैं।

वैज्ञानिक इसे मंगल ग्रह के पुराने वातावरण का बेहतरीन एनालॉग मानते हैं क्योंकि यहां हाइड्रोथर्मल गतिविधि, अम्लता और खनिज समान हैं। डानाकिल डिप्रेशन भूमध्यरेखीय स्थान, ज्वालामुखी गतिविधि और समुद्र तल से नीचे होने की वजह से दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में शुमार है। यहां सिल्वर क्लोराइड, जिंक आयरन सल्फाइड, मैंगनीज डाइऑक्साइड और रॉक सॉल्ट जैसे खनिज सुपरहीटेड पानी से निकलते हैं।

यह खोज एक्सट्रीमोफाइल्स की दुनिया को रोचक बनाती है। पृथ्वी पर ऐसे कई जीव हैं जो विकिरण, बर्फ की गहराई, वायुमंडल की ऊंचाई या अंतरिक्ष यान में भी जीवित रह सकते हैं। डालोल क्षेत्र मंगल के गुसेव क्रेटर जैसी जगहों से मिलता-जुलता है जहां नासा का स्पिरिट रोवर उतरा था। टीम ने एस्ट्रोबायोलॉजी जर्नल में भी एक रिव्यू प्रकाशित किया जिसमें डालोल और मंगल के हाइड्रोथर्मल वातावरण की समानताएं बताई गईं।

 

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