Wednesday, 19 June 2024

 

 

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विजीलैंस ब्यूरो द्वारा जंग-ऐ-आज़ादी यादगार करतारपुर के निर्माण संबंधी फंडों में घपलेबाजी के दोष अधीन 26 व्यक्तियों के विरुद्ध केस दर्ज, 15 गिरफ़्तार

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जालंधर , 22 May 2024

पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने आज जंग-ए-आज़ादी यादगार, करतारपुर के निर्माण संबंधी  फंडों में बड़े स्तर पर घपलेबाज़ी करके सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का वित्तीय नुकसान पहुँचाए जाने के दोष अधीन 26 मुलजिमों के विरुद्ध केस दर्ज करके 15 अधिकारियों/कर्मचारियों समेत प्राइवेट व्यक्तियों को गिरफ़्तार कर लिया है, जिनको कल अदालत में पेश किया जायेगा। इस संबंधी  जानकारी देते हुए विजीलैंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि विजीलैंस इन्क्वायरी नम्बर 05/2023 की पड़ताल से जंग-ए-आज़ादी यादगार, करतारपुर के निर्माण के लिए पंजाब सरकार द्वारा जारी किए गए फंडों में की गई घपलेबाज़ी के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का वित्तीय नुकसान पहुँचाए जाने सम्बन्धी विजीलैंस ब्यूरो द्वारा एफ.आई.आर. नम्बर  9  तारीख 22.05.2024 को आई.पी.सी की धारा 420, 406, 409, 465, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) ए  समेत  13 (2)  थाना विजीलैंस ब्यूरो, रेंज जालंधर  में दर्ज कर लिया गया है।  

उन्होंने बताया कि  कुल 26  मुलजिमों में से अब तक 15 मुलजिमों को गिरफ़्तार किया गया है, जिनमें से दीपक कुमार सिंगल (मालिक) मैसर्ज दीपक बिल्डर  निवासी  राज गुरू नगर, लुधियाना (प्राईवेट व्यक्ति), अरविन्दर सिंह, चीफ़ इंजीनियर (रिटायर्ड)-कम-इंडीपैंडिट इंजीनियर जंग-ऐ-अजादी  निवासी  सैक्टर 38-बी चंडीगढ़, तेज राम कटनौरिया, ऐक्सियन पी.डब्ल्यू.डी (बी. एंड आर.) शाखा-जालंधर (चीफ़ इंजीनियर रिटायर्ड) निवासी  पार्क ऐवैन्यू, जालंधर, राजीव कुमार अरोड़ा, जे.ई (एस.डी.ओ. रिटायर्ड) पी.डब्ल्यू.डी (बी. एंड आर.) सब-डिविजऩ प्रोवैशियल डिविजऩ-3  जालंधर  निवासी  सैक्टर-11, पंचकुला, रोहित कुमार जे.ई, पी.डब्ल्यू.डी (बी. एंड आर.) कंस्ट्रक्शन डिविजऩ-जालंधर (अब जे.ई मकैनिकल डिविजऩ जालंधर निवासी गाँव नूसी, जि़ला जालंधर, रघुविन्दर सिंह ऐक्सियन, उप मंडल अफ़सर, लोक निर्माण विभाग (भ. एवं म. शाखा) इलैक्ट्रिकल डिवीजन नि वासी  सैक्टर-110, मोहाली, संतोश राज, ऐक्सियन, इलैक्ट्रिकल डिविजऩ अमृतसर (रिटायर्ड) निवासी  ग्रीन सिटी अकाश ऐवैन्यू, अमृतसर, हरपाल सिंह एस.डी.ओ, इलैक्ट्रिकल सब-डिविजऩ जालंधर (ऐक्सियन इलैक्ट्रिकल लुधियाना) निवासी  प्रीत नगर लुधियाना, जतिन्दर अर्जुन एस.डी.ओ अब ऐक्सियन इलैक्ट्रिकल सब- डिविजऩ जालंधर (ऐक्सियन मकैनिकल डिविजऩ पी.डब्ल्यू.डी ( बी. एंड आर. जालंधर) निवासी  जालंधर कैंट, हरप्रीत सिंह, जे.ई इलैक्ट्रिकल सब-डिविजऩ जालंधर कैंट  निवासी  गाँव जलाल भुलाना, जि़ला कपूरथला, मनदीप सिंह, जे.ई. इलैक्ट्रिकल सब-डिविजऩ जालंधर  निवासी  अर्बन एस्टेट फेज-2 जालंधर, एन.पी. सिंह, ऐक्सियन, वॉटर सप्लाई और सेनिटेशन विभाग  निवासी  छोटी बारांदरी जालंधर, रजत गोपाल, एस.डी.ओ, वॉटर सप्लाई और सेनिटेशन विभाग जालंधर (ऐक्सियन वॉटर सप्लाई और सेनिटेशन विभाग तरन तारन) निवासी  गोपाल पार्क कपूरथला, गौरवदीप, जे.ई वॉटर सप्लाई और सेनिटेशन विभाग डिविजऩ-1 जालंधर नि वासी  मास्टर तारा सिंह नगर, जालंधर  और  रोहित कौंडल, जे.ई वॉटर सप्लाई और सेनिटेशन विभाग डिविजऩ-3 जालंधर, सब-डिविजऩ नकोदर, जि़ला जालंधर  निवासी  मधूबन कॉलोनी, कपूरथला को गिरफ़्तार किया गया। 

जिनको कल अदालत में पेश करके रिमांड हासिल करके पूछताछ की जायेगी। इस  मुकदमे के  बाकी  फरार मुलजि़म  विनय बुबलानी, आई.ए.एस. पूर्व मुख्य कार्यकारी अफ़सर, जंग-ऐ-आज़ादी और अन्यों को गिरफ़्तार करने के लिए उनके आवास और अन्य ठिकानों पर दबिश की जा रही है। इस केस की आगे की जाँच जारी है।  

इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए विजीलैंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि पड़ताल में पाया गया कि साल  2012 में समकालीन पंजाब सरकार ने महाराजा रणजीत सिंह के समय से लेकर भारत की आज़ादी तक भाव साल  1947  तक भारत की आज़ादी के संघर्ष और आज़ादी में पंजाबियों की भूमिका को दिखाती यादगार बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिससे आने वाली पीढिय़ाँ भारत के स्वतंत्रता संग्राम में पंजाबियों के इतिहास और योगदान संबंधी अवगत हों। 

पंजाब सरकार ने उपरोक्त प्रोजैक्ट को पूरा करने के लिए 315  करोड़ रुपए की राशि मंजूर की और नेशनल हाईवे करतारपुर जि़ला जालंधर पर स्थित 25  एकड़ प्रमुख ज़मीन इस मंतव्य के लिए अलॉट की गई थी। उन्होंने बताया कि  पंजाब सरकार द्वारा इस प्रोजैक्ट के काम को पूरा करने के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया था, जिसमें बरजिन्दर सिंह हमदर्द को प्रधान नियुक्त किया गया था। 

इस प्रोजैक्ट के निर्माण सम्बन्धी सारी देख-रेख बरजिन्दर सिंह हमदर्द प्रधान कार्यकारी कमेटी/प्रबंधकीय कमेटी और विनय बुबलानी आई.ए.एस. पूर्व मुख्य कार्यकारी अफ़सर, जंग-ऐ-आज़ादी द्वारा की गई, और बाकी किसी भी कमेटी सदस्यों को फाउडेशन के बनाए गए रूल्ज एंड बाई-लॉज़ और डीड ऑफ डैक्लारेशन के सीधे तौर पर कोई अधिकार नहीं दिए गए थे। बरजिन्दर सिंह हमदर्द और विनय बुबलानी द्वारा उक्त नियमों की उल्लंघना करते हुए जंग-ए-आज़ादी के निर्माण से सम्बन्धित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, लैंडस्केपिंग, संचालन और देखभाल/दस्तावेज़ी फि़ल्म बनाने के काम बिना टैंडर प्रणाली अपनाए अपने ख़ास ठेकेदार/व्यक्ति दीपक बिल्डजऱ्/शाम बैनेगल फि़ल्म निर्देशक को सौंप दिए गए।  

अधिक विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि बरजिंदर सिंह हमदर्द और विनय बुबलानी दोनों ने अपने निजी लाभ के लिए पंजाब फ्रीडम मूवमेंट मेमोरियल फाउंडेशन के डीड ऑफ डिक्लेरेशन (2012) के क्लॉज नंबर 9 और 10 में दी गई अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया और ठेकेदारों दीपक बिल्डर्स/गोदरेज एंड बॉयस कंपनी और सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके जंग-ए-आज़ादी प्रोजैक्ट के निर्माण राज रावेल मास्टर टैक्निकल कंसलटेंट (एम.टी.सी.) एन.एस./ई.डी.सी., क्रिएटिव टेक्नोलोजी सोल्यूशन लिमिटेड (म्युजिय़म सलाहकार) से प्लान के मुताबिक प्रोजैक्ट को मुकम्मल करवाए बगैर नॉन शड्यूल आइटम की आड़ में उक्त ठेकेदारों/ कम्पनियों को उनकी बिडिंग राशियों से भी अधिक की अदायगियाँ कीं।  

पड़ताल के दौरान सामने आया है कि जंग-ए-आज़ादी के निर्माण का नक्शा/प्लान तैयार करने के लिए राज रवेल मास्टर टैक्निकल कंसलटेंट को करीब  6  करोड़ और ई.डी.सी., क्रिएटिव टेक्नोलोजी सोल्यूशन लिमिटेड को करीब  3  करोड़ रुपए दिए गए थे, इसके बावजूद बरजिन्दर सिंह हमदर्द और विनय बुबलानी द्वारा असली  बिलों (बी.ओ.क्यू.) को अनदेखा करते हुए और उक्त दोनों कंसलटैंट्स के साथ जाँचे शिड्यूल  आईटम्स स्वीकृत कर दीं, जैसे कि जंग-ए-आज़ादी में बनने वाले  6  गुबन्दों को आर.सी.सी. स्ट्रक्चर की बजाय स्टील स्ट्रक्चर में बनाकर करोड़ों रुपए वसूल कर लिए गए। 

स्टोन क्लैडिंग के काम के लिए हिल्टी क्रैंप्स  का प्रयोग, सैटरिंग और शटरिंग की आइटम को नॉन-शड्यूल आइटम बनाकर अधिक रेट देकर करोड़ों रुपए अतिरिक्त अदायगी सम्बन्धित ठेकेदार को की गई। इसके अलावा दीपक बिल्डजऱ् द्वारा प्राईमरी स्टील का मुद्दा उठाकर बरजिन्दर सिंह हमदर्द और विनय बुबलानी सी.ई.ओ की शह पर बिना कार्यकारी समिति की मंजूरी के बिना माह अप्रैल  2015 से प्राईमरी स्टील (टाटा स्टील) खरीद करना शुरू कर दिया। 

बरजिन्दर सिंह हमदर्द प्रधान और श्री विनय बुबलानी सी.ई.ओ द्वारा कार्यकारी समिति की मीटिंग में करीब तीन महीने बाद दीपक बिल्डर को प्राईमरी स्टील के नाम पर टाटा स्टील खरीदने की मंजूरी देकर करोड़ों रुपए की अदायगी कर दी गई। प्रवक्ता ने बताया कि बताया कि जंग-ए-आज़ादी यादगार के निर्माण एम.टी.सी राज रावेल और म्युजिय़म कनसलटैंट ई.डी.सी क्रीएविट टेक्नोलोजी सोल्यूशन के प्लानों के मुताबिक नहीं हुई है, और एम.टी.सी राज रावेल द्वारा तैयार किये गए बिलों में सिविल की कुल 235 आइटमों में से 103 आइटमों को बिल/टैंडर को अनदेखा कर नॉन शड्यूल करके ठेकेदार दीपक बिल्डर को करोड़ों रुपए का अतिरिक्त वित्तीय लाभ दिया गया, जिस कारण इस पैसे से बनाए जाने वाले काफी निर्माण जैसे कि 10 प्रतिमाएं, पहली मंजिल पर स्थित 04 गैलरियाँ, मेमोरियल आइकन, फूड कोर्ट, ऐटरियम आदि आज भी अधूरे पड़े हुए हैं। 

इसके अलावा बरजिन्दर सिंह हमदर्द जो कि मैनेजमेंट कमेटी का भी प्रधान था, द्वारा करीब 14 करोड़ की लागत के साथ लेजर शो बनाया गया था, जो कि साल 2020 से बंद पड़ा है, जिससे सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ है। यह इमारत बिलों और डी.एन.आई.टी टैंडर के मुताबिक अभी भी मुकम्मल तौर पर तैयार नहीं हुई। जंग-ए-आज़ादी प्रोजैक्ट के कार्यों का अलग-अलग टैक्नीकल टीमों से विचार करवाया गया, जिनके द्वारा दी गई रिपोर्ट के मुताबिक ठेकेदारों को अतिरिक्त अदायगी करके सीधे तौर पर 27,23,62,615 रुपए का सरकार को वित्तीय नुकसान पहुँचाया है। जंग-ए-आज़ादी प्रोजैक्ट का जो काम अधूरा पड़ा है। इसके अलावा जंग-ए-आज़ादी में लगभग 14 करोड़ रुपए की लागत के साथ लगाया गया लेजर शो 2020 से बंद पाया गया और बरजिन्दर सिंह हमदर्द प्रशासनिक समिति के प्रधान थे, परन्तु उन्होंने अपनी जि़म्मेदारी नहीं निभाई और इस लेजर शो को ग़ैर-कार्यशील रखा, जिससे सरकार का बहुत वित्तिय नुकसान हुआ।  

उन्होंने कहा कि मुलजिम बरजिन्दर सिंह हमदर्द और विनय बुबलानी, आईएएस प्रधान और सी.ई.ओ कार्यकारी समिति क्रमवार एमटीसी के अनुसार स्मारक के निर्माण करवाने और योजना और बिल ऑफ क्वांटिटी/डीएआईटी टैंडर के मुताबिक काम करावाने में असफल रहे। कई टीमों द्वारा जंग-ए-आज़ादी प्रोजैक्ट के काम का जायज़ा लिया गया और उनके द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार यह निष्कर्ष निकला है कि निर्माण में ठेकेदारों को अतिरिक्त पैसे देकर जंग-ए-आज़ादी यादगार सरकारी खजाने को 27,23,62,615 रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ है। इसके अलावा जंग-ए-आज़ादी प्रोजैक्ट का काम जो अभी भी अधूरा है या गलत तरीके से बनाया गया है, का और वित्तीय बोझ पड़ेगा।  

Vigilance Bureau registers case against 26 persons for committing fraud in funds related to construction of Jang-e-Azadi Memorial, 15 accused arrested

jalandhar

The Punjab Vigilance Bureau (VB) on Wednesday registered a case against 26 accused including private persons for committing fraud in the government funds related to the construction of Jang-e-Azadi Memorial at Kartarpur, Jalandhar. In this case, the VB has arrested 15 officers/employees including a private person who would be produced in the competent court tomorrow.

Giving information in this regard, a spokesperson of the VB said during the investigation of a vigilance enquiry No. 05/2023, it was found that the funds released by the Punjab Government for the construction of said Jang-e-Azadi Memorial have been misappropriated causing huge loss to the state exchequer to the tune of crores of rupees. In this regard a case FIR no. 9 dated 22.05.2024 under sections 420, 406, 409, 465, 467, 468, 471, 120-B of the IPC and section 13(1)A read with 13(2) of the Prevention of Corruption Act has been registered at VB police station, Jalandhar range.

He informed that out of a total of 26 accused, the VB has arrested 15 accused so far, which includes Deepak Kumar Singal, owner of M/s. Deepak Builders, a resident of Raj Guru Nagar, Ludhiana, Arvinder Singh, Chief Engineer (Retired)-cum Independent Engineer, a resident of sector 38, Chandigarh, Tez Ram Katnauria, Xen PWD (B&R) Branch-2 Jalandhar (Chief Engineer Retired) resident of Jalandhar, Rajiv Kumar Arora, JE, (SDO Retired) PWD (B&R) Sub-Division provincial division-3 Jalandhar, resident of sector-11, Panchkula, Rohit Kumar JE, PWD (B&R) Construction Division-3 Jalandhar (Now JE Mechanical Division Jalandhar, a resident of Jalandhar, Raghwinder Singh Xen/Sub Divisional Officer, Public Works Department, Electrical Division Resident of Sector 110, Mohali, Santosh Raj Xen, Electrical Division Amritsar (Retd), a resident of Green City Akash Avenue, Amritsar, Harpal Singh SDO, Electrical Sub-Division Jalandhar (Xen Electrical Ludhiana), resident of Preet Nagar Ludhiana, Jatinder Arjun SDO, now Xen Electrical Sub-Division Jalandhar (Xen Mechanical Division PWD (B&R Jalandhar), resident of Jalandhar Cantt, Harpreet Singh, JE Electrical Sub-Division Jalandhar Cantt, resident of village Jalal Bhulana, district Kapurthala, Mandeep Singh, JE Electrical Sub-Division Jalandhar, resident of Urban Estate Phase-2, Jalandhar, NP Singh, Xen, department of Water Supply and Sanitation, resident of Chhoti Barandri Jalandhar, Rajat Gopal, SDO, department of Water Supply and Sanitation, Jalandhar (Xen ,Water Supply and Sanitation department Tarn Taran), resident of Gopal Park Kapurthala, Gauravdeep, JE, Water Supply and Sanitation department Division-1, Jalandhar, resident of Master Tara Singh Nagar, Jalandhar and Rohit Kondal, JE, Water Supply and Sanitation department Division-3 Jalandhar, Sub-Division Nakodar, district Jalandhar, a resident of Madhuban Kaluni, Kapurthala have been arrested. In this case, remaining absconding accused including Vinay Bublani, IAS, Former Chief Executive Officer, Jang-e-Azadi and others will be arrested soon as raids are being conducted at their residences and other locations. Further, investigation of this case is under progress.

Giving more information, he said during the investigation it was found that in 2012, the then Punjab government had proposed to build a memorial depicting the role the freedom struggle of India from the time of Maharaja Ranjit Singh to the independence of India, i.e. till the year 1947 so that future generations could be aware of the history and contribution of Punjabis in India's freedom struggle. 

In this regard, the Punjab Government sanctioned an amount of Rs. 315 crores to complete the above said project and 25 acres of prime land located on National Highway at Kartarpur, district Jalandhar was allotted for this purpose. He added that various committees were formed by the state government to carry out the work of this project, in which Barjinder Singh Hamdard was appointed as the president of Executive Committee/Management Committee who along with Vinay Bublani I.A.S. Former Chief Executive Officer, Jang-e-Azadi has supervised all the construction works of this project and did not empowered other members of the foundation pertaining to the rules and by-laws and deed of declaration of the memorial. 

Both Barjinder Singh Hamdard and Vinay Bublani,IAS in violation of the said rules had allotted the construction of Jang e Azadi related works to their choicest contractor/person neamly Deepak Builders/Sham Benegal Films regarding sewage treatment plant, landscaping, operation and maintenance/documentary film making, without adopting tender system.

Giving further details, he said both Barjinder Singh Hamdard and Vinay Bublani misused their powers given in clause No. 9 and 10 of Punjab Freedom Movement Memorial Foundation's Deed Of Declaration(2012) for their personal benefits and connived with the contractors (Deepak Builders/Godrej & Boyce Company) and government officers/officials who ignored and violated the original plans prepared by Raj Ravel, Master Technical Consultant (MTC) and EDC Creative Technology Solutions Limited (Museum Consultants) for construction of this project but made excess payments beyond the bidding amounts to the said contractors/companies under the guise of non-scheduled items without completing the project as per plan.

During the investigation, it has come to light that about Rs 6 crores were given to Raj Ravel Master Technical Consultant and about 3 crores to EDC Creative Technology Solutions Limited (Museum Consultant) for preparing the map/plan for the construction of Jang-e-Azadi project. Despite this, Barjinder Singh Hamdard and Vinay Bublani, ignoring the original bill of quantities(BOQ) and conniving with the said two consultants, approved the non-scheduled items such construction of 6 ‘Gubands’ in RC to steel structure and usurped crores of rupees. 

The use of Hilti Cramps for stone cladding work, and Centering and shuttering items were made non-schedule items thereby additional payments of crores of rupees was made to the above said contractor by giving enhanced rates. Apart from this, by raising the issue of primary steel, Deepak Builders started purchasing primary steel (Tata Steel) from April 2015, without the approval of the executive committee at the behest of Barjinder Singh Hamdard and Vinay Bublani CEO and around three months later (July  2015),  Barjinder Singh Hamdard and Mr. Vinay Bublani had got approval in the meeting of the Executive Committee to buy Tata Steel in the name of Primary Steel and paid crores of rupees to Deepak Builder.

The spokesman added that the construction of the Jang-e-Azadi memorial had not been accomplished as per the plans of MTC Raj Ravel and Museum Consultant EDC Creative Technology Solutions. During the probe, it was found that as per the plans prepared by MTC Raj Ravel, out of the total 235 civil items in the bills of quantities, 103 items were executed as non-scheduled works and paid additional financial benefits to the tune of crores of rupees to the contractor Deepak Builder due to which many constructions/components like 10 statues, 04 galleries at first floor, memorial icon, food court, atrium etc. 

could not be constructed with this money which are still in complete. Apart from this, a laser show which was installed at a cost of around Rs 14 crores at Jang-e-Azadi was found to be non-operational since 2020 and Barjinder Singh Hamdard being the President of the Managing Committee did not perform his responsibilities and kept this laser show non functional causing financial loss to the government.

He added that accused Barjinder Singh Hamdard and Vinay Bublani,IAS being President and CEO Executive Committee respectively failed to get the construction of the monument  done as per the  MTC Plan and Bill Of Quantities(BOQ)/DNIT tender. The work of Jang-e-Azadi project was reviewed by various technical teams and the according to the report given by them, it has been transpired that a direct financial loss of Rs 27,23,62,615 to the government exchequer has been done in the construction of the Jang-e-Azadi memorial by paying extra to the contractors. 

In addition to this, the work of the Jang-e-Azadi project which is still incomplete or constructed wrongly would incur another financial burden of crores of rupees on the government for its completion as per the MTC plan.

ਵਿਜੀਲੈਂਸ ਬਿਓਰੋ  ਵੱਲੋਂ ਜੰਗ-ਏ-ਅਜਾਦੀ ਯਾਦਗਾਰ ਕਰਤਾਰਪੁਰ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਸਬੰਧੀ ਫੰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਘਪਲੇਬਾਜੀ ਦੇ ਦੋਸ਼ ਹੇਠ 26 ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਵਿਰੁੱਧ ਕੇਸ ਦਰਜ, 15 ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ

ਜਲੰਧਰ

ਪੰਜਾਬ ਵਿਜੀਲੈ਼ਸ ਬਿਓਰੋ  ਨੇ ਅੱਜ ਜੰਗ-ਏ-ਅਜਾਦੀ ਯਾਦਗਾਰ, ਕਰਤਾਰਪੁਰ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਸਬੰਧੀ ਫੰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਘਪਲੇਬਾਜ਼ੀ ਕਰਕੇ ਸਰਕਾਰੀ ਖਜਾਨੇ ਨੂੰ ਕਰੋੜਾਂ ਰੁਪਏ ਦਾ ਵਿੱਤੀ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾਏ ਜਾਣ ਦੇ ਦੋਸ਼ ਹੇਠ 26 ਮੁਲਜ਼ਮਾਂ ਵਿਰੁੱਧ ਕੇਸ ਦਰਜ ਕਰਕੇ 15 ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ/ਕਰਮਚਾਰੀਆਂ ਸਮੇਤ ਇਕ ਪ੍ਰਾਇਵੇਟ ਵਿਅਕਤੀ ਨੂੰ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕਰ ਲਿਆ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕੱਲ੍ਹ ਅਦਾਲਤ ਵਿਚ ਪੇਸ਼ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ।

ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੰਦੇ ਹੋਏ ਵਿਜੀਲੈਂਸ ਬਿਊਰੋ ਦੇ ਬੁਲਾਰੇ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਵਿਜੀਲੈਂਸ ਇੰਨਕੁਆਰੀ ਨੰਬਰ 05/2023 ਦੀ ਪੜਤਾਲ ਤੋਂ ਜੰਗ-ਏ-ਅਜਾਦੀ ਯਾਦਗਾਰ, ਕਰਤਾਰਪੁਰ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਜਾਰੀ ਕੀਤੇ ਫੰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਗਈ ਘਪਲੇਬਾਜ਼ੀ ਕਰਕੇ ਸਰਕਾਰੀ ਖਜਾਨੇ ਨੂੰ ਕਰੋੜਾਂ ਰੁਪਏ ਦਾ ਵਿੱਤੀ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾਏ ਜਾਣ ਸਬੰਧੀ ਵਿਜੀਲੈਂਸ ਬਿਉਰੋ ਵੱਲੋਂ ਮੁਕੱਦਮਾ ਨੰਬਰ 9 ਮਿਤੀ 22.05.2024 ਨੂੰ ਆਈ.ਪੀ.ਸੀ ਦੀ ਧਾਰਾ 420, 406, 409, 465, 467, 468, 471, 120-ਬੀ ਅਤੇ ਭ੍ਰਿਸ਼ਟਾਚਾਰ ਰੋਕੂ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਧਾਰਾ 13(1)ਏ ਸਮੇਤ 13(2) ਥਾਣਾ ਵਿਜੀਲੈਂਸ ਬਿਉਰੋ, ਰੇਂਜ ਜਲੰਧਰ ਵਿਖੇ ਦਰਜ ਕਰ ਲਿਆ ਗਿਆ ਹੈ।

ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਕੁੱਲ 26 ਮੁਲਜਮਾਂ ਵਿਚੋਂ ਹੁਣ ਤੱਕ 15 ਮੁਲਜਮਾ ਨੂੰ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਜਿਨ੍ਹਾ ਵਿਚ ਦੀਪਕ ਕੁਮਾਰ ਸਿੰਗਲ (ਮਾਲਕ) ਮੈਸਰਜ ਦੀਪਕ ਬਿਲਡਰ ਵਾਸੀ ਰਾਜ ਗੁਰੂ ਨਗਰ, ਲੁਧਿਆਣਾ (ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ ਵਿਅਕਤੀ), ਅਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ, ਚੀਫ ਇੰਜੀਨੀਅਰ (ਰਿਟਾਇਰਡ)-ਕਮ ਇੰਡੀਪੈਂਡਿਟ ਇੰਜੀਨੀਅਰ ਜੰਗ-ਏ-ਅਜਾਦੀ ਵਾਸੀ ਸੈਕਟਰ-38ਬੀ ਚੰਡੀਗੜ, ਤੇਜ਼ ਰਾਮ ਕਟਨੌਰੀਆ, ਐਕਸੀਅਨ ਪੀ.ਡਬਲਯੂ.ਡੀ (ਬੀ.ਐਂਡ ਆਰ) ਸ਼ਾਖਾ-2 ਜਲੰਧਰ (ਚੀਫ ਇੰਜੀਨੀਅਰ ਰਿਟਾਇਰਡ) ਵਾਸੀ ਪਾਰਕ ਐਵੀਨਿਊ,  ਜਲੰਧਰ, ਰਾਜੀਵ ਕੁਮਾਰ ਅਰੋੜਾ, ਜੇ.ਈ (ਐਸ.ਡੀ.ਓ. ਰਿਟਾਇਰਡ) ਪੀ.ਡਬਲਯੂ.ਡੀ (ਬੀ.ਐਂਡ ਆਰ) ਸਬ-ਡਵੀਜਨ ਪ੍ਰੋਵੈਸ਼ੀਅਲ ਡਵੀਜਨ-3 ਜਲੰਧਰ ਵਾਸੀ ਸੈਕਟਰ-11, ਪੰਚਕੂਲਾ, ਰੋਹਿਤ ਕੁਮਾਰ ਜੇ.ਈ, ਪੀ.ਡਬਲਯੂ.ਡੀ (ਬੀ.ਐਂਡ ਆਰ) ਕੰਨਸਟਰੱਕਸ਼ਨ ਡਵੀਜਨ-3 ਜਲੰਧਰ (ਹੁਣ ਜੇ.ਈ ਮਕੈਨੀਕਲ ਡਵੀਜਨ ਜਲੰਧਰ ਵਾਸੀ ਪਿੰਡ ਨੂਸੀ, ਜਿਲਾ ਜਲੰਧਰ, ਰਘਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਐਕਸੀਅਨ, ਉਪ ਮੰਡਲ ਅਫਸਰ, ਲੋਕ ਨਿਰਮਾਣ ਵਿਭਾਗ (ਭ.ਤੇ ਮ. ਸ਼ਾਖਾ) ਇਲੈਕਟ੍ਰੀਕਲ ਡਵੀਜਨ ਵਾਸੀ ਸੈਕਟਰ 110, ਮੋਹਾਲੀ,  ਸੰਤੋਸ਼ ਰਾਜ ,ਐਕਸੀਅਨ, ਇਲੈਕਟ੍ਰੀਕਲ ਡਵੀਜਨ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ (ਰਿਟਾਇਰਡ) ਵਾਸੀ ਗਰੀਨ ਸਿਟੀ ਅਕਾਸ਼ ਐਵੀਨਿਊ, ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ, ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ ਐਸ.ਡੀ.ਓ, ਇਲੈਕਟ੍ਰੀਕਲ ਸਬ-ਡਵੀਜਨ ਜਲੰਧਰ (ਐਕਸੀਅਨ ਇਲੈਕਟਰੀਕਲ ਲੁਧਿਆਣਾ) ਵਾਸੀ ਪ੍ਰੀਤ ਨਗਰ ਲੁਧਿਆਣਾ, ਜਤਿੰਦਰ ਅਰਜੁਨ ਐਸ.ਡੀ.ਓ ਹੁਣ ਐਕਸੀਅਨ ਇਲੈਕਟ੍ਰੀਕਲ ਸਬ-ਡਵੀਜਨ ਜਲੰਧਰ (ਐਕਸੀਅਨ ਮਕੈਨੀਕਲ ਡਵੀਜਨ ਪੀ.ਡਬਲਯੂ.ਡੀ (ਬੀ.ਐਂਡ ਆਰ ਜਲੰਧਰ) ਵਾਸੀ ਜਲੰਧਰ ਕੈਂਟ, ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ, ਜੇ.ਈ ਇਲੈਕਟ੍ਰੀਕਲ ਸਬ-ਡਵੀਜਨ ਜਲੰਧਰ ਕੈਂਟ ਵਾਸੀ ਪਿੰਡ ਜਲਾਲ ਭੁਲਾਣਾ, ਜਿਲਾ ਕਪੂਰਥਲਾ, ਮਨਦੀਪ ਸਿੰਘ, ਜੇ.ਈ ਇਲੈਕਟ੍ਰੀਕਲ ਸਬ-ਡਵੀਜਨ ਜਲੰਧਰ ਵਾਸੀ ਅਰਬਨ ਅਸਟੇਟ ਫੇਸ-2, ਜਲੰਧਰ, ਐਨ.ਪੀ ਸਿੰਘ, ਐਕਸੀਅਨ, ਵਾਟਰ ਸਪਲਾਈ ਅਤੇ ਸੈਨੀਟੇਸ਼ਨ ਵਿਭਾਗ ਵਾਸੀ ਛੋਟੀ ਬਾਰਾਂਦਰੀ ਜਲੰਧਰ,  ਰੱਜਤ ਗੋਪਾਲ, ਐਸ.ਡੀ.ਓ, ਵਾਟਰ ਸਪਲਾਈ ਅਤੇ ਸੈਨੀਟੇਸ਼ਨ ਵਿਭਾਗ ਜਲੰਧਰ (ਐਕਸੀਅਨ ਵਾਟਰ ਸਪਲਾਈ ਅਤੇ ਸੈਨੀਟੇਸ਼ਨ ਵਿਭਾਗ ਤਰਨ ਤਾਰਨ) ਵਾਸੀ ਗੋਪਾਲ ਪਾਰਕ ਕਪੂਰਥਲਾ, ਗੌਰਵਦੀਪ, ਜੇ.ਈ ਵਾਟਰ ਸਪਲਾਈ ਅਤੇ ਸੈਨੀਟੇਸ਼ਨ ਵਿਭਾਗ ਡਵੀਜਨ-1, ਜਲੰਧਰ ਵਾਸੀ ਮਾਸਟਰ ਤਾਰਾ ਸਿੰਘ ਨਗਰ, ਜਲੰਧਰ ਅਤੇ ਰੋਹਿਤ ਕੌਂਡਲ, ਜੇ.ਈ ਵਾਟਰ ਸਪਲਾਈ ਅਤੇ ਸੈਨੀਟੇਸ਼ਨ ਵਿਭਾਗ ਡਵੀਜਨ-3 ਜਲੰਧਰ, ਸਬ-ਡਵੀਜਨ ਨਕੋਦਰ, ਜਿਲ੍ਹਾ ਜਲੰਧਰ ਵਾਸੀ ਮਧੂਬਨ ਕਲੌਨੀ, ਕਪੂਰਥਲਾ ਨੂੰ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। 

ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕੱਲ ਅਦਾਲਤ ਵਿੱਚ ਪੇਸ਼ ਕਰਕੇ ਰਿਮਾਂਡ ਹਾਸਲ ਕਰਕੇ ਪੁੱਛਗਿੱਛ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ।  ਇਸ ਮੁਕੱਦਮੇ ਦੇ ਬਾਕੀ ਫਰਾਰ ਮੁਲਜ਼ਮ ਵਿਨੈ ਬੁਬਲਾਨੀ, ਆਈ.ਏ.ਐਸ., ਸਾਬਕਾ ਮੁੱਖ ਕਾਰਜਕਾਰੀ ਅਫਸਰ ਜੰਗ-ਏ-ਆਜ਼ਾਦੀ ਅਤੇ ਹੋਰ, ਨੂੰ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕਰਨ ਲਈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਰਿਹਾਇਸ਼ੀ ਅਤੇ ਹੋਰ ਠਿਕਾਣਿਆ ਤੇ ਦਬਿਸ਼ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਇਸ ਕੇਸ ਦੀ ਹੋਰ ਤਫਤੀਸ਼ ਜਾਰੀ ਹੈ।

ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੰਦੇ ਹੋਏ ਵਿਜੀਲੈ਼ਸ ਬਿਓਰੋ ਦੇ ਬੁਲਾਰੇ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪੜਤਾਲ ਤੋਂ ਪਾਇਆ ਗਿਆ ਕਿ ਸਾਲ 2012 ਵਿੱਚ ਤਤਕਾਲੀ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਮਹਾਰਾਜਾ ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ ਦੇ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਭਾਰਤ ਦੀ ਅਜ਼ਾਦੀ ਤੱਕ ਭਾਵ ਸਾਲ 1947 ਤੱਕ ਭਾਰਤ ਦੀ ਅਜ਼ਾਦੀ ਦੇ ਸੰਘਰਸ਼ ਅਤੇ ਅਜਾਦੀ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਦੀ ਭੂਮਿਕਾ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦੀ ਯਾਦਗਾਰ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਪ੍ਰਸਤਾਵ ਰੱਖਿਆ ਸੀ, ਤਾਂ ਜ਼ੋ ਅਗਲੀਆਂ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਭਾਰਤ ਦੇ ਅਜਾਦੀ ਸੰਗਰਾਮ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਦੇ ਇਤਹਾਸ ਅਤੇ ਯੋਗਦਾਨ ਬਾਰੇ ਜਾਣੂ ਹੋਣ।

ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਉਪਰੋਕਤ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ 315 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੀ ਰਾਸ਼ੀ ਮੰਨਜੂਰ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਨੈਸ਼ਨਲ ਹਾਈਵੇ ਕਰਤਾਰਪੁਰ ਜਿ਼ਲ੍ਹਾ ਜਲੰਧਰ ਤੇ ਸਥਿਤ 25 ਏਕੜ ਪ੍ਰਮੁੱਖ ਜ਼ਮੀਨ ਇਸ ਮੰਤਵ ਲਈ ਅਲਾਟ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਇਸ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਦੇ ਕੰਮ ਨੂੰ ਨੇਪਰੇ ਚਾੜਨ ਲਈ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕਮੇਟੀਆਂ ਦਾ ਗਠਨ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਬਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਹਮਦਰਦ ਨੂੰ ਪ੍ਰਧਾਨ ਨਿਯੁਕਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ। ਇਸ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਸਬੰਧੀ ਸਾਰੀ ਦੇਖ ਰੇਖ ਬਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਹਮਦਰਦ ਪ੍ਰਧਾਨ ਕਾਰਜਕਾਰੀ ਕਮੇਟੀ /ਪ੍ਰਬੰਧਕੀ ਕਮੇਟੀ ਅਤੇ ਵਿਨੈ ਬੁਬਲਾਨੀ ਆਈ.ਏ.ਐਸ. ਮੁੱਖ ਕਾਰਜਕਾਰੀ ਅਫਸਰ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕਮੇਟੀ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੂੰ ਫਾਊਡੇਸ਼ਨ ਦੇ ਬਣਾਏ ਗਏ ਰੂਲਜ਼ ਐਂਡ ਬਾਈ-ਲਾਅਜ਼ ਅਤੇ ਡੀਡ ਆਫ ਡੈਕਲਾਰੇਸ਼ਨ ਦੇ ਸਿੱਧੇ ਤੌਰ ਤੇ ਕੋਈ ਅਧਿਕਾਰ ਨਹੀਂ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਸਨ। 

ਬਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਹਮਦਰਦ ਅਤੇ ਵਿਨੈ ਬੁਬਲਾਨੀ ਵੱਲੋਂ ਉਕਤ ਰੂਲਾਂ ਦੀ ਉਲੰਘਣਾ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਜੰਗ ਏ ਅਜਾਦੀ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਸੀਵਰੇਜ ਟਰੀਟਮੈਂਟ ਪਲਾਂਟ, ਲੈਂਡਸਕੇਪਿੰਗ, ਸੰਚਾਲਨ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ/ਦਸਤਾਵੇਜ਼ੀ ਫਿਲਮ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਕੰਮ ਬਿਨ੍ਹਾਂ ਟੈਂਡਰ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਅਪਣਾਏ ਆਪਣੇ ਖਾਸ ਠੇਕੇਦਾਰ/ਵਿਅਕਤੀ ਦੀਪਕ ਬਿਲਡਰਜ਼/ ਸ਼ਾਮ ਬੈਨੇਗਲ ਫਿਲਮ ਨਿਰਦੇਸ਼ਕ ਨੂੰ ਸੌਂਪ ਦਿੱਤੇ ਗਏ। ਹੋਰ ਵੇਰਵੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਬਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਹਮਦਰਦ ਅਤੇ ਵਿਨੈ ਬੁਬਲਾਨੀ ਵੱਲੋਂ ਪੰਜਾਬ ਫਰੀਡਮ ਮੂਵਮੈਂਟ ਮੈਮੋਰੀਅਲ ਫਾਊਂਡੇਸ਼ਨ ਡੀਡ(2012) ਵਿੱਚ ਮੱਦ ਨੰਬਰ 9 ਅਤੇ 10 ਮੁਤਾਬਿਕ ਆਪਣੇ ਬਣਦੇ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਦੀ ਦੁਰਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਆਪਣੇ ਨਿੱਜੀ ਮੁਫਾਦ ਲਈ ਠੇਕੇਦਾਰਾਂ ਦੀਪਕ ਬਿਲਡਰਜ਼/ਗੋਦਰੇਜ਼ ਐਂਡ ਬੋਇਸ ਕੰਪਨੀ ਅਤੇ ਸਰਕਾਰੀ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ/ਕਰਮਚਾਰੀਆਂ ਨਾਲ ਮਿਲੀਭੁਗਤ ਕਰਕੇ ਜੰਗ ਏ ਅਜਾਦੀ ਪ੍ਰੇਜੈਕਟ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਰਾਜ ਰਾਵੇਲ ਮਾਸਟਰ ਟੈਕਨੀਕਲ ਕੰਸਲਟੈਂਟ (ਐੱਮ.ਟੀ.ਸੀ.) ਐੱਨ. ਐੱਸ. / ਈ.ਡੀ.ਸੀ., ਕ੍ਰਿਏਟਿਵ ਟੈਕਨੋਲੋਜੀ ਸੋਲਿਊਸ਼ਨ ਲਿਮਟਿਡ (ਮਿਊਜ਼ੀਅਮ ਸਲਾਹਕਾਰ) ਤੋਂ ਪਲਾਨ ਮੁਤਾਬਿਕ ਮੁਕੰਮਲ ਕਰਵਾਏ ਬਗੈਰ ਨਾਨ ਸ਼ਡਿਊਲ ਆਈਟਮ ਦੀ ਆੜ ਹੇਠ ਉਕਤ ਠੇਕੇਦਾਰਾਂ/ਕੰਪਨੀਆਂ ਨੂੰ ਉਹਨਾਂ ਦੀਆਂ ਬਿਡਿੰਗ ਰਾਸ਼ੀਆਂ ਤੋਂ ਵੀ ਵੱਧ ਦੀਆਂ ਅਦਾਇਗੀਆਂ ਕੀਤੀਆਂ।

ਪੜਤਾਲ ਦੌਰਾਨ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ ਹੈ ਕਿ ਜੰਗ-ਏ-ਅਜਾਦੀ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਦਾ ਨਕਸ਼ਾ/ਪਲਾਨ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਰਾਜ ਰਵੇਲ ਮਾਸਟਰ ਟੈਕਨੀਕਲ ਕੰਸਲਟੈਂਟ ਨੂੰ ਕਰੀਬ 6 ਕਰੋੜ ਅਤੇ ਈ.ਡੀ.ਸੀ., ਕ੍ਰਿਏਟਿਵ ਟੈਕਨੋਲੋਜੀ ਸੋਲਿਊਸ਼ਨ ਲਿਮਟਿਡ ਨੂੰ ਕਰੀਬ 3 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦਿੱਤੇ ਗਏ ਸਨ, ਇਸ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਬਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਹਮਦਰਦ ਅਤੇ ਵਿਨੈ ਬੁਬਲਾਨੀ ਵੱਲੋਂ ਅਸਲ ਬਿਲਾਂ ਨੂੰ ਅੱਖੋ-ਪਰੋਖੇ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਅਤੇ ਉਕਤ ਦੋਨੋ ਕੰਸਲਟੈਂਟਾਂ ਨਾਲ ਸਾਜ-ਬਾਜ ਹੋ ਕੇ ਗੈਰ ਸ਼ਿਡਿਊਲ ਆਈਟਮਾਂ ਪ੍ਰਵਾਨ ਕਰ ਦਿੱਤੀਆਂ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਜੰਗ-ਏ-ਅਜ਼ਾਦੀ ਵਿੱਚ ਬਨਣ ਵਾਲੇ 6 ਗੁਬੰਦਾਂ ਨੂੰ ਆਰ.ਸੀ.ਸੀ. ਸਟਰੱਕਚਰ ਦੀ ਬਜਾਏ ਸਟੀਲ ਸਟਰੱਕਚਰ ਵਿੱਚ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰੋੜਾਂ ਰੁਪਏ ਵਸੂਲ ਕਰ ਲਏ ਗਏ। 

ਸਟੋਨ ਕਲੈਡਿੰਗ ਦੇ ਕੰਮ ਲਈ ਹਿਲਟੀ ਕਰੈਂਪਸ ਦੀ ਵਰਤੋਂ, ਸੈਟਰਿੰਗ ਅਤੇ ਸ਼ਟਰਿੰਗ ਦੀ ਆਈਟਮ ਨੂੰ ਨਾਨ ਸ਼ਡਿਊਲ ਆਈਟਮ ਬਣਾ ਕੇ ਵੱਧ ਰੇਟ ਦੇ ਕੇ ਕਰੋੜਾਂ ਰੁਪਏ ਵਾਧੂ ਅਦਾਇਗੀ ਸਬੰਧਤ ਠੇਕੇਦਾਰ ਨੂੰ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਦੀਪਕ ਬਿਲਡਰਜ਼ ਵੱਲੋਂ ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਸਟੀਲ ਦਾ ਮੁੱਦਾ ਉਠਾਕੇ ਬਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਹਮਦਰਦ ਤੇ ਵਿਨੈ ਬੁਬਲਾਨੀ ਸੀ.ਈ.ਓ ਦੀ ਸ਼ਹਿ ਪਰ ਬਿਨ੍ਹਾਂ ਕਾਰਜਕਾਰੀ ਕਮੇਟੀ ਦੀ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਦੇ  ਬਿਨਾਂ ਮਾਹ ਅਪ੍ਰੈਲ 2015 ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਸਟੀਲ (ਟਾਟਾ ਸਟੀਲ) ਖਰੀਦ ਕਰਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। 

ਬਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਹਮਦਰਦ ਪ੍ਰਧਾਨ ਤੇ ਸ਼੍ਰੀ ਵਿਨੈ ਬੁਬਲਾਨੀ ਸੀ.ਈ.ਓ ਵਲੋਂ ਕਾਰਜਕਾਰੀ ਕਮੇਟੀ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿਚ ਕਰੀਬ ਤਿੰਨ ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਦੀਪਕ ਬਿਲਡਰ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਇਮਰੀ ਸਟੀਲ ਦੇ ਨਾਮ ਪਰ ਟਾਟਾ ਸਟੀਲ ਖਰੀਦਣ ਦੀ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਦੇ ਕੇ ਕਰੋੜਾਂ ਰੁਪਏ ਦੀ ਅਦਾਇਗੀ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਗਈ। ਬੁਲਾਰੇ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਜੰਗ-ਏ-ਅਜਾਦੀ ਯਾਦਗਾਰ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਐਮ.ਟੀ.ਸੀ ਰਾਜ ਰਾਵੇਲ ਅਤੇ ਮਿਊਜੀਅਮ ਕੰਨਸਲਟੈਂਟ ਈ.ਡੀ.ਸੀ ਕਰੀਏਵਿਟ ਟੈਕਨੋਲੋਜੀ ਸਲਇਊਸ਼ਨ ਦੇ ਪਲਾਨਾਂ ਮੁਤਾਬਿਕ ਨਹੀਂ ਹੋਈ ਹੈ ਅਤੇ ਐਮ.ਟੀ.ਸੀ ਰਾਜ ਰਾਵੇਲ ਵਲੋਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਗਏ ਬਿਲਾਂ ਵਿਚ ਸਿਵਲ ਦੀਆਂ ਕੁਲ 235 ਆਈਟਮਾਂ ਵਿਚੋਂ 103 ਆਈਟਮਾਂ ਨੂੰ ਬਿੱਲ/ਟੈਂਡਰ ਨੂੰ ਅੱਖੋਂ ਪਰੋਖੇ ਕਰਕੇ ਨਾਨ ਸ਼ਡਿਊਲ ਕਰਕੇ ਠੇਕੇਦਾਰ ਦੀਪਕ ਬਿਲਡਰ ਨੂੰ ਕਰੋੜਾਂ ਰੁਪਏ ਦਾ ਵਾਧੂ ਵਿੱਤੀ ਲਾਭ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਇਸ ਪੈਸੇ ਨਾਲ ਉਸਾਰੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਕਾਫੀ ਉਸਾਰੀਆਂ ਜਿਵੇਂ ਕਿ 10 ਬੁੱਤ, ਪਹਿਲੀ ਮੰਜਿਲ ਤੇ ਸਥਿਤ 04 ਗੈਲਰੀਆਂ, ਮੈਮੋਰੀਅਲ ਆਈਕਨ, ਫੂਡ ਕੋਰਟ, ਐਟਰੀਅਮ ਆਦਿ ਅੱਜ ਵੀ ਅਧੂਰੀਆਂ ਪਈਆਂ ਹੋਈਆਂ ਹਨ। 

ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਬਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਹਮਦਰਦ ਜ਼ੋ ਕਿ ਮੈਨੇਜਮੈਂਟ ਕਮੇਟੀ ਦਾ ਵੀ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸੀ, ਵੱਲੋਂ ਕਰੀਬ 14 ਕਰੋੜ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਲੇਜ਼ਰ ਸੋਅ ਬਣਾਇਆ ਗਿਆ ਸੀ ਜ਼ੋ ਕਿ ਸਾਲ 2020 ਤੋਂ ਬੰਦ ਪਿਆ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਵੀ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਵਿੱਤੀ ਨੁਕਸਾਨ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਇਹ ਇਮਾਰਤ ਬਿਲਾਂ ਅਤੇ ਡੀ.ਐਨ.ਆਈ.ਟੀ ਟੈਂਡਰ ਮੁਤਾਬਿਕ ਅਜੇ ਵੀ ਮੁਕੰਮਲ ਤੌਰ ਤੇ ਤਿਆਰ ਨਹੀਂ ਹੋਈ। ਜੰਗ-ਏ-ਅਜਾਦੀ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਦਾ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਟੈਕਲੀਨਕਲ ਟੀਮਾਂ ਤੋਂ ਮੁਲਾਹਜਾ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵੱਲੋਂ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਰਿਪੋਰਟ ਮੁਤਾਬਿਕ ਠੇਕੇਦਾਰਾਂ ਨੂੰ ਵਾਧੂ ਅਦਾਇਗੀ ਕਰਕੇ ਸਿੱਧੇ ਤੌਰ ਤੇ 27,23,62,615 ਰੁਪਏ ਦਾ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਵਿੱਤੀ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾਇਆ ਹੈ। ਜ਼ੋ ਜੰਗ-ਏ-ਅਜਾਦੀ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਦਾ ਜ਼ੋ ਕੰਮ  ਅਧੂਰਾ ਪਿਆ ਹੈ ।

ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਸ. ਜੰਗ-ਏ-ਆਜ਼ਾਦੀ ਵਿਖੇ ਲਗਭਗ 14 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਲਗਾਇਆ ਗਿਆ ਲੇਜ਼ਰ ਸ਼ੋਅ 2020 ਤੋਂ ਬੰਦ ਪਾਇਆ ਗਿਆ ਅਤੇ ਬਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਹਮਦਰਦ ਪ੍ਰਬੰਧਕੀ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸਨ ,ਪਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਆਪਣੀ ਜਿੰਮੇਵਾਰੀ ਨਹੀਂ ਨਿਭਾਈ ਅਤੇ ਇਸ ਲੇਜ਼ਰ ਸ਼ੋ ਨੂੰ ਗੈਰ-ਕਾਰਜਸ਼ੀਲ ਰੱਖਿਆ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਬਹੁਤ ਮਾਲੀ ਨੁਕਸਾਨ ਹੋਇਆ।

ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮੁਲਜ਼ਮ ਬਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਹਮਦਰਦ ਅਤੇ ਵਿਨੈ ਬੁਬਲਾਨੀ, ਆਈਏਐਸ ਪ੍ਰਧਾਨ ਅਤੇ ਸੀ.ਈ.ਓ ਕਾਰਜਕਾਰੀ ਕਮੇਟੀ ਕ੍ਰਮਵਾਰ ਐਮਟੀਸੀ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਸਮਾਰਕ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਕਰਵਾਉਣ ਅਤੇ ਯੋਜਨਾ ਤੇ  ਬਿੱਲ ਆਫ ਕੁਆਂਟਟੀ/ਡੀਐਆਈਟੀ  ਟੈਂਡਰ ਮੁਤਾਬਕ ਕੰਮ ਕਰਾਵਉਣ ਵਿੱਚ ਅਸਫ਼ਲ ਰਹੇ। ਕਈ ਟੀਮਾਂ ਵੱਲੋਂ ਜੰਗ-ਏ-ਆਜ਼ਾਦੀ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਦੇ ਕੰਮ ਦਾ ਜਾਇਜ਼ਾ ਲਿਆ ਗਿਆ  ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵੱਲੋਂ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਰਿਪੋਰਟ ਅਨੁਸਾਰ ਇਹ ਸਿੱਟਾ ਨਿਕਲਿਆ ਹੈ ਕਿ ਸਿੱਧੇ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਵਿੱਚ  ਠੇਕੇਦਾਰਾਂ ਨੂੰ ਵਾਧੂ ਪੈਸੇ ਦੇ ਕੇ ਜੰਗ-ਏ-ਆਜ਼ਾਦੀ ਯਾਦਗਾਰ ਸਰਕਾਰੀ ਖਜ਼ਾਨੇ ਨੂੰ 27,23,62,615 ਰੁਪਏ ਦਾ ਵਿੱਤੀ ਨੁਕਸਾਨ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਜੰਗ-ਏ-ਆਜ਼ਾਦੀ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟ ਦਾ ਕੰਮ ਜੋ ਅਜੇ ਵੀ ਅਧੂਰਾ ਹੈ ਜਾਂ ਗਲਤ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਬਣਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ, ਦਾ ਹੋਰ ਵਿੱਤੀ ਬੋਝ ਪਵੇਗਾ।

 

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