Saturday, 13 April 2024

 

 

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पीईसी में ड्रोन अनुप्रयोगों पर 6 दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन

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चंडीगढ़ , 04 Mar 2024

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (मानित विश्वविद्यालय), चंडीगढ़ की कल्पना चावला चेयर ऑफ़ ऑफ़ जिओस्पेशिअल टेक्नोलॉजी द्वारा आज 4 मार्च से 9 मार्च, 2024 तक "एडवांस मैपिंग थ्रू ड्रोन ऍप्लिकेशन्स (एएमडीए-2024) पर 6 दिवसीय कार्यशाला की आज शुरुआत की। इस समारोह के मुख्य अतिथि श्री. मनीष कुमार, जॉइंट डायरेक्टर डीजीसीए, गेस्ट ऑफ़ ऑनर श्री के. तुलसीरामन, निदेशक (एई), डीजीसीए, उनके साथ ही PEC के डायरेक्टर, प्रो. (डॉ.) बलदेव सेतिया जी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से इस अवसर की शोभा बढ़ाई।

प्रो. एस.के. सिंह, सिविल इंजीनियरिंग विभाग के कार्यवाहक एचओडी,  रजिस्ट्रार कर्नल आर.एम. जोशी और कार्यशाला के कोऑर्डिनेटर डॉ. हरअमृत सिंह संधू सहित संस्थान के सभी संकाय सदस्य और छात्र भी उपस्थित थे। यह वर्कशॉप ड्रोन असेंबली, फ्लाइंग तकनीक और ड्रोन इमेज प्रोसेसिंग में जागरूकता बढ़ाने और प्रैक्टिकल नॉलेज प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो प्रतिभागियों को ड्रोन की व्यापक समझ भी प्रदान करेगी। एनईएसएसी, आईआईआरएस, एसओआई, आईआईटी, डीजीआरई और इंडस्ट्री से जुड़े हुए कई स्पीकर्स एडवांस मैपिंग में ड्रोन एप्लिकेशन पर अपने इनसाइट्स  प्रदान करेंगे और कई एहम मुद्दों पर प्रकाश भी डालेंगे।

डॉ. संधू ने अपने संबोधन में PEC परिसर में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने वर्कशॉप के बारे में भी जानकारी दी। यह कार्यशाला ड्रोन असेंबली, उनकी और इमेज प्रोसेसिंग में प्रैक्टिकल नॉलेज, ड्रोन अनुप्रयोगों के व्यापक ज्ञान पर भी प्रकाश डालेगी और विशेषज्ञों और पेशेवरों के साथ नेटवर्किंग के अवसरों के रूप में भी काम करेगी।

प्रो. एस.के. सिंह ने कहा, कि आजकल हम जिस भी तरह की तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, उसमें ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता है। चिकित्सा, इंजीनियरिंग, आईटी, एआई, सेना और अन्य रक्षा बलों के क्षेत्र में भी, ये सभी विभिन्न उद्देश्यों के लिए ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं। उनकी उपयोगिता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और यह वर्कशॉप ड्रोन के उपयोगों के माध्यम से एडवांस मैपिंग में भी इनसाइट्स/अंतर्दृष्टि प्रदान करेगी। उन्होंने इस अवसर पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति से शोभा बढ़ाने के लिए सम्मानित गणमान्य व्यक्तियों के प्रति अपना आभार भी व्यक्त किया।

PEC के निदेशक प्रो. (डॉ.) बलदेव सेतिया जी ने इस वर्कशॉप के आयोजन के लिए सिविल इंजीनियरिंग विभाग की सराहना भी की। उन्होंने शुरुआती दौर में ड्रोन के इस्तेमाल पर प्रकाश डाला। इसके बाद, उन्होंने हाल के वर्षों में बहुत तेज गति से उन्नत हो रही ड्रोन्स की स्केलेबिलिटी में हुई तबदीली पर भी बात की। आज के समय में ड्रोन ने छोटे से लेकर दूर-दराज के क्षेत्रों को भी आसानी से कवर करना संभव बना दिया है। उन्होंने 1903 में ओलिवर और विल्बर ब्रदर्स की 12 सेकंड की पहली उड़ान की कहानी भी साझा की।

अंत में, उन्होंने एक बार फिर विभाग को बधाई दी और PEC के प्रांगण में आने के लिए सभी सम्मानित अतिथियों का स्वागत भी किया।गेस्ट ऑफ़ ऑनर श्री के. तुलसीरामन ने ड्रोन के अनुप्रयोग पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा की। उन्होंने बढ़ते वक़्त के साथ, ड्रोन तकनीक में होते बदलाव, उनकी फ्लाइंग लिमिट, उनकी बेहद नाज़ुक तकनीक, उनकी प्रभावशीलता के साथ सुरक्षा सुनिश्चित करने के बारे में भी बात की। अंत में उन्होंने कहा, कि ड्रोन एक शक्तिशाली उपकरण है और हम इसका काफी हद तक अच्छा उपयोग कर सकते हैं।

चीफ़ गेस्ट, जॉइंट डायरेक्टर (डीजीसीए) श्री. मनीष कुमार जी को अपने अल्मा-मेटर PEC में वापस आकर उनकी पुरानी यादें भी ताजा हो गईं। वह संस्थान के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के 1989 बैच के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने कमर्शियल बेसिस पर, एयरोस्पेस के क्षेत्र में, कृषि में, विभिन्न देशों के रक्षा बलों द्वारा  ड्रोन्स के उपयोग पर भी प्रकाश डाला। सिविल इंजीनियरिंग उद्देश्यों में ड्रोन एडवांस मैपिंग में मदद कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा, कि सभी देशों को ड्रोन्स के उपयोगों और उनकी सुरक्षा, उनके डिजाइन विचार और संचालन के प्रति एक समान दृष्टिकोण रखना चाहिए। ड्रोन के साथ-साथ बड़े पैमाने पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डीजीसीए के पास ड्रोन की प्रयोज्यता के लिए नियमों का एक सेट भी मौजूद है। आज हमारे पास देश में 30 किलोग्राम तक वजन वाले ड्रोन मौजूद हैं।

अंत में, उन्होंने कहा कि "यह केवल एक तकनीकी डेमोंस्ट्रेटर ही नहीं है, यह वास्तव में भी रिजल्ट्स देता है।"उपस्थित दर्शकों को PEC की गौरवशाली विरासत और इतिहास को दर्शाती एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। इस उद्घाटन सत्र धन्यवाद ज्ञापन के साथ समाप्त हुआ। PEC के निदेशक द्वारा गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

6-day Long Workshop on Drone Applications Inaugurated at PEC

Chandigarh

The Kalpana Chawla Chair of Geospatial Technology of Punjab Engineering College (Deemed to be University), Chandigarh today inaugurated the 6-days long Workshop on Advance Mapping through Drone Applications (AMDA-2024) from 4th March - 9th March, 2024.

The Chief Guest of the ceremony Joint Director General DGCA Sh. Maneesh Kumar, Guest of Honor Mr. K. Thulasiraman, Director(AE), DGCA, along with Director of PEC, Prof. (Dr.) Baldev Setia graced the occasion with their esteemed presence. Prof. S.K. Singh, officiating HoD of Civil Engineering Department, Registrar Col. R. M. Joshi and Coordinator of the Workshop Dr. HarAmrit Singh Sandhu along with all the members of faculty and students of the institute were also present at this occasion.

This workshop is designed to raise awareness and impart practical skills in drone assembly, flying techniques, and drone image processing, offering participants a comprehensive understanding of drones. Speakers from NESAC, IIRS, SOI, IITs, DGRE and Industry are going to provide insights and shed light on Drone Application in Advance Mapping.

Dr. Sandhu, in his address welcomed the participants from various states of the country at the PEC Campus. He also briefed about the workshop. This workshop will highlight practical insights into drone assembly, flying and image processing, comprehensive knowledge of drone applications and will work as Networking opportunities with experts and professionals.

Prof. S.K. Singh said that Drones are used in every kind of technology we use nowadays. In the field of medical, engineering, IT, AI, Army and other defence forces, all of them are using drones for a variety of purposes. Their Applicability is increasing day by day and this workshop will provide insights into the advance mapping through Drones applications.

He expressed his gratitude towards the esteemed dignitaries for gracing this occasion with their esteemed presence. Director of PEC, Prof. (Dr.) Baldev Setia, complimented the department for organising this workshop. He shed light on the earlier uses of drones in the initial period.

Afterwards, that had turned to advanced scalability at a much faster pace in recent years. Drones have made it possible to cover smallest to farthest areas with ease. He shared the story of the first flight of 12 seconds in 1903 by Oliver and Wilbur Brothers. Lastly, he once again congratulated the department and welcomed the esteemed guests at the portals of PEC.  

Guest of Honor, Mr. K. Thulasiraman, shared his insights into the application of Drones. He also talked about the transformation of drones over the time, their extent, delicate technicalities, ensuring safety with effectiveness. Lastly, he said that drones are a powerful tool and we can make good use of them to a larger extent.

Chief Guest, Jt. DG (DGCA) Sh. Maneesh Kumar, felt nostalgic for being back at his alma-mater. He is an alumni of the institute of 1989 batch of Aerospace Engineering Department. He shed light on the uses of drones on a commercial basis, in the field of aerospace, in agriculture, usage by Defence Forces of Various Countries.

In Civil Engineering purposes, drones are helping in the advance mapping. He also said that all countries should have a uniform approach towards the safety & security considerations, design consideration and operation considerations. DGCA has a set of rules for applicability of drones to ensure the safety & security of drones as well as of masses at a larger extent.

Today, we have drones weighing upto 30kg within the country. Lastly, he said that "It's not merely a technical demonstrator, it actually delivers results."   documentary depicting the glorious legacy and history of PEC was also shown to the audience present. The Inaugural Session ended with a vote of thanks. The dignitaries were felicitated by Director, PEC.  

ਡਰੋਨ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨਾਂ 'ਤੇ 6 ਦਿਨਾਂ ਲੰਬੀ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਦਾ PEC ਵਿਖੇ ਉਦਘਾਟਨ ਕੀਤਾ ਗਿਆ

ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ

ਪੰਜਾਬ ਇੰਜਨੀਅਰਿੰਗ ਕਾਲਜ (ਡੀਮਡ ਟੂ ਬੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ), ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦੀ ਜੀਓਸਪੇਸ਼ੀਅਲ ਟੈਕਨਾਲੋਜੀ ਦੀ ਕਲਪਨਾ ਚਾਵਲਾ ਚੇਅਰ ਵੱਲੋ ਅੱਜ 4 ਮਾਰਚ ਤੋਂ 9 ਮਾਰਚ, 2024 ਤੱਕ ਡਰੋਨ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨਾਂ ਰਾਹੀਂ ਐਡਵਾਂਸ ਮੈਪਿੰਗ (AMDA-2024) 'ਤੇ 6 ਦਿਨਾਂ ਲੰਬੀ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਦਾ ਉਦਘਾਟਨ ਕੀਤਾ। ਮੁੱਖ ਮਹਿਮਾਨ ਜੋਇੰਟ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਜਨਰਲ ਡੀਜੀਸੀਏ ਸ਼੍ਰੀ ਮਨੀਸ਼ ਕੁਮਾਰ, ਗੈਸਟ ਆਫ ਆਨਰ ਸ੍ਰੀ ਕੇ. ਤੁਲਸੀਰਾਮਨ, ਡਾਇਰੈਕਟਰ (ਏ.ਈ.), ਡੀ.ਜੀ.ਸੀ.ਏ., ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ PEC ਦੇ ਡਾਇਰੈਕਟਰ, ਪ੍ਰੋ. (ਡਾ.) ਬਲਦੇਵ ਸੇਤੀਆ ਜੀ ਨੇ ਆਪਣੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਨਾਲ ਇਸ ਮੌਕੇ ਦਾ ਆਨੰਦ ਮਾਣਿਆ।

ਪ੍ਰੋ: ਐੱਸ.ਕੇ. ਸਿੰਘ, ਸਿਵਲ ਇੰਜੀਨੀਅਰਿੰਗ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਕਾਰਜਕਾਰੀ ਐਚ.ਓ.ਡੀ., ਰਜਿਸਟਰਾਰ ਕਰਨਲ ਆਰ.ਐਮ.ਜੋਸ਼ੀ ਅਤੇ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਦੇ ਕੋਆਰਡੀਨੇਟਰ ਡਾ.ਹਰਅੰਮ੍ਰਿਤ ਸਿੰਘ ਸੰਧੂ ਸਮੇਤ ਸੰਸਥਾ ਦੇ ਸਮੂਹ ਫੈਕਲਟੀ ਮੈਂਬਰ ਅਤੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਵੀ ਇਸ ਮੌਕੇ ਹਾਜ਼ਰ ਸਨ। ਇਹ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਡਰੋਨ ਅਸੈਂਬਲੀ, ਫਲਾਇੰਗ ਤਕਨੀਕਾਂ, ਅਤੇ ਡਰੋਨ ਇਮੇਜ ਪ੍ਰੋਸੈਸਿੰਗ ਵਿੱਚ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਪੈਦਾ ਕਰਨ ਅਤੇ ਪ੍ਰੈਕਟੀਕਲ ਸਕਿੱਲਸ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਲਈ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਭਾਗੀਦਾਰਾਂ ਨੂੰ ਡਰੋਨਾਂ ਦੀ ਵਿਆਪਕ ਸਮਝ ਦੀ ਪੇਸ਼ਕਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ। NESAC, IIRS, SOI, IITs, DGRE ਅਤੇ ਇੰਡਸਟਰੀ ਦੇ ਬੁਲਾਰੇ ਐਡਵਾਂਸ ਮੈਪਿੰਗ ਵਿੱਚ ਡਰੋਨ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨ 'ਤੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਅਤੇ ਰੌਸ਼ਨੀ ਪਾਉਣ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ।

ਡਾ.ਸੰਧੂ ਨੇ ਆਪਣੇ ਸੰਬੋਧਨ ਵਿੱਚ ਪੀ.ਈ.ਸੀ ਕੈਂਪਸ ਵਿਖੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਰਾਜਾਂ ਤੋਂ ਆਏ ਪ੍ਰਤੀਯੋਗੀਆਂ ਦਾ ਸਵਾਗਤ ਕੀਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਬਾਰੇ ਵੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ। ਇਹ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਡਰੋਨ ਅਸੈਂਬਲੀ, ਫਲਾਇੰਗ ਅਤੇ ਇਮੇਜ ਪ੍ਰੋਸੈਸਿੰਗ, ਡਰੋਨ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨਾਂ ਦੇ ਵਿਆਪਕ ਗਿਆਨ ਵਿੱਚ ਵਿਹਾਰਕ ਸੂਝ ਨੂੰ ਉਜਾਗਰ ਕਰੇਗੀ ਅਤੇ ਮਾਹਰਾਂ ਅਤੇ ਪੇਸ਼ੇਵਰਾਂ ਨਾਲ ਨੈਟਵਰਕਿੰਗ ਮੌਕਿਆਂ ਵਜੋਂ ਕੰਮ ਕਰੇਗੀ।

ਪ੍ਰੋ: ਐੱਸ.ਕੇ. ਸਿੰਘ ਜੀ, ਨੇ ਕਿਹਾ, ਕਿ ਡਰੋਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਅੱਜਕੱਲ੍ਹ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਤਕਨੀਕ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਮੈਡੀਕਲ, ਇੰਜਨੀਅਰਿੰਗ, ਆਈ.ਟੀ., ਏ.ਆਈ., ਫੌਜ ਅਤੇ ਹੋਰ ਰੱਖਿਆ ਬਲਾਂ ਦੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ, ਇਹ ਸਾਰੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਉਦੇਸ਼ਾਂ ਲਈ ਡਰੋਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਉਪਯੋਗਤਾ ਦਿਨੋਂ-ਦਿਨ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਡਰੋਨ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨਾਂ ਰਾਹੀਂ ਅਗਾਊਂ ਮੈਪਿੰਗ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਵੀ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰੇਗੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਇਸ ਮੌਕੇ 'ਤੇ ਹਾਜ਼ਰੀ ਭਰਨ ਲਈ ਸਮੂਹ ਮਹਿਮਾਨਾਂ ਦਾ ਦਿਲੋਂ ਧੰਨਵਾਦ ਕੀਤਾ।

PEC ਦੇ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਪ੍ਰੋ.(ਡਾ.) ਬਲਦੇਵ ਸੇਤੀਆ ਜੀ ਨੇ ਇਸ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਦੇ ਆਯੋਜਨ ਲਈ ਵਿਭਾਗ ਦੀ ਸ਼ਲਾਘਾ ਕੀਤੀ। ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਦੌਰ ਵਿੱਚ ਡਰੋਨਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ 'ਤੇ ਚਾਨਣਾ ਪਾਇਆ। ਇਸਦੇ ਬਾਅਦ, ਇਹ ਹਾਲ ਹੀ ਦੇ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਤੇਜ਼ ਰਫ਼ਤਾਰ ਨਾਲ ਐਡਵਾਂਸਡ ਸਕੇਲੇਬਿਲਟੀ ਵੱਲ ਬਦਲ ਗਿਆ ਸੀ। ਡਰੋਨਾਂ ਨੇ ਸਭ ਤੋਂ ਛੋਟੇ ਤੋਂ ਦੂਰ ਦੇ ਖੇਤਰਾਂ ਨੂੰ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਕਵਰ ਕਰਨਾ ਸੰਭਵ ਬਣਾਇਆ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਓਲੀਵਰ ਅਤੇ ਵਿਲਬਰ ਬ੍ਰਦਰਜ਼ ਦੁਆਰਾ 1903 ਵਿੱਚ 12 ਸਕਿੰਟਾਂ ਦੀ ਪਹਿਲੀ ਉਡਾਣ ਦੀ ਕਹਾਣੀ ਵੀ ਸਾਂਝੀ ਕੀਤੀ। ਅੰਤ ਵਿੱਚ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਇੱਕ ਵਾਰ ਫਿਰ ਵਿਭਾਗ ਨੂੰ ਵਧਾਈ ਦਿੱਤੀ ਅਤੇ PEC ਦੇ ਵਹਿੜੇ 'ਤੇ ਆਏ ਮਹਿਮਾਨਾਂ ਦਾ ਸਵਾਗਤ ਕੀਤਾ।

ਗੈਸਟ ਆਫ ਆਨਰ, ਸ਼੍ਰੀ ਕੇ. ਤੁਲਸੀਰਾਮਨ ਨੇ ਡਰੋਨਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਬਾਰੇ ਆਪਣੀ ਸੂਝ ਸਾਂਝੀ ਕੀਤੀ। ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਸਮੇਂ ਦੇ ਨਾਲ ਡਰੋਨ ਦੇ ਪਰਿਵਰਤਨ, ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਸੀਮਾ, ਨਾਜ਼ੁਕ ਤਕਨੀਕੀਤਾਵਾਂ, ਪ੍ਰਭਾਵ ਦੇ ਨਾਲ ਸੁਰੱਖਿਆ ਨੂੰ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਬਾਰੇ ਵੀ ਗੱਲ ਕੀਤੀ। ਅੰਤ ਵਿੱਚ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ, ਕਿ ਡਰੋਨ ਇੱਕ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਸੰਦ ਹਨ ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਕਾਫੀ ਹੱਦ ਤੱਕ ਚੰਗੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ।

ਮੁੱਖ ਮਹਿਮਾਨ ਜੋਇੰਟ ਡੀਜੀ (ਡੀਜੀਸੀਏ) ਸ਼੍ਰੀ. ਮਨੀਸ਼ ਕੁਮਾਰ, ਆਪਣੇ ਅਲਮਾ-ਮਾਟਰ 'ਤੇ ਵਾਪਸ ਆ ਕਾਫੀ ਯਾਦਾਂ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਹੋਈਆਂ। ਉਹ ਏਰੋਸਪੇਸ ਇੰਜੀਨੀਅਰਿੰਗ ਵਿਭਾਗ ਦੇ 1989 ਬੈਚ ਦੇ ਸੰਸਥਾਨ ਦਾ ਸਾਬਕਾ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਹਨ। ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਵਪਾਰਕ ਅਧਾਰ 'ਤੇ ਡਰੋਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ, ਏਰੋਸਪੇਸ ਦੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ, ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਵਿੱਚ, ਵੱਖ-ਵੱਖ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੀਆਂ ਰੱਖਿਆ ਬਲਾਂ ਦੁਆਰਾ ਵਰਤੋਂ 'ਤੇ ਚਾਨਣਾ ਵੀ ਪਾਇਆ।

ਸਿਵਲ ਇੰਜੀਨੀਅਰਿੰਗ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ, ਡਰੋਨ ਐਡਵਾਂਸ ਮੈਪਿੰਗ ਵਿੱਚ ਵੀ ਡਰੋਨ ਮਦਦ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ। ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਇਹ ਵੀ ਕਿਹਾ, ਕਿ ਸਾਰੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਆ ਅਤੇ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ, ਡਿਜ਼ਾਈਨ ਵਿਚਾਰ ਅਤੇ ਸੰਚਾਲਨ ਦੇ ਵਿਚਾਰਾਂ ਪ੍ਰਤੀ ਇੱਕ ਸਮਾਨ ਪਹੁੰਚ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਡੀਜੀਸੀਏ ਕੋਲ ਡਰੋਨਾਂ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਅਤੇ ਸੁਰੱਖਿਆ ਨੂੰ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਡਰੋਨਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਲਈ ਨਿਯਮਾਂ ਦਾ ਇੱਕ ਸੈੱਟ ਹੈ।

ਅੱਜ ਸਾਡੇ ਕੋਲ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਅੰਦਰ 30 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਤੱਕ ਵਜ਼ਨ ਵਾਲੇ ਡਰੋਨ ਵੀ ਹਨ। ਅੰਤ ਵਿੱਚ, ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਕਿਹਾ, ਕਿ "ਇਹ ਸਿਰਫ਼ ਇੱਕ ਤਕਨੀਕੀ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨੀ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਇਹ ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਨਤੀਜੇ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦਾ ਹੈ."  ਪੀਈਸੀ ਦੀ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਵਿਰਾਸਤ ਅਤੇ ਇਤਿਹਾਸ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦੀ ਇੱਕ ਡਾਕੂਮੈਂਟਰੀ ਵੀ ਹਾਜ਼ਰ ਸਰੋਤਿਆਂ ਨੂੰ ਦਿਖਾਈ ਗਈ। ਉਦਘਾਟਨੀ ਸੈਸ਼ਨ ਧੰਨਵਾਦ ਦੇ ਮਤੇ ਨਾਲ ਸਮਾਪਤ ਹੋਇਆ। ਡਾਇਰੈਕਟਰ, ਪੀ.ਈ.ਸੀ. ਵੱਲੋਂ ਮਹਿਮਾਨਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਸਨਮਾਨਿਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ।

 

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