आप पार्टी के नेता शहीदी जोड़ मेले में टोपीयों के साथ हुए शामिल
मौका प्रस्त नेताओं ने अपने गैरविश्वासी स्वभाव का परिचय दिया: सिरसा
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नई दिल्ली 29-Dec-2015
गुरु गोबिन्द सिंह जी के छोटे साहिबजादे एवं माता गुजर कौर जी के शहीदी जोड़ मेले के अवसर पर आम आदमी पार्टी द्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में की गई राजनीतिक कांफ्रैस के मकसद पर शिरोमणी अकाली दल ने सवाल खड़े किये हैं। धार्मिक बेअदबी का दावा करते हुए दल के पूर्व विधायक एवं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा ने इस कांफ्रैस में शामिल हुए गैरसिखों द्वारा सिर पर पार्टी की टोपीया पहन कर शामिल होने को महान शहादतो को नतमस्तक होने की बजाये पार्टी के प्रचार के लिए राजनीतिक लाभ लेने के साथ भी जोड़ा।सिरसा ने बिना शक कांफ्रैंस में शामिल हुए कार्यकर्ताओ के पूरे पंजाब से आने का दावा करते हुए कार्यकर्ताओ को शहादतो को नमन करने की बजाये राजनीतिक लाभ लेने के लिए बुलाने का भी आप नेताओं पर आरोप लगाया। आम आदमी पार्टी के नेताओं की इस गलती को बड़ी भूल एवं सिख इतिहास में इस तरह की मिसाल ना मिलने का भी सिरसा ने दावा किया। सिरसा ने उक्त बेअदबी के लिए पार्टी के संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को सिख कौम से माफी मांगने की भी मांग की।
सिरसा ने आरोप लगाया कि जब सारी कौम इन महान शहादतो को नतमस्तक हो रही थी उस वक्त आप के कार्यकर्ताओ शहादतों पर राजनीति करके राजनीतिक सीढ़ी चढ़कर 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव जीतने का दिवस्वप्न ले रहे थे।कांफ्रैंस में मौजूद पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह द्वारा की गई राजनीतिक ब्यानबाजी पर भी सिरसा ने सवाल खड़े किये। सिरसा ने सवाल किया कि पार्टी नेता वहां पर साहिबजादो की बड़ी शहादत पर गुरुघर को नतमस्तक होने आये थे या राजनीतिक स्वार्थो की पूर्ति के लिए पंजाब सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए आये थे ? संजय सिंह के नेतृत्व में टोपीयों की झांकी शहीदी जोड़ मेले में निकलने को सिरसा ने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे आप की भावी विधानसभा चुनाव की प्रचार मुहिम से भी जोड़ा।सिरसा ने इतिहासिक जोड़ मेले को आप द्वारा राजनीतिक राजधानी के रूप में बदलने को आप की सिख धर्म के प्रति तिरस्कारी सोच के तौर पर भी परिभाषित किया। सिरसा ने कहा कि सारी दुनिया जानती है कि आम आदमी पार्टी में मौकाप्रस्त नेताओं का बड़ा झुण्ड बैठा है पर जिस तरीके से राजनीतिक स्वार्थ के लिए इन्होंने सिख धर्म के सिद्धांन्तों को इस्तेमाल किया है वह हैरानीजनक होने के साथ ही इनके गैरविश्वासी स्वभाव पर भी फिट बैठता है। कांफ्रैंस में शामिल पार्टी के सिख नेताओं द्वारा इस बेअदबी के खिलाफ आवाज ना उठाने को भी सिरसा ने पदलोलपुता से भी जोड़ा।