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धान की खरीद के स्टॉक की फिजिकल वैरिफिकेशन आगामी दो सप्ताह में पूरी की जाएगी : मनोहर लाल

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चंडीगढ़ 30-Nov-2015

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज हरियाणा विधानसभा में चल रहे शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन में घोषणा की कि चालू खरीफ  खरीद के दौरान मंडियों में की गई धान की खरीद के स्टॉक की फिजिकल वैरिफिकेशन जिला स्तर पर प्रधान सचिव स्तर के अधिकारियों द्वारा आगामी दो सप्ताह में पूरी की जाएगी। मुख्यमंत्री, जो सदन के नेता भी हैं, ने यह घोषणा विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला व इनेलो के जाकिर हुसैन, जसविंद्र सिंह संधू, परमिंदर सिंह ढूल व नसीम अहमद द्वारा दिए गये ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर हुई चर्चा के बाद की। मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि जिस प्रकार अम्बाला, पेहोवा, इस्माइलाबाद व पलवल में गेहूं गोदामों में भण्डारण की करोड़ों रुपयों की गड़बड़ी पकड़ी है।

 ठीक उसी प्रकार धान खरीद में भी चावल मिलरों के स्टॉक की वास्तविक जांच की जाएगी और इसकी जांच जिला स्तर पर प्रधान सचिव स्तर के अधिकारियों द्वारा की जाएगी। हालांकि धान खरीदने में अनियमितताओं के बारे अब तक किसी भी किसान ने आढ़ती के खिलाफ कोई शिकायत नहीं दी है। हर साल धान की खरीद होती है और धान की खरीद सरकारी एजेंसियों की ओर से चावल मिल मालिकों द्वारा की जाती है, जिनके लिये आवश्यक कोटा निर्धारित किया जाता है। किसान कम्बाइण्ड से विशेषकर रात में धान की कटाई करने उपरांत जल्दबाजी में अपनी उपज बेचने के चक्कर में 17 प्रतिशत से अधिक नमी के साथ मण्डी में ले आते हंै। भविष्य में कम्बाइन मशीन में ड्रायर लगाने की विधि विकसित करने के लिए कृषि इंजीनियरों को कहा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं करनाल मंडी में दौरा किया था और दो ढेरियों में नमी की जांच करवाई गई थी जो 24 व 23.5 प्रतिशत पाई गई थी। आढ़ती व किसान के बीच अधिक नमी के कारण कटौती की सहमति हमेशा से ही बनती आ रही है। उन्होंने कहा कि पहली बार 1509 पूसा धान की खरीद 1450 रुपये प्रति क्विण्टल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई, क्योंकि इसका बाजारी भाव 900 रुपये तक गिर गया था। सरकार ने 1.72 लाख मीट्रिक टन पूसा 1509 धान की खरीद की है, जबकि मिलरों द्वारा 4.28 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की है।

मुख्यमंत्री ने सदन को इस बात से अवगत करवाया कि पूसा-1509 की खरीद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा 66,000 मीट्रिक टन, हैफेड द्वारा 68,000 मीट्रिक टन, हरियाणा कृषि उद्योग निगम द्वारा 13,000 मीट्रिक टन तथा हरियाणा भण्डागार निगम द्वारा 25,000 मीट्रिक टन की गई है। उन्होंने बताया कि मिलर को एक क्विंटल पर 67 किलोग्राम चावल एफसीआई को देना होता है, जबकि पूसा-1509 में टूट के कारण एक क्विंटल पर 62 किलोग्राम चावल देना होता है।मुख्यमंत्री ने सदन को इस बात से भी अवगत करवाया कि जिन मिलरों द्वारा 30 नवम्बर तक 20 प्रतिशत चावल की आपूर्ति नहीं की है उनकी 15 दिनों के अन्दर-अन्दर जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष चावल आपूर्ति न करने की एवज में 41 मिलरों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। वर्तमान में हरियाणा में लगभग 750 राइस सैलर हैं। 

मुख्यमंत्री ने सभी पार्टियों के सदस्यों से आग्रह किया कि वे यदि सहमत हैं तो भविष्य में धान की अलग-अलग तीन किस्मों नामत: बासमति, पूसा व ग्रेड-ए के लिए अलग-अलग न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित हों, इसके लिए केन्द्र सरकार को पत्र लिखा जाए। मुख्यमंत्री ने सदन को इस बात से अवगत करवाया कि भारतीय खाद्य निगम की ओर से खरीद एजेंसियों द्वारा की जाती है। उन्होंने कहा कि पूसा 1509 धान की खरीद समय पर की गई थी और किसानों को इसका उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की मंडियों में खरीद प्रबन्धन पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर है और उत्तर प्रदेश, पंजाब व राजस्थान के किसान भी हरियाणा की मंडियों में आते हैं। उन्होंने कहा कि पहले खरीद हरियाणा के किसानों की होती है, बाद में भले ही अन्य राज्यों के किसानों की होती है। उन्होंने कहा कि अक्तूबर 2010 की किसान द्वारा एक आढ़ती को बेची गई धान की रसीद का ब्यौरा भी दिया जिसमें नमी कट व अन्य कटोतियों का भी विवरण था। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार के भ्रष्टïाचार को सहन नहीं करेंगे चाहे वह नेताओं का हो, अधिकारियों का हो, कर्मचारियों का हो या जनता का हो। भ्रष्टïचार के इस चक्र को तौडऩा उनकी सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री के इस व्यक्तव्य पर सदस्यों ने मेजें थपथपाकर उनका समर्थन किया। प्रस्ताव से जुड़ते हुए खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री श्री काम्बोज ने कहा कि हमेशा से ही  धान को नमी की कटौती के आधार पर खरीदा जाता रहा है परन्तु हमारी सरकार ने किसानों के हितों को देखते हुए ज्यादा नमी वाली धान को सुखाने के लिए मंडियों में किसानों को झरना व पंखे की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इससे काफी किसान लाभ भी उठा रहे हैं इसके बावजूद भी यदि किसान नमी वाली धान को बेचने की जल्दी करता है तो उस पर आढती व किसान के बीच सहमति होती है। किसानों की मांग को देखते हुए इस बार सरकार ने धान खरीद का कार्य एक अक्तूबर की बजाय 24 सितम्बर से शुरू किया। इससे किसानों को उनकी फसल बेचने में कोई परेशानी नही आयी।