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भारतीय संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं कि बिना पढ़े-लिखे व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकते : डॉ. अशोक तंवर

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करनाल 20-Aug-2015

हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. अशोक तंवर ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों हेतु शैक्षणिक योग्यता ग्रामीण लोगों खासकर दलितों और महिलाओं के खिलाफ सरकारी साजिश है। डॉ. तंवर आज करनाल के सेक्टर-12 में राजीव गांधी पंचायती राज संगठन द्वारा दिए गए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जन्मदिन पर एक दिवसीय सांकेतिक धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व डॉ. अशोक तंवर सहित अन्य लोगों ने भारत रत्न राजीव गांधी की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित की और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त को एक ज्ञापन भी सौंपा। धरनास्थल पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए डॉ. तंवर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को चुनाव लडऩे का अधिकार है। भारतीय संविधान में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि बिना पढ़े-लिखे व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकते। 

उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी को ऐसा लगता है कि यह उनका ऐतिहासिक फैसला है तो वे इस मामले में जनमत संग्रह करवाए जिससे उनके सामने स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। डॉ. तंवर ने कहा कि प्रदेश की बीजेपी सरकार राजस्थान की तर्ज पर पंचायती राज चुनाव में शैक्षणिक योग्यता की शर्त लगा रही है जबकि सरकार को इन फैसलों का हश्र देख लेना चाहिए। राजस्थान में शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने के बाद सैंकड़ों पंचायतें प्रतिनिधियों से वंचित रह गई जबकि सरकार के इस तुगलकी फरमान से उम्मीदवारों ने फर्जी प्रमाण पत्र तक बनवाए। बाद में उन्हें जेलों की हवा खानी पड़ी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले की तरह यह भी एक बड़ा घोटाला बन सकता है। आज हरियाणा में राजस्थान और गुजरात मॉडल की आवश्यकता नहीं है। सरकार हरियाणा की जरूरत के मुताबिक नीतियां और फैसले लागू करे ताकि हरियाणा प्रदेश के लोगों को उनकी तासीर का राज मिल सके। उन्होंने कहा कि जब शैक्षणिक योग्यता का नियम राजस्थान में लागू हुआ तो 70 फीसदी लोग पंचायत चुनावों में जबकि 65 प्रतिशत से अधिक लोग जिला परिषद का चुनाव लडऩे से वंचित रह गए। इस तरह के असंवैधानिक और तुगलकी फरमान का कांग्रेस पार्टी विरोध करती है। 

डॉ. तंवर ने कहा कि हरियाणा में जमीनी लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। राजीव गांधी 64वां संशोधन लेकर आए और 1989 में यही 73वें व 74वें संशोधन का भी आधार बना। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश में पंचायती राज को सशक्त तरीके से लागू करने का सपना राजीव गांधी ने देखा था और उन्हीं के प्रयासों से 15 मई 1989 को लोकसभा में संविधान का 64वां संशोधन पेश किया। हालांकि उनके जीवनकाल में यह संभव नहीं हो पाया लेकिन 1992 में उन्हें श्रद्धांजलि के रूप में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने 73वें संवैधानिक संशोधन में एकमत से यह कानून पारित कर दिया। स्व. राजीव गांधी ने संवैधानिक संशोधन में पंचायतों को मजबूती प्रदान करने के लिए सामाजिक योग्यता को लागू किया था। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार शिक्षित और अशिक्षित वर्गों को आपस में बांटने की कोशिश कर रही है जो होने नहीं दिया जाएगा। इस फैसले के बाद हरियाणा के अशिक्षित लोगों को हीन भावना का शिकार होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले 15-20 साल तक ऐसी व्यवस्था नहीं हो पाएगी कि चुनाव लडऩे के इच्छुक लोगों को शैक्षणिक योग्यता के दायरे में लिया जा सके। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जब सांसद और विधायक का चुनाव लडऩे के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं की गई है तो फिर महज पंचायतों के लिए ही यह शर्त किसलिए रखी जा रही है। इस तरह के नियमों का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर उम्मीदवार नहीं मिल पाएंगे। उन्होंने करनाल के एक गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार के इस तरह के शैक्षणिक योग्यता का नियम लागू करने से महज एक ही व्यक्ति सामने आया है जो दसवीं पास है अन्यथा बाकी उम्मीदवार पढ़े-लिखे हैं ही नहीं। यही हालात राजस्थान में भी देखे गए और अधिकतर पंचायतें अनिवार्यता लागू करने के बाद खाली हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 20 वर्ष से अधिक आयु की 81 प्रतिशत महिलाएं और 60 प्रतिशत पुरुष 8वीं और दसवीं पास की योग्यता को पूरा नहीं करते। ऐसे में प्रदेश सरकार का यह कदम दलित और महिला विरोधी कहा जाएगा।