बी.बी.एल. बुटेल ने राष्ट्रमण्डल संसदीय सम्मेलन में भाग लिया
5 दरिया न्यूज
शिमला 05-Sep-2013
हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री बी.बी.एल. बुटेल ने कहा कि भूमि आर्थिक संसाधन है और वैयक्तिक एवं सामुहिक पहचान बनाने तथा सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक जीवन के दैनिक प्रबन्धन में यह महत्वपूर्ण कारक है। श्री बुटेल आज दक्षिण अफ्रीका के जोहेन्सबर्ग में आयोजित 59वें राष्ट्रमण्डल संसदीय सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने ‘लैंड एक्सेस एंड ऑनरशिपः प्रोग्रेस एंड चैलेंजिज एक्सपीरियंसड बाय रूरल कम्युनिटीज इन एसेसिंग लैंड। वट वुड बी दी रोल एंड इंटरवेंशन ऑफ पार्लियामेंटेरियनस?’ विषय पर विचार विमर्श किया।श्री बुटेल ने कहा कि सभी ग्रामीण समितियों एवं कृषि आर्थिकियों की लिए भू पहुंच एवं स्वामित्व के मामले महत्वपूर्ण है। हाल के समय में समूचे विश्व में जनसंख्या वृद्धि, खाद्य वस्तुओं के ऊंचे दाम, मौसम में बदलाव के प्रभाव, व्यापार समझौते, वैश्विक उपभोक्ता एवं कारपोरेट आधारित खाद्य प्रणाली, कृषि ईंधन एवं चारे की बढ़ती मांग के कारण भूमि के लिए प्रतियोगिता बढ़ी है तथा स्वामित्व पर काफी दबाव है। उन्होंने कहा कि इस कारण भू-पहुंच तथा स्वामित्व के मामलों पर ज्यादा ध्यान गया है।अध्यक्ष ने कहा कि भू-पहुंच तथा स्वामित्व के कारण ग्रामीण आर्थिकी की संभावनाओं और दिनचर्या पर प्रभाव पड़ता है। इससे फसल उत्पादन के निर्णय भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि इससे किसानों द्वारा उत्पादन सुधार, सत्त प्रबन्धन, नई तकनीक अपनाने एवं नवीनता में निवेश के निर्णयों पर भी प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि मौसम के बदलाव के प्रभावों को कम करने के लिए नवीन कृषि तकनीक को प्रोत्साहन देने अथवा पहनाने के भविष्य के प्रयासों की सफलता भी भू स्वामित्व पर निर्भर करती है।
बुटेल ने कहा कि विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि जब लोगों के पास बराबर एवं भूमि तक सुरक्षित पहुंच होती है तो आर्थिकी वृद्धि की दर अधिक होती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 से 2000 के मध्य 73 देशों की भू-नीतियों का विश्व बैंक द्वारा विश्लेषण करने पर पाया गया कि जिन देशों में भूमि का वितरण बराबर था, वहां वृद्धि उन देशों की अपेक्षा दो से तीन गुणा अधिक थी, जिन देशों में भू वितरण बराबर नहीं था। उन्होंने कहा कि सम भू वितरण त्वरित वृद्धि को बढ़ावा देता है तथा ग्रामीण एवं शहरी गरीबी को कम करता है। उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर प्रति वर्ष पाचं से 10 मीलियन हेक्टेयर कृषि भूमि घटती जा रही है।उन्होंने कहा कि ग्रामीण जनसंख्या की वृद्धि से कृषि योग्य भूमि में वृद्धि होती है, वन भूमि तथा अन्य प्राकृतिक आवासों पर कब्जे की घटनाओं में वृद्धि होती है किन्तु कृषि योग्य भूमि की संख्या घटती है तथा भूमिहीनों की संख्या बढ़ती है।
श्री बुटेल ने कहा कि संसद क्योंकि सर्वोच्च निर्णायक शक्ति है इसलिए आवश्यक विधायन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, बजटीय मांगों की स्वीकृति प्रदान कर सकती है तथा विधि एवं कार्यक्रम कार्यान्वित कर अनुश्रवण कर सकती है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संसदीय समितियों के सदस्यों के रूप में विचार विमर्श का अवसर मिलता है तथा सरकार द्वारा किए जा रहे कामों का अनुश्रवण एवं आकलन सुनिश्चित होता है। विभाग से सम्बन्धित स्थाई समितियों के माध्यम से सदस्यों सीधे प्रशासन के सम्बन्ध में आते हैं और यह सुनिश्चित बनाते हैं कि संसद द्वारा पारित विधि का पूर्ण कार्यान्वयन हो।उन्होंने कहा कि भारत में भूमि तथा भू-प्रबन्धन का विधायन एवं प्रशासकीय नियंत्रण विभिन्न राज्यों का एकाधिकार है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध भूमि के प्रभावी उपयोग के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनेक नवीन भू-सुधार एवं भू-विकास कार्यक्रम आरम्भ किए हैं। राज्य सरकार दैनिक भू-प्रशासन तथा लोगों को समस्यामुक्त भू-सेवाएं प्रदान करने में आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित बना रही है।सीपीए के महासचिव डॉ. डब्ल्यू.एफ.शिज़ा, राष्ट्रमण्डल संसदीय सम्मेलन के महासचिव श्री कमलेश शर्मा ने भी इस सत्र को सम्बोधित किया।