जीएसटी विधेयक लोकसभा पारित
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नई दिल्ली 06-May-2015
देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था लागू करने के प्रावधान वाला संविधान (122वां संशोधन) विधेयक-2014 बुधवार को लोकसभा में पारित हो गया। इससे देश के सभी राज्यों के बाजार एक विशाल बाजार में परिणत हो जाएंगे और कई प्रकार के केंद्रीय और राज्य स्तरीय अप्रत्यक्ष कर एक समान कर व्यवस्था में समाहित हो जाएंगे।विधेयक के पक्ष में 336 और विपक्ष में 11 मत पड़े। मतदान के दौरान 10 सदस्य अनुपस्थित रहे। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि विधेयक जरूरत के मुताबिक दो-तिहाई बहुमत से पारित हुआ है।विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, "पूरा देश एक विशाल बाजार में परिणत हो जाएगा, जो दुनिया की कुल आबादी का छठा हिस्सा है।
इससे व्यापार को मजबूती मिलेगी।" विपक्ष ने विधेयक को संसदीय समिति के हवाले करने की मांग की और वे सदन से बहिर्गमन कर गए।जेटली ने कहा कि करीब 12 साल पहले प्रस्तावित नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से देश की आर्थिक विकास दर दो फीसदी अतिरिक्त बढ़ सकती है। जेटली ने इसे आजादी के बाद सबसे बड़ा कर सुधार बताया।इसके बाद विधेयक को राज्यसभा में भेजा जाएगा। यदि वहां यह दो-तिहाई बहुमत से पारित होता है, तो इसे कम-से-कम आधे राज्यों की विधानसभाओं में भी पारित होना होगा। उस परीक्षा में खरा उतरने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। उसके बाद यह प्रभावी हो जाएगा।
विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष के इस आरोप को गलत बताया कि सरकार सदन को विश्वास में लिए बिना विधेयक में कुछ प्रावधानों में संशोधन कर रही है और इसे संसदीय समिति के हवाले करने से इंकार कर रही है।उन्होंने कहा कि विधेयक में जिन संशोधनों को शामिल किया गया है, उन संशोधनों की सिफारिश मूल विधेयक पर समिति ने पहले ही की है, इसलिए इस मुद्दे पर सरकार को विपक्ष गलत नहीं ठहरा सकता।जेटली ने उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसा ही एक संशोधन है जीएसटी परिषद की स्थापना। जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे और जो विवादों का निपटारा करेगी, न कि उसे सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता वाली समिति के पास भेजा जाएगा।
जेटली ने कहा कि व्यापक विचार विमर्श की प्रक्रिया से विधेयक पर व्यापक सहमति कायम हो चुकी है और इसे समिति के हवाले करने से एक अप्रैल, 2016 से इसे लागू करने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा।इस विधेयक के लागू होने से केंद्र और राज्यों के अधिकतर अप्रत्यक्ष करों का अलग अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, जिसमें उत्पाद शुल्क, सेवा कर, मूल्य वर्धित कर, बिक्री कर, ऑक्ट्रॉय शामिल हैं। इसके लागू होने से कारोबारी देश में कहीं भी अपनी कारोबारी गतिविधियों का विस्तार कर सकेंगे।देश के उद्योग जगत ने ताजा घटनाक्रम पर खुशी जताई।भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "उम्मीद है कि विधेयक वर्तमान सत्र में ही राज्यसभा में भी पारित हो जाएगा।"
जेटली ने कहा, "विधेयक के प्रभावी होने के बाद आगे एक कर के ऊपर दूसरा कर लगाने की परंपरा समाप्त हो जाएगी।"उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में केंद्रीय बिक्री कर को चार फीसदी से घटाकर दो फीसदी किए जाने से राज्यों को हुए नुकसान की भरपाई करने की अनुमति दे दी है। राज्यों को यह भुगतान पांच साल तक किया जाएगा।वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इस पूरी अवधि में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 33 हजार करोड़ रुपये के भुगतान किए जाएंगे।लोकसभा ने राज्यों के बीच व्यापार पर एक फीसदी अतिरिक्त कर लगाने से संबंधित संशोधन को भी मंजूरी दे दी, जिससे राज्यों को कर व्यवस्था के परिवर्तन काल में और मदद की जा सकेगी। मूल विधेयक की भांति पेट्रोलियम उत्पाद, शराब और तंबाकू को फिलहाल इस विधेयक के प्रभाव क्षेत्र से बाहर रखा गया है।