भारतीय सेना में नेताजी के नाम से रेजीमेंट हो : दीपेंद्र सिंह हुड्डा
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कोलकाता 17-Apr-2015
नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी गोपनीय सरकारी फाइलों को सार्वजनिक कराने की कोशिश कर रहे कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने उनके नाम पर सेना के एक रेजीमेंट का नाम रखे जाने का विधेयक पेश किया है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नेताजी के रिश्तेदारों की कथित जासूसी के विवादों के बीच रोहतक से लोकसभा सांसद हुड्डा ने कहा कि बोस और दिवंगत प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बीच मतभेद की बात गलत तरीके से समझी गई है।उन्होंने कहा, "नेताजी की इंडियन नेशनल आर्मी के रेजीमेंटों के नाम गांधी, नेहरू और मौलाना आजाद के नाम पर रखे गए। तो फिर उनके नाम पर भारतीय सेना के रेजीमेंट के नाम क्यों नहीं हो सकते?"
हुड्डा ने इंडियन चैंबर ऑफ कामर्स द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में यहां मीडिया से कहा, "मैंने एक निजी विधेयक पेश किया है, जिसमें भारतीय सेना में बोस के नाम से रेजीमेंट स्थापित करने का प्रस्ताव है।"उन्होंने कहा कि नेहरू और बोस के बीच कोई होड़ नहीं थी, बल्कि उनकी आर्थिक नीतियां एक जैसी थीं। हुड्डा ने कहा, "बोस-नेहरू के बीच मतभेद की बात गलत तरीके से समझा गया है और इसकी कोई जरूरत नहीं है। सच्चाई यह है कि दोनों नेता आर्थिक नीतियों पर समान राय रखते थे और समाजवाद के लिए लड़े। वह सरदार पटेल थे, जिन्होंने बोस का विरोध किया था।"उन्होंने जासूसी प्रकरण पर कुछ कहने से इंकार करते हुए कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए सभी गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि लेखक और शोधकर्ता अनुज धर को मिले दस्तावेज के अनुसार, बोस के करीबी रिश्तेदारों -उनके दो भतीजों शिशिर कुमार बोस और अमीय नाथ बोस- की 1948 से 1968 के बीच जासूसी की गई थी। जवाहर लाल नेहरू इन 20 वर्षो में से 16 साल तक प्रधानमंत्री थे।