5 Dariya News

भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी में आडवाणी का संबोधन नहीं

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बेंगलुरू 04-Apr-2015

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में संभवत: एक युग का समापन हो गया। शनिवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का समापन हो गया लेकिन उसमें पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रह चुके कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी के दो शब्द भी नहीं गूंज पाए। पार्टी के नेता हालांकि बार-बार यही दोहराते रहे कि आडवाणी 'मार्गदर्शक' हैं जिन्होंने राह दिखाई है। यह दूसरा अवसर है जब आडवाणी ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कुछ भी कहना मुनासिब नहीं समझा है। आडवाणी उन नेताओं में से एक हैं जिन्होंने 1980 में पार्टी की स्थापना में अग्रणी भूमिका निभाई थी।संस्थापक नेता आडवाणी 1980 से पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सभी बैठकों में अपना उद्गार व्यक्त करते रहे हैं। वर्ष 2013 में गोवा में हुई बैठक से तब उन्होंने दूरी बना ली जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पार्टी में कुछ इस तरह का पद देने की तैयारी कर ली गई थी जिससे उनके प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने का रास्ता साफ हो सके। तब आडवाणी ने बैठक में हिस्सा भी लेना मुनासिब नहीं समझा।

इस बार आडवाणी दो दिनों की बैठक में मौजूद तो रहे ही बेंगलुरू में आयोजित सार्वजनिक सभा के दौरान भी वे आसीन नजर आए। फिर भी इस नेता ने किसी भी मौके पर एक शब्द बोलना मुनासिब नहीं समझा।पार्टी के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बात की पुष्टि तो कर दी कि आडवाणी ने कुछ नहीं बोला, पर इसके पीछे कारण क्या था इसके बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया।यह पूछने पर कि आडवाणी को वक्ताओं की सूची से बाहर रखने की भूमिका आखिर किसने निभाई, जेटली ने जवाब दिया, "जो भी इंतजाम किया गया (बैठक के लिए) वह पूरी पार्टी से विमर्श करने के बाद ही किया गया।"यह पूछने पर कि क्या पार्टी मशहूर नेता के संबोधन की आवश्यकता नहीं समझती, या उन्होंने खुद को दूर कर लिया है? इसका जवाब देते हुए जेटली ने कहा, "पार्टी में फैसले लेने की प्रक्रिया में क्या कुछ हवा हो गया इसके बारे में किसी को कुछ नहीं बताया जा सकता।"उन्होंने कहा, "आडवाणी जी हमारे वरिष्ठ नेता हैं वे जब भी चाहेंगे हमें संबोधित कर सकते हैं।"

पार्टी के एक नेता ने अपना नाम जाहिर नहीं होने देने की शर्त पर बताया कि आडवाणी जी ने ही संबोधित नहीं करने का फैसला लिया।आडवाणी देश के कद्दावर नेताओं में से एक माने जाते हैं और अटलबिहारी वाजपेयी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में वे उपप्रधानमंत्री थे। वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में वे भाजपा और राजग की तरफ से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी थे। पार्टी में भाषण देने से अलग रहना तो और बात है, अमित शाह द्वारा कमान संभालने के बाद आडवाणी को संसदीय बोर्ड सहित सभी महत्वपूर्ण भूमिकाओं से पृथक किया जा चुका है।