नीतीश को अदालत से झटका, राष्ट्रपति से मिले
5 Dariya News
नई दिल्ली 11-Feb-2015
बिहार में मचे सियासी घमासान ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। पटना उच्च न्यायालय ने राज्यपाल का फैसला होने तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देकर नीतीश कुमार को जनता दल (युनाइटेड) के विधायक दल का नेता चुने जाने पर अस्थायी रोक लगा दी है। उधर नई दिल्ली में समर्थक 130 विधायकों के साथ नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की और उनके सामने अपना पक्ष रखा। अदालत ने नीतीश कुमार को नेता चुने जाने के खिलाफ दायर याचिका पर यह आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी। इस बीच अपना पत्ता खोलते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि असली जद (यू) जीतन राम मांझी चला रहे हैं। भाजपा की प्रदेश इकाई के मुख्य प्रवक्ता विनोद नारायण झा ने बुधवार को कहा कि असली जद (यू) मांझी चला रहे हैं। उन्होंने नीतीश कुमार पर हमला करते हुए कहा कि हॉर्स ट्रेडिंग कर नीतीश विधायकों को दिल्ली ले गए हैं। इधर, विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता नंदकिशोर यादव ने कहा, "नीतीश को दिल्ली का परिणाम दिख रहा है, लेकिन उन्हें बिहार के पड़ोसी राज्य झारखंड का चुनाव परिणाम नहीं दिख रहा है।"इस बीच मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी समर्थक और काराकाट के विधायक राजेश्वर राज की ओर से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुने जाने को चुनौती देते हुए नौ फरवरी को पटना उच्च न्यायालय में दायर याचिका पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।
राज के अधिवक्ता एस. बी. के. मंगलम ने बताया कि पटना उच्च न्यायालय ने याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि राज्यपाल के निर्णय के पूर्व यथास्थिति बनाए रखा जाए। न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सदन के नेता को मान्यता देने पर भी प्रश्न उठाया है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी। मांझी शुरू से ही विधायक दल के नेता के चुनाव को असंवैधानिक बता रहे थे। सात फरवरी को जद (यू) विधायक दल की बैठक में नीतीश को नया नेता चुना गया था। सोमवार को नीतीश कुमार ने समर्थक विधायकों के साथ राजभवन जाकर समर्थन पत्र सौंपते हुए सरकार बनाने का दावा पेश किया था और कहा था कि यदि 24 घंटे के भीतर फैसला नहीं सुनाया गया तो वे समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली रवाना होंगे और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेंगे।
राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी की ओर से फैसला सामने नहीं आने पर नीतीश सभी समर्थक विधायकों के साथ मंगलवार शाम हवाई जहाज से दिल्ली रवाना हो गए और बुधवार शाम राष्ट्रपति से मुलाकात की। समाजवादी पार्टी सांसद मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में विधायकों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। मुलाकात के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा कि हमने सारे सबूत के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात की और उनसे इस संबंध में शीघ्र फैसला लेने का निर्देश राज्यपाल को देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि फैसला लेने में देरी से माहौल बिगड़ रहा है और यह भाजपा की चाल है ताकि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की परिस्थितियां निर्मित हो जाए।प्रतिनिधि मंडल में शामिल लालू प्रसाद ने भी भाजपा की आलोचना की। विधायकों का यह दल जदयू अध्यक्ष शरद यादव के आवास से रवाना हुआ था। नीतीश कुमार के समर्थक 130 विधायकों में जद (यू) के 99, राजद के 24, कांग्रेस के पांच, भाकपा के एक और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं।
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में वर्तमान समय में 10 सीट रिक्त है। बहुमत साबित करने के लिए कुल 117 विधायकों की संख्या आवश्यक है। इस्तीफा नहीं देने और सदन में बहुमत साबित करने पर अड़े मुख्यमंत्री मांझी को भाजपा से समर्थन की आस है। भाजपा के पास 87 विधायक हैं और इसके अतिरिक्त तीन निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन मांझी के पक्ष में है। वैसे अब राष्ट्रपति और राज्यपाल के फैसले की प्रतीक्षा है।इधर, मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का कहना है कि राज्यपाल जब कहंेगे विधानसभा में बहुमत साबित कर देंगे। मुख्यमंत्री का पद छोड़ने से इंकार करने वाले मांझी को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के लिए जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने पार्टी से निष्कासित कर दिया। मांझी को रविवार को ही पार्टी विधायकों की बैठक में जद (यू) विधायक दल के नेता पद से बर्खास्त कर दिया गया था। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने विधायक दल के नेता के रूप में नीतीश कुमार के चुने जाने की मान्यता अधिसूचित कर दी है।