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अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में 141 वक्ताओं ने पढ़े शोध पत्र

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कुल्लू 23-Sep-2014

‘हिंदी सिनेमा और नारी विषय’ पर कुल्लू के देव सदन में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी बुधवार को संपन्न हुई। इसमें दो विदेशी वक्ताओं सहित देश भर के 141 वक्ताओं ने अपने शोध पत्र पढ़े। संगोष्ठी में वक्ताओं ने ‘हिंदी सिनेमा और नारी’ के अलावा 12 अन्य विषयों पर भी शोध पत्र प्रस्तुत किए।  समापन अवसर पर केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के प्रति कुलपति प्रो. योगिंद्र सिंह वर्मा मुख्यातिथि के रूप में शामिल हुए। प्रो. वर्मा ने कहा कि भारतीय सिनेमा और नारी एक खुला विषय है। जिस के कई पक्षों को उजागर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब सिनेमा में नारी नहीं आती थी। नारी के किरदार को पुरुष कलाकार ही निभाया करते थे। उन्होंने कहा कि सिनेमा ने समाज को कई तरह की कुरीतियां भी दी है और कइयों का खात्मा भी किया है। लेकिन इसका निर्णय दर्शकों ने करना है कि उन्होंने सिनेमा से मनोरंजन के साथ-साथ अच्छी बातें ग्रहण करनी है या बुरी। 

उन्होंने कहा कि जब तक किसी कार्यक्रम या सिनेमा से समाज में क्रांति नहीं आती, उसका कोई औचित्य नहीं है। इसके लिए जुझारूपन की दरकार रहती है और कुल्लू में एक बड़ा आयोजन होना इस दृष्टि से महत्वपूर्ण कहा जा सकता है। मुख्य अतिथ ने इस अवसर पर संगोष्ठी संयोजक डॉ. दयानंद गौतम द्वारा संपादित हिमाचल के गांव पुस्तक का भी विमोचन किया। इसमें प्रदेश के 205 गांवों को स्थान मिला है। मुख्यातिथि ने कहा कि इस तरह की पुस्तकें गांवों की महत्ता को सभी के समक्ष लाती है, जिससे लेखन को बढ़ावा मिलता है। लेखकों को मंच देने व उनकी लेखन क्षमता के हिसाब से पुस्तक काफी महत्वपूर्ण है।

इससे पूर्व महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. यशपाल महंत ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. दयानंद गौतम सहित उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस संगोष्ठी से कुल्लू महाविद्यालय के नाम बढ़ा है। उन्होंने आयोजन में जुटी 20 भिन्न-भिन्न कमेटियों का भी आभार प्रकट किया। संगोष्ठी 8 सत्रों में संपन्न हुई और इसमें देश के हर कोने से वक्ताओं ने उपस्थिति दर्ज करवाई। संगीत विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूरत ठाकुर ने हिंदी सिनेमा में महिला गायकों की भूमिका विषय को महिला सशक्तिकरण को समर्पित किया। उन्होंने पहले सत्र में मंच संचालक की भी भूमिका निभाई। इसके लिए उनकी पीठ भी थपथपाई गई। संगोष्ठी संयेाजक डॉ. दयानंद गौतम ने कहा कि हिंदी विभाग द्वारा यह पहली अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी थी। इसका सफल आयोजन भविष्य में बड़े आयोजनों की रूपरेखा तय करेगी। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषी राज्यों के साथ-साथ दक्षिण से भी कई वक्ताओं ने हिंदी में अपना शोधपत्र पढ़ा।