वीरभद्र सिंह व उसके परिवार के खिलाफ सी.बी.आई जांच निष्पक्ष व जल्द होनी चाहिए : प्रो. प्रेम कुमार धूमल
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शिमला 28-Jul-2014
पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि भाजपा की तीन दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में सभी सदस्यों ने पुरजोर मांग की कि मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह व उसके परिवार के खिलाफ सी.बी.आई जांच निष्पक्ष व जल्द होनी चाहिए । सभी सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि यूपीए सरकार में तो यह जांच धीमी गति से चल रही थी लेकिन अब तो एनडीए की सरकार है । प्रो.धूमल ने कहा कि अभी तो यह जांच ही चल रही है तथा जांच पर ही कार्यवाही निर्भर करेगी । अनौपचारिक वार्ता के दौरान पत्रकारों के एक प्रश्न का जबाब देते हुए प्रो0 धूमल ने कहा कि इस बैठक में केन्द्र से भी पदाधिकारी शामिल थे तथा पारित प्रस्ताव को निश्चित तौर पर केन्द्र सरकार के ध्यान में लाया जायेगा ।
धूमल ने कहा कि प्रदेश में वित्तिय संकट वित्तीय कुप्रबन्धन के कारण हुआ है । प्रदेश सरकार अभी तो हरित विकास (ळतममद क्मअमसवचउमदज) के लिये विश्व बैंक द्वारा जारी ऋण की दूसरी व तीसरी किश्त के सहारे चल रही है लेकिन आने वाले दिनों में यह संकट और भी गहरा जायेगा । पर्यावरण का हाल यह है कि पॉलीथीन का प्रयोग बिना किसी भय के जारी है और जगह - जगह प्लास्टिक के थैलों के ढेर लगे हुए हैं । गाड़ियों के प्रदूषण का कोई चैक नहीं हो रहा है और प्रदूषण मुक्त झूठे प्रमाण पत्र जारी किये जा रहे हैं । यहां तक कि सरकारी गाड़ियां भी अत्यधिक धुआं छोड़ती हैं जिस के कारण दिनों-दिन प्रदूषण बढ़ता जा रहा है लेकिन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है ।
धूमल ने कहा कि सरकार विभिन्न बोर्डों और कार्पारेश्नों के अध्यक्षों/उपाध्यक्षों व अन्य कई औचित्यहीन पदों पर गैर आवश्यक ढंग से नियुक्तियां दे कर सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ा रही है जबकि प्रदेश के विश्वविद्यालयों को अनुदान देने के लिये सरकार के पास पैसे नहीं हैं । नौणी स्थित वानिकी विश्वविद्यालय को भाजपा कार्यकाल में दी जाने वाली 72 करोड़ रूपये की अनुदान राशि घटाकर 48 करोड़ रूपये कर दी गई है । कृषि विश्वविद्यालय समेत दोनों विश्वविद्यालयों के सेवानिवृत कर्मचारियों को पैन्शन व मंहगाई भत्ता नहीं दिया गया है । जो सरकार नियमित कर्मचारियों का वेतन व भत्ते देने में असमर्थ है वह गैर आवश्यक नियुक्तियां प्रदान कर विलासिता की सुविधायें कैसे प्रदान कर रही है, समझ से परे है ।संसाधन जुटाने के लिये सरकार कोई प्रयास नहीं कर रही है और कुछ विशेष वर्गां को रियायत देने की खवरें आ रही हैं । खनन संम्पदा की तस्करी जोरां पर है जबकि प्रदेश के गरीब को मकान बनाने के लिये सामग्री उपलब्ध नहीं हो रही है । यदि सरकार नीलामी की व्यवस्था करे सरकार को कुछ आमदन हो सकती है । पुलिस को गैर कानूनी ड्रग्स, खनिज़ के व्यापार व अन्य अपराधों की रोकथाम के लिये लगाने की अपेक्षा उन्हें राजनीतिक विरोधियों व भाजपा कार्यकर्ताओं के पीछे लगाया है । कहने को तो स्थानान्तरणों पर प्रतिबन्ध है लेकिन हर रोज लम्बी-लम्बी लिस्टें स्थानान्तरणों की निकल रही हैं जिसपर टीए/डीए के कारण वित्तीय बोझ और बढ़ रहा है ।
धूमल ने कहा कि उनके गृह जिला में सरकार के मात्र डेढ वर्ष के कार्यकाल में छठा पुलिस अधीक्षक तैनात हो चुका है और ऐसा ही हाल अन्य जिलों का है। भाजपा सरकार ने घरेलू झगड़े रोकने व बस अड्डों पर अनावश्यक भीड़ को कम करने के लिये लाटरी पर पाबन्दी लगाई थी और ऐसी सामाजिक बुराई पर रोक लगाना सरकार का यह दायित्व भी है । यदि सरकार लाटरी पर लगी रोक को हटाती है तो यह समाज के हित में नहीं है ।उनका यह भी कहना है कि अफसरशाही को टारगेट किया गया है जिसके कारण वह हतोत्साहित है । काडर की पोस्टों पर यदि दूसरे लोगों को नियुक्तियां दी जाये तो निराशा स्वभाविक है । सरकार के ऐसे निर्णय गलत परम्परायें स्थापित करेंगे और सुशासन के लिये यह शुभ संकेत नहीं है ।