फीफा विश्व कप : अर्जेटीना को हराकर जर्मनी चौथी बार चैम्पियन
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रियो डी जनेरियो 14-Jul-2014
जर्मनी दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में फीफा विश्व कप जीतने वाला पहला यूरोपीय देश बन गया है। माराकाना स्टेडियम में रविवार को खेले गए टूर्नामेंट के 20वें संस्करण के फाइनल में जर्मनी ने अर्जेटीना को 1-0 से हरा दिया। रोमांच से भरपूर मैच का फैसला अतिरिक्त समय के दूसरे हाफ में आया। विश्व कप में रिकार्ड 16 गोल करने वाले दिग्गज मिरोस्लाव क्लोस के स्थान पर 88वें मिनट में खेलने उतरे मारियो गोट्जे ने 113वें मिनट में जर्मनी की ओर से गोल कर पूरे स्टेडियम में सनसनी फैला दी। आंद्रे स्कर्ल द्वारा बाईं तरफ से दिए गए एक शानदार पास को गोट्जे ने छाती पर लिया और फिर उम्दा संतुलन के साथ उसे अपने बाएं पैर के जरिए अर्जेटीना के गोलपोस्ट में डाल दिया। इसके बाद भी खेल में सात मिनट बाकी थे। अंतिम मिनट में अर्जेटीना को फ्रीकिक मिला लेकिन लियोनेल मेसी उस पर बराबरी का गोल नहीं कर सके।जर्मनी ने 24 साल के बाद खिताब जीता है। दूसरी ओर, अर्जेटीनी टीम 24 साल बाद भी फाइनल में पहुंचकर खिताब से वंचित रह गया। जर्मनी ने आखिरी बार 1990 में खिताब जीता था। उस समय हालांकि यह खिताब पश्चिम जर्मनी के हक में गया था लेकिन इसके बाद पूर्वी और पश्चिम जर्मनी का विलय हो गया था।इससे पहले, खेल का फैसले पहले 90 मिनट में नहीं हो सका, जिसके बाद खेल को अतिरिक्त 30 मिनट में ले जाना पड़ा। जर्मनी में 2006 में विश्व कप के 18वें और दक्षिण अफ्रीका में 2010 में हुए विश्व कप के 19वें संस्करण के फाइनल मैच का नतीजा भी अतिरिक्त समय में आया था।भले ही इस विश्व कप फाइनल में एक गोल ही हुआ लेकिन मैच आखिरी मिनट तक रोमांचक बना रहा। पहले हाफ में जहां अर्जेटीना का दबदबा दिखा, वहीं दूसरे हाफ और फिर अतिरिक्त समय में जर्मनी हावी होता दिखा।
दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। मैच के 30वें मिनट में अर्जेटीना के गोंजालो हिग्वेन ने गेंद जर्मनी के गोलपोस्ट में डाल दी थी, जिसे रेफरी ने ऑफसाइड करार कर दिया था। हालांकि टीवी रिप्ले में बहुत हद तक यह साफ नहीं हो पाया कि वह ऑफसाइड था या नहीं।अर्जेटीना के गोलकीपर सर्जियो रोमेरो की भी तारीफ करनी होगी, जिन्होंने कई शानदार गोल बचाए। अर्जेटीनी कप्तान और स्टार खिलाड़ी मेसी हमेशा जर्मन खिलाड़ियों के घेरे में रहे और कुछ खास करने में नाकाम रहे। चोटिल एंजेल डी मारिया का न खेलना भी अर्जेटीना को खला।जर्मनी ने इससे पहले आखिरी बार विश्व कप 1990 में डिएगो माराडोना के नेतृत्व वाली अर्जेटीनी टीम को ही हरा कर जीता था। माराडोना के नेतृत्व में अर्जेटीना ने अंतिम बार विश्व कप 1986 में जीता था। बहरहाल, मेसी को टूर्नामेंट के श्रेष्ठ खिलाड़ी को दिया जाने वाला गोल्डन बॉल अवार्ड दिया गया। मेसी ने इस टूर्नामेंट में चार गोल किए और अपनी टीम को फाइनल तक ले आए। यह अलग बात है कि मेसी फाइनल और सेमीफाइनल में एक भी गोल नहीं कर सके।
इसी तरह, क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय करने वाली कोलम्बियाई टीम के स्ट्राइकर जेम्स रॉड्रिगेज को सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी को दिया जाने वाला प्रतिष्ठित गोल्डन बूट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
इस प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी ने विश्व कप में सबसे अधिक छह गोल किए। जर्मनी के थॉमस मुलर, पांच गोलों के साथ इस खिताब की दौड़ में थे लेकिन वह फाइनल में अर्जेटीना के खिलाफ कोई गोल नहीं कर सके। रॉड्रिगेज ने अपना छठा गोल ब्राजील के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में किया था। कोलम्बियाई टीम वह मैच 1-2 से हारकर विश्व कप से बाहर हो गई थी लेकिन इस गोल के साथ रोड्रिगेज सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बने थे।श्रेष्ठ गोलकीपर का गोल्डन ग्ल्ब्स अवार्ड जर्मनी के गोलकीपर मैनुएल नुएर को दिया गया। इस गोलकीपर ने जर्मनी के लिए इस विश्व कप में सभी मैच खेले। उन्होंने इस दौरान 25 गोल बचाए। वह विश्व कप के दौरान जोएकिम लोव के पसंदीदा गोलकीपर बने रहे।फ्रांस के पॉल पोग्बा को ह्यूंदई यंग प्लेअर अवार्ड से नवाजा गया। यह पुरस्कार टूर्नामेंट में सबसे चमकदार प्रदर्शन करने वाले युवा खिव्लाड़ी को दिया जाता है। 19 साल के पोग्बा ने विश्व कप में अपने शानदार खेल और खेल भावना से सबको प्रभावित किया और कई युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मौजूदगी में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल करने में सफल रहे।कोलम्बियाई टीम को इस साल का फेयर प्ले अवार्ड दिया गया। यह पुरस्कार खेल भावना के साथ मैदान में बने रहने वाली टीम को दिया जाता है। कोलम्बियाई टीम ने इस साल बेहतरीन अनुशासन का परिचय दिया। यह पुरस्कार नॉकआउट दौर में पहुंचने वाली टीम को ही दिया जाता है। कोलम्बियाई टीम क्वार्टर फाइनल में ब्राजील से हार गई थी। 2010 में यह पुरस्कार फ्रांस को मिला था।