हरियाणा जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2002 में संशोधन को स्वीकृति प्रदान
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चंडीगढ़ 12-Jul-2014
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक में जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमों को जनहितैषी बनाने तथा दत्तक बच्चों के रजिस्ट्रीकरण का प्रावधान करने के लिये हरियाणा जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2002 में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई।यह संशोधन इस लिए अनिवार्य है क्योंकि भारत के महा-रजिस्ट्रार ने जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमों में दत्तक बच्चों के रजिस्ट्रेशन का प्रावधान करने के निर्देश दिये हैं और वर्तमान नियमों में ऐसा प्रावधान नहीं है। समाज में संस्थानों से तथा परिवारों में ही बच्चे गोद लेने के मामलों में वृद्घि हो रही है, इसलिए ऐसा किया जाना अनिवार्य हो गया है। इसके अतिरिक्त, पहले बच्चों को गोद लेने के मामले में बायोलॉजिकल माता-पिता के नाम के स्थान पर गोद लेने वाले माता-पिता का नाम लेकर जन्म रिकार्ड में शुद्घिकरण किया जाता था। अब नियमों में नये फार्म को शामिल करके बायोलॉजिकल एवं दत्तक माता-पिता दोनों के नाम रिकार्ड करने का प्रावधान किया गया है।
जन्म एवं मृत्यु का रजिस्ट्रेशन से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के लिये वसूल की जा रही फीस को वर्ष 1999 से नहीं बढ़ाया गया है। कीमतों में वृद्घि होने के कारण फीस में वृद्घि किया जाना आवश्यक हो गया है। इसलिए अब जन्म एवं मृत्यु का रजिस्ट्रेशन घटना के तीस दिन के भीतर करवाने पर अब दो रुपये की बजाय दस रुपये का विलम्ब शुल्क और घटना के तीस दिन के पश्चात लेकिन एक वर्ष के भीतर करवाने पर पांच रुपये के स्थान पर 25 रुपये का विलम्ब शुल्क देना होगा। इसके अतिरिक्त, यदि जन्म एवं मृत्यु का रजिस्ट्रेशन एक वर्ष के भीतर नहीं किया जाता तो केवल उपमण्डल मेजिस्ट्रेट के आदेश पर और 50 रुपये की विलम्ब फीस के भुगतान पर, प्रथम श्रेणी मेजिस्ट्रेट या नोटरी पब्लिक अथवा शपथ आयुक्त द्वारा सत्यापित शपथ पत्र सहित जन्म या मृत्यु की घटना की तिथि से संबंधित किसी प्रमाणिक दस्तावेज पर रजिस्ट्रीकरण किया जायेगा। इसके लिए आवेदन मुख्य रजिस्ट्रार द्वारा विहित दस्तावेजों सहित क्षेत्र के रजिस्ट्रार को किया जायेगा। आवेदन की जांच करनेके उपरांत रजिस्ट्रार द्वारा उन्हें जिला रजिस्ट्रार को भेजा जायेगा और जिला रजिस्ट्रार अपनी स्तुंष्टिï करने के बाद आवेदन आदेश हेतु उन्हें संबंधित उपमण्डल मेजिस्ट्रेट को भेजेगा।
यदि किसी जन्म या मृत्यु की घटना पर रजिस्टे्रशन उसके होने के 15 वर्ष के भीतर नहीं किया गया है तो आवेदन आवश्यक दस्तावेजों सहित जिला रजिस्ट्रार एवं मुख्य रजिस्ट्रार के माध्यम से संबंधित उपमण्डल मेजिस्ट्रेट को जांच एवं आदेश हेतु भेजा जायेगा।यहां यह उल्लेखनीय है कि हरियाणा में ग्रामीण क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और शहरी क्षेत्रों में नगर पालिकाएं जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रेशन केन्द्र हैं। इस समय प्रदेश में कुल 543 रजिस्ट्रेशन केन्द्र संचालित हैं जिनमें से 451 ग्रामीण और 92 शहरी क्षेत्रों में हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों में भी उप-रजिस्ट्रेशन केन्द्र खोले गये हैं ताकि डिस्चार्ज के समय जन्म एवं मृत्यु प्रमाण-पत्र की नि:शुल्क प्रतियां दी जा सके। इसके अतिरिक्त, राज्य में ऑन लाइन रजिस्टे्रशन सुविधा भी शुरू की गई है।