भारतीय रॉकेट का सफल प्रक्षेपण, 5 विदेशी उपग्रह कक्षा में स्थापित
5 दरिया न्यूज
श्रीहरिकोटा 30-Jun-2014
भारतीय रॉकेट ने सोमवार को पांच विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। रॉकेट प्रक्षेपण के दौरान श्रीहरिकोटा में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारतीय अंतरिक्ष क्षमता को वैश्विक मान्यता करार दिया। मोदी ने इस मौके पर यह भी कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों के लिए एक तोहफे के रूप में एक दक्षेस उपग्रह भी विकसित करना चाहिए। मोदी ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी)-सी23 के सफल प्रक्षेपण के बाद कहा, "मेरा मानना है कि प्रौद्योगिकी मौलिक रूप से आम लोगों से जुड़ी हुई है। यह उनकी जिंदगी बदल सकती है।"प्रधानमंत्री ने कहा, "हमने चांद पर यान भेजा और अब मंगल की तरफ यान जा रहा है। मैं इस घटना का साक्षी बन कर सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूं।"उन्होंने इसे भारतीय अंतरिक्ष क्षमता को वैश्विक मान्यता करार दिया जो अटल बिहारी वाजपेयी के दृष्टिकोण से प्रेरित है।
इस अंतरिक्ष अभियान की सफलता के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसरो को बधाई दी। 44.4 मीटर लंबे और 230 टन भार वाले ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी)-सी23 का सोमवार सुबह 9.52 बजे प्रक्षेपण किया गया। पीएसएलवी जिन उपग्रहों को अपने साथ लेकर अंतरिक्ष में गया, उनमें फ्रांस का भू-पर्यवेक्षण उपग्रह एसपीओटी-7 सबसे प्रमुख है। इसके अतिरिक्त जर्मनी का 14 किलोग्राम वजन वाला एआईएसएटी, कनाडा का 15-15 किलोग्राम भार वाला एनएलएस7.1 (सीएएन-एक्स4) व एनएलएस7.2 (सीएएन-एक्स5) और सिंगापुर का सात किलोग्राम वजन वाला वीईएलओएक्स-1 उपग्रह शामिल हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ई.एल.एल.नरसिम्हन, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू, अंतरिक्ष विज्ञानी और अन्य आगंतुक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के रॉकेट अभियान नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे।
यह मोदी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के सत्ता में आने के बाद इसरो का पहला अंतरिक्ष अभियान है। मोदी ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के लिए भी एक उपग्रह विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "आज मैं अपने अंतरिक्ष समुदाय से आग्रह करता हूं कि एक दक्षेस उपग्रह विकसित करने की चुनौती हाथ में लें-जिसे हम अपने पड़ोसियों को भारत के तोहफे के रूप में समर्पित कर सकते हैं।"मोदी ने कहा, "एक उपग्रह जो हमारे सभी पड़ोसी देशों को पूरी क्षमता के साथ अनुप्रयोग और सेवाएं उपलब्ध कराए। मैं आपसे यह भी आग्रह करता हूं कि हमारे नौवहन प्रणाली पर आधारित हमारे उपग्रहों का पूरे दक्षिण एशिया तक विस्तार करने के लिए इसका प्रसार करें।"मोदी ने कहा, "हमने पृथ्वी से 660 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष की कक्षा में पांच उपग्रहों को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। भारत की उन्नत अंतरिक्ष कार्यक्रम ने इसे विश्व के 5-6 शीर्ष देशों के समूह में शामिल कर दिया है। यह ऐसा क्षेत्र है जहां हमारे पास अंतर्राष्ट्रीय क्षमता मौजूद है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "हमने उन्नत देशों के उपग्रहों को प्रक्षेपित किया है। पीएसएलवी ने खुद 67 उपग्रहों को प्रक्षेपित किया है, जिनमें से 40, 19 देशों के उपग्रह हैं। आज के सभी उपग्रह विकसित देशों फ्रांस, कनाडा, जर्मनी और सिंगापुर के थे। वास्तव में यह भारतीय अंतरिक्ष क्षमता को वैश्विक मान्यता है।"मोदी ने कहा कि देश को इस बात का गर्व हो सकता है कि हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम पूर्णरूपेण स्वदेशी है। प्रधानमंत्री ने कहा, "यह बाधाओं से भरी और सीमित संसाधनों की एक यात्रा रही है। मैंने ऐसे छाया चित्र देखें हैं, जिनमें रॉकेट कोन्स साइकिल पर ले जाए जा रहे थे। हमारा पहला उपग्रह आर्यभट्ट बेंगलुरू के औद्योगिक शेड में बनाया गया था।"उन्होंने कहा, "आज हमारा कार्यक्रम विश्व में सबसे ज्यादा किफायती है। मंगल अभियान का खर्च हॉलीवुड फिल्म 'ग्रैविटी' के निर्माण लागत से भी कम होने की खबर सोशल मीडिया में चर्चा में है।"
भारत ने 2012 में एसपीओटी-6 उपग्रह को अंतरिक्ष की केंद्र में स्थापित किया था। एसपीओटी-7 एसपीओटी श्रृंखला का अगला उपग्रह है। इसके बाद इसने एआईएसएटी (जर्मनी), एनएलएस7.1 एवं एनएलएश7.2 (कनाडा) और वीईएलओएक्स-1 (सिंगापुर)को कक्षा में स्थापित किया। भारत ने 1999 से लेकर अब तक पीएसएलवी के जरिए 35 विदेशी उपग्रह अंतरिक्ष के केंद्र में स्थापित किए हैं। इस नए अभियान के जरि यह संख्या 40 हो गई है। भारत ने अपने अंतरिक्ष अभियान की शुरुआत 1975 में रूसी रॉकेट के जरि आर्यभट्ट का प्रक्षेपण कर की थी। चांद व मंगल अभियान सहित भारत ने अपने 100 से अधिक अंतरिक्ष अभियान पूरे कर लिए हैं।