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हिमाचल प्रदेश सरकार ने केन्द्र से उत्तर प्रदेश से 200 करोड़ रूपए की वसूली की मांग की

5 दरिया न्यूज (विजयेन्दर शर्मा)

शिमला 05-Feb-2013

हिमाचल प्रदेश सरकार ने केन्द्र से उत्तर प्रदेश को राज्य द्वारा प्रदान की गई बिजली के 200 करोड़ रूपए की अदायगी में हस्ताक्षेप करने का अनुरोध किया है । आज यहॉं ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए राज्य के ऊर्जा मंत्री श्री सुजान सिंह पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड को अप्रैल 2011 से सितम्बर 2011 तक बिजली उपलब्ध करवाई थी तथा इसकी कुल राशि 200 करोड़ रूपए बनती है जिसकी अदायगी उत्तर प्रदेश सरकार नहीं कर रही है । उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में हिमाचल प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार से विभिन्न स्तरों पर व्यापक चर्चा की है तथा उन्हें बार-बार बिजली बिल अदा करने का अनुरोध किया है लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार इस सिलसिले में लगातार टालमटोल का रवैया अपना रही है जिसके मध्यनजर राज्य को राजस्व से वंचित होना पड़ रहा है । उन्होंने केन्द्र सरकार से उत्तर प्रदेश सरकार की योजना राशि में से 200 करोड़ रूपए काट कर सीधे हिमाचल प्रदेश को प्रदान करने का अनुरोध किया ।उन्होंने भाखड़ा-ब्यास प्रबन्धन बोर्ड पर राज्य के 4,249.45 करोड़ की अदायगी के लिए तत्काल कदम उठाने का अनुरोध करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इस सिलसिले में केन्द्र सरकार को सभी सम्बन्धित दस्तावेज प्रदान कर दिये हैं तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार राज्य को 1.1.1966 से अब तक परियोजना में 7.19 प्रतिशत हिस्सा प्रदान किया जाना चाहिए । ऊर्जा मंत्री श्री सुजान सिंह पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य की सभी नदियों की बेसिन स्टडी करवायेगी तथा कहा कि सरकार ने अभी तक सतलुज तथा चिनाव नदियों के बेसिन का विस्तृत अध्ययन शरू किया है । उन्होंंने बड़ी बिजली परियोजनाओं को पर्यावरण स्वीकृति को समयबद्घ रूप से प्रदान करने के लिए सरल एवं प्रभावी प्रक्रिया अपनाने का अनुरोध किया । उन्होंने कहा कि नवीनीकरण स्रोतों से 40 प्रतिशत बिजली आपूर्ति के लक्ष्य को सही ठहराते हुए कहा कि राज्य सरकार इस क्षेत्र में पूरी क्षमता का दोहन करेगी ।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के सभी राजस्व गांवों को देश में सबसे सस्ती दरों पर 24 घन्टे निर्विघ्न बिजली प्रदान कर रही है । उन्होंने कहा कि राज्य में बिजली परियोजनाओं के लिए कम से कम भूमि का अधिग्रहण करके लोगों की सहमति से पर्याप्त मुआवजा प्रदान किया जाता है तथा कहा कि सरकार ने परियोजना क्षेत्र के लोगों के लिए एक प्रभावी राहत एवं पुर्नवास नीति अपनाई है जिसमें जमीन, घर, पुर्नवास, रोजगार, प्रशिक्षण एवं वित्तिय राहत जैसे महत्वपूर्ण पक्षों का विशेष ध्यान रखा गया है । उन्होंने कहा कि नीति के अन्तर्गत परियोजना निर्माण के समय तथा उसके बाद भी स्थानीय लोगों को परियोजना की पूरी अवधि में अर्जित लाभ का अंश प्रदान करने का प्रावधान किया गया है तथा परियोजना निर्माण के दौरान फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए एक अलग योजना बनाई गई है । ऊर्जा मंत्री ने 2,500 करोड़ तक की बिजली परियोजनाओं की तकनीकी आर्थिक स्वीकृति के लिए राज्य सरकारों को शक्तियां प्रदान करने का अनुरोध किया तथा केन्द्रीय ऊर्जा प्राधिकरण को और अधिक सुदृढ़ करने की मांग की । ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राज्य में 12वीं पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत 5,000 मैगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन किया जाएगा तथा कहा कि राज्य की 23,000 मैगावाट जल विद्युत क्षमता में से अब तक 8,368 मैगावाट का दोहन कर लिया गया है । उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2006 में एक पन विद्युत नीति बनाई है जिससे लोगों के हितों की रक्षा के साथ पर्यावरण का संतुलन भी बनाये रखा गया है ।