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ब्यास त्रासदी : निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने में गईं 24 जानें!

5 दरिया न्यूज

शिमला 21-Jun-2014

हिमाचल प्रदेश में ब्यास त्रासदी पर उच्च न्यायालय के निर्देश पर की गई जांच रिपोर्ट से इस बात का संकेत मिलता है कि निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए किए गए फेरबदल के ही परिणामस्वरूप हादसा हुआ जिसमें हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के 24 छात्रों और एक टूर ऑपरेटर की जान गई। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ को सौंपी गई सरकारी रिपोर्ट में पनबिजली परियोजना के जलाशयों से पानी छोड़े जाने में बरती जा रही अनियमितता, प्रक्रियागत अनदेखी के साथ ही सरकारी लोड डिस्पैच सेंटर की कमियों की ओर भी इशारा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 8 जून को हादसा वाले दिन सरकार संचालित परियोजनाओं को उत्पादन घटाने के लिए कहा गया था, जबकि निजी क्षेत्र की एक कंपनी द्वारा संचालित एक पनबिजली परियोजना को पूरी क्षमता से उत्पादन करने के लिए कहा गया था।

उत्पादन कम करने के इस निर्देश पर अमल करते हुए लारजी परियोजना (इसी के बांध से छोड़े गए पानी से हादसा हुआ) के अधिकारियों ने बिजलीघर को पूरी तरह बंद ही कर दिया जिससे बांध में पानी जमा हो गया और उसे छोड़ना पड़ा। त्रासदी की जांच करने वाले संभागीय आयुक्त ओंकार शर्मा ने हाईकोर्ट को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में कहा है कि परियोजना से पानी छोड़ने का कोई नियम कायदा नहीं अपनाया गया जिससे कुछ ही समय में नदी में 450 घन मीटर प्रति सेकेंड पानी छोड़ दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है, "बांध से पानी छोड़ने से संबंधित कोई मानक संचालन प्रक्रिया नहीं है। बिजलीघर संचालन से जुड़े अधिकारी और बैराज संचालन करने वाले अधिकारियों के बीच कोई तालमेल नहीं है।"रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, "चेतावनी की प्रणाली भी पर्याप्त नहीं है। यह सभी कमियां प्रणाली की विफलता उजागर करती हैं।"

रिपोर्ट में राज्य के लोड डिस्पैच सेंटर के कामकाज पर भी उंगली उठाई गई है। इसमें कहा गया है कि लोड डिस्पैच सेंटर ने सरकार संचालित परियोजनाओं लारजी एवं भावा (120 मेगावाट) को उत्पादन घटाने के लिए कहा गया था, जबकि जयप्रकाश हाइड्रो पावर लि. की स्वामित्व वाली 300 मेगावाट की बासपा परियोजना को पूरी क्षमता से उत्पादन करने के लिए कहा गया था। रिपोर्ट में कहा गया है, "राज्य के लोड डिस्पैच सेंटर को इस मामले में राज्यभर में लोड शेडिंग को यथानुपात आधार पर लेना चाहिए था।"लारजी परियोजना को पूरी तरह उत्पादन बंद करने के फैसले के मामले में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) उच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग कर चुकी है। माकपा के प्रदेश सचिवालय के सदस्य टिकेंदर सिंह पंवार ने 12 जून को सौंपी गई अपनी दलील में कहा है कि त्रासदी वाले दिन बिजली का जरूरत से ज्यादा उत्पादन (देश में) हो रहा था और राज्य को (राष्ट्रीय लोड डिस्पैच सेंटर द्वारा) अपने प्लांटों में उत्पादन घटाने के लिए कहा गया था। 

कम उत्पादन की हिस्सेदारी सरकारी और निजी क्षेत्र की परियोजनाओं को सम्मिलित रूप से वहन करनी चाहिए थी। लेकिन राज्य के लोड डिस्पैच सेंटर ने केवल सार्वजनिक क्षेत्र की लारजी परियोजना को ही पूरी तरह से बंद करने के लिए कहा। आखिर क्यों?उन्होंने कहा है, "इसका मामूली सा कारण है और इस बात के संकेत मिले हैं कि राज्य लोड डिस्पैच सेंटर के अधिकारियों को निजी क्षेत्र (पनबिजली परियोजना) द्वारा कथित रूप से रिश्वत दी जाती है। निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र की हर एक कंपनी को कम से कम अपना एक टर्बाइन बंद करने के लिए कहा जाना चाहिए था, तब इसका अपेक्षित परिणाम आता।"