5 Dariya News

₹10,000 करोड़ का नया कर्ज़ लेकर पंजाब को आर्थिक बर्बादी की ओर धकेल रही है मान सरकार : सुखजिंदर सिंह रंधावा

अपनी ही बिजली कंपनी के कर्ज़ की गारंटी देने से पीछे हटना सरकार की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत

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चंडीगढ़ 22-Jul-2026

पूर्व उपमुख्यमंत्री पंजाब और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिस पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को सरकार लगातार ‘मुनाफ़े में चलने वाली कंपनी’ बताती रही, उसी कंपनी पर अब ₹10,000 करोड़ का नया कर्ज़ लेने की नौबत आ गई है। बिजली सब्सिडी के भुगतान में लगातार देरी, बढ़ते बकाया, महंगी दरों पर बिजली खरीद और अब नया कर्ज़ इस बात का प्रमाण है कि पंजाब का बिजली तंत्र गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। इससे स्पष्ट है कि सरकार के दावे और ज़मीनी हकीकत में भारी अंतर है।

रंधावा ने कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि पहली बार पंजाब सरकार ने कथित तौर पर अपनी ही बिजली कंपनी के कर्ज़ की गारंटी देने से भी इनकार कर दिया। यदि सरकार को अपनी ही कंपनी की वित्तीय स्थिति पर भरोसा नहीं है, तो फिर जनता से यह कैसे कहा जा सकता है कि सब कुछ ठीक चल रहा है? सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसा कौन-सा वित्तीय संकट पैदा हो गया कि उसे अपनी ही कंपनी से दूरी बनानी पड़ी और 10 हजार करोड़ का ऋण लेना पड़ा। राज्य की वित्तीय एमरजेंसी के लिए कौन जिम्मेदार है और इसका ब्याज कौन भरेगा?

रंधावा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनकी सरकार जनता के सवालों का जवाब दे। सरकार बताए कि पंजाब पर कितना नया कर्ज़ चढ़ चुका है, सरकारी कंपनियों की वास्तविक आर्थिक स्थिति क्या है और जनता के पैसे का उपयोग किन मदों में किया जा रहा है। सरकार को हर रुपये का हिसाब देना होगा और यह बताना होगा कि आर्थिक मजबूती के वादे करने वाली सरकार आखिर पंजाब को किस दिशा में लेकर जा रही है।

उन्होंने कहा कि आज देश और पंजाब के हालात यह हैं कि हर वर्ग सड़कों पर है। किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, नौजवान रोजगार और भर्ती घोटालों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, कर्मचारी अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, आम जनता बिजली, पानी और महंगाई से परेशान होकर आवाज़ उठा रही है और विपक्षी सांसदों तक को नीट और स्टूडेंट्स के भविष्य के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। यह किसी सफल सरकार की नहीं, बल्कि पूरी तरह विफल शासन व्यवस्था की तस्वीर है।