पीठ दर्द और मानसिक तनाव से चाहिए मुक्ति? आज ही से शुरू करें 'आकर्ण धनुरासन'
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नई दिल्ली 18-Jul-2026
आधुनिक जीवनशैली में पीठ दर्द, कंधों की जकड़न और मानसिक तनाव एक आम समस्या बन गई है। ऐसे में आकर्ण धनुरासन एक अचूक और प्रभावी योगासन की तरह काम करता है। यह आसान न केवल शारीरिक लचीलापन और शक्ति को बढ़ाता है, बल्कि साधक में एकाग्रता और मानसिक दृढ़ता का संचार भी करता है। संस्कृत के तीन शब्दों 'आ' (तक), 'कर्ण' (कान), और 'धनुष' (कमान) से मिलकर बने इस आसन का शाब्दिक अर्थ है 'कान तक धनुष को खींचना'।
यह आसन मुख्य रूप से जांघों, कूल्हों और कंधों के लचीलेपन को बढ़ाने और एकाग्रता में सुधार करने में मदद करता है। आयुष मंत्रालय ने इस आसान को शरीर में शक्ति, संतुलन और लचीलापन लाने वाला प्रभावी योगाभ्यास बताया है। उनके अनुसार, यह मुद्रा साधक को धनुष की तरह आकार देती है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है और रीढ़, पीठ तथा पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
आकर्ण धनुरासन के नियमित अभ्यास से पीठ, कंधे और छाती की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। रीढ़ की हड्डी लचीली और स्वस्थ बनी रहती है, जिससे पीठ दर्द में काफी राहत मिलती है। पेट के अंगों पर पड़ने वाले दबाव से पाचन क्रिया सुधरती है और कब्ज जैसी समस्याएं दूर होती हैं। पैरों, जांघों और कूल्हों की मांसपेशियां खिंचती हैं। यह आसन संतुलन और एकाग्रता को भी बेहतर बनाता है।
मानसिक स्तर पर यह मुद्रा आत्मविश्वास की भावना को मजबूत करती है। एक्सपर्ट के अनुसार, आकर्ण धनुरासन शरीर और मन दोनों में संतुलन स्थापित करने वाला एक शक्तिशाली योगासन है, जो योग साधकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होता है, हालांकि शुरुआत में लोगों को किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही यह आसन करना चाहिए।
आसन के अभ्यास के दौरान शरीर पर किसी तरह का दबाव नहीं डालना चाहिए। अगर आपकी पीठ (स्पाइन) या गर्दन में कोई गंभीर विकार या चोट है, तो इस आसन को करने से बचें। अभ्यास के दौरान किसी विशेषज्ञ की निगरानी में करें और शरीर पर जबरदस्ती दबाव न डालें।