5 Dariya News

सीपी राधाकृष्णन ने “आरएसएस @100: ए सेंचुरी ऑफ सर्विस, यूनिटी एंड सैक्रिफाइस” पुस्तक का विमोचन किया

आरएसएस ने पिछले एक सदी में सेवा, एकता और राष्ट्रीय चेतना के आदर्शों को मजबूत किया है : सीपी राधाकृष्णन

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नई दिल्ली 17-Jul-2026

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में श्री श्याम जाजू और श्री अनुपम त्रिवेदी द्वारा लिखित पुस्तक “आरएसएस @100: ए सेंचुरी ऑफ सर्विस, यूनिटी एंड सैक्रिफाइस”का विमोचन किया। सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शताब्दी वर्षगांठ पर प्रकाशित पुस्तक के विमोचन समारोह में भाग लेना उनके लिए व्यक्तिगत सम्मान की बात है, जिसके साथ उनका लंबे समय से जुड़ाव रहा है।

संघ पर लिखी एक तमिल कविता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह कविता संगठन की तुलना पवित्र गंगा नदी से करती है, जो निस्वार्थ भाव से दूसरों के कल्याण के लिए बहती है, और यह सेवा भावना का प्रतीक है जिसने संघ को उसकी शताब्दी यात्रा में मार्गदर्शन दिया है। श्री राधाकृष्णन ने आरएसएस की भावना को बखूबी दर्शाने के लिए लेखकों की सराहना करते हुए कहा कि संघ की यात्रा भारत की सांस्कृतिक जड़ों, विरासत और परंपराओं को पुनर्जीवित करने, सुदृढ़ करने और पुनर्निर्माण करने की रही है।

पुस्तक के शीर्षक: “आरएसएस @100: ए सेंचुरी ऑफ सर्विस, यूनिटी एंड सैक्रिफाइस” का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन आदर्शों ने स्वयंसेवकों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि सेवा समाज के प्रति निस्वार्थ समर्पण को दर्शाती है; एकता उन बंधनों को मजबूत करती है जो भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता से परे हैं; और त्याग हमें याद दिलाता है कि स्थायी संस्थान समर्पण, दृढ़ता और निस्वार्थ प्रयासों से ही बनते हैं।

उपराष्ट्रपति ने आरएसएस द्वारा अपनी दैनिक शाखाओं के माध्यम से चरित्र निर्माण और नेतृत्व विकास पर दिए जाने वाले जोर को भी रेखांकित किया। पुस्तक से उद्धृत करते हुए उन्होंने शाखा को "आत्मा की कार्यशाला" बताया, जहाँ युवाओं की कच्ची ऊर्जा को राष्ट्रीय चरित्र में ढाला जाता है। उन्होंने आगे कहा कि स्वयंसेवक का सार प्रत्येक व्यक्ति को सौंपी गई जिम्मेदारी की गरिमा को समर्पण और उत्कृष्टता के साथ निभाकर उसे बढ़ाना है।

श्री सीपी राधाकृष्णन ने आगे कहा कि आरएसएस ने भारत की सभ्यतागत विरासत, विविध परंपराओं, भाषाओं और आध्यात्मिक विचारों में गौरव की भावना को बढ़ावा देकर सांस्कृतिक निरंतरता और राष्ट्रीय चेतना को निरंतर प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा कि शताब्दी समारोह लाखों स्वयंसेवकों के समर्पण को स्वीकार करने का अवसर है, और यह भी कहा कि संस्थाएं तभी कायम रहती हैं जब उनमें दृढ़ विश्वास, प्रतिबद्धता और आम लोगों की अपने से बड़े उद्देश्यों के लिए काम करने की इच्छाशक्ति हो।

"एक स्वयंसेवक प्रधानमंत्री: मोदी युग" नामक अध्याय का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्वयंसेवक से प्रधानमंत्री बनने तक के सफर को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने निरंतर सेवा और " राष्ट्र प्रथम" के सिद्धांत को शासन के केंद्र में रखा है, जो आरएसएस के निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण पर अटूट जोर को प्रतिबिंबित करता है।

केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के साथ हुई अपनी बातचीत को याद करते हुए श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि दोनों ने ही अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के रूप में की थी, जो जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति से प्रेरित आंदोलन से जुड़े थे। गंगा नदी का उदाहरण देते हुए, जो एक छोटी धारा से शुरू होकर एक विशाल नदी बन जाती है, उन्होंने कहा कि आरएसएस भी एक छोटे से संगठन के रूप में शुरुआत करके दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक बन गया है।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय, आरएसएस क्षेत्र संघचालक श्री पवन जिंदल, सह-लेखक श्री श्याम जाजू और श्री अनुपम त्रिवेदी तथा प्रभात प्रकाशन के प्रबंध निदेशक श्री प्रभात कुमार सहित अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।