पंजाब सरकार को निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में इलाज की दरें तय करनी चाहिए: बलबीर सिंह सिद्धू
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के लाभार्थियों को पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में इलाज की सुविधा नहीं मिल रही
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मोहाली 15-Jul-2026
राज्य में निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों द्वारा तृतीयक (टर्शियरी) स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यधिक शुल्क वसूले जाने के मद्देनज़र, पंजाब सरकार को सभी जिलों में निजी स्कूलों की फीस नियंत्रित करने के लिए गठित नियामक समितियों की तर्ज पर इलाज की दरें भी तत्काल निर्धारित करनी चाहिए। यह बात पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कही। उन्होंने कहा कि अधिकांश बड़े निजी अस्पताल ऐसे कारोबारी चला रहे हैं, जो डॉक्टरों के लिए वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करते हैं और उन्हें हिस्सेदारी भी देते हैं।
लेकिन इन सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में ऐसे अमानवीय और व्यावसायिक तौर-तरीकों की निगरानी के लिए कोई नियामक संस्था मौजूद नहीं है। पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना को असफल योजना बताते हुए सिद्धू ने कहा कि पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ इस योजना के तहत पंजीकृत लाभार्थियों को इलाज की सुविधा नहीं दे रहा है।
उन्होंने कहा कि पीजीआई पंजाब के लोगों की पहली पसंद है क्योंकि वहां सभी सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टर एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। लेकिन जब सरकारी अस्पताल गंभीर मरीजों को वहां रेफर करते हैं, तो उन्हें बिना इलाज वापस लौटना पड़ता है क्योंकि पीजीआई प्रबंधन ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना को मान्यता नहीं दी है।
दूसरी ओर, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थियों को वहां सभी सुविधाएं मिल रही हैं। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की गिरती स्थिति पर चिंता जताते हुए सिद्धू ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने का वादा किया था, लेकिन वर्तमान सरकार मौजूदा सरकारी अस्पतालों को भी उन्नत करने में विफल रही है।
ऐसे में निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं सहित सभी इलाज की दरें तय करना समय की मांग है। राज्य की चिंताजनक स्वास्थ्य स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब अब मधुमेह (डायबिटीज) और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) की राजधानी बन गया है।
इसके अलावा किडनी फेल होने और कैंसर के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। सरकार के पास न तो कोई कार्ययोजना है और न ही बीमारियों का अद्यतन वर्गीकरण उपलब्ध है।
उन्होंने कहा, "यदि सरकार को पंजाब के लोगों के प्रमुख स्वास्थ्य मुद्दों की ही चिंता नहीं है, तो वह राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र की बिगड़ती स्थिति पर कैसे नियंत्रण पाएगी?" अपने स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए सिद्धू ने कहा कि वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में इलाज की अधिकतम दर 18,000 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की थी।
डॉ. के.के. तलवाड़ समिति द्वारा तय इन दरों में आइसोलेशन बेड, आईसीयू उपचार तथा अस्पताल में भर्ती होने का पूरा खर्च शामिल था। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार अब सभी पंजाबवासियों की मांग है कि निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में सभी प्रकार के इलाज की दरें निर्धारित करने के लिए तत्काल एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाए।
अंत में सिद्धू ने पंजाब सरकार से अपील की कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में मरीजों को निशुल्क इलाज उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।