बलबीर सिंह सिद्धू ने बिजली संकट और नहरों के अंतिम छोर तक पानी न पहुंचने के मुद्दे पर पंजाब सरकार को घेरा
पंजाब सरकार किसानों और आम लोगों की समस्याओं का तुरंत समाधान करे – बलबीर सिंह सिद्धू
5 Dariya News
मोहाली 30-Jun-2026
पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने राज्य में उत्पन्न गंभीर बिजली और सिंचाई संकट को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार के झूठे दावों और विफल प्रशासन ने पंजाब के किसानों और आम जनता को बेहद कठिन परिस्थितियों में धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि धान की रोपाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में किसानों के खेतों तक न तो नहरों का पानी पहुंच रहा है और न ही पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके कारण हजारों एकड़ फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है।
सिद्धू ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि नहरों का पानी अंतिम छोर (टेल) तक पहुंचा दिया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। आज नहरों के अंतिम छोर और छोटी नहरें सूखी पड़ी हैं, किसान पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं और धान की रोपाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
किसान सरकारी अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। सरकार के सभी दावे केवल विज्ञापनों और कागजों तक सीमित रह गए हैं। उन्होंने कहा कि बदलाव के बड़े-बड़े दावे करने वाली आम आदमी पार्टी सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है।
आज पूरे पंजाब के शहरों और गांवों में कई-कई घंटों की अघोषित बिजली कटौती से लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है। सिद्धू ने मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों को चुनाव के दौरान किए गए वादों की याद दिलाते हुए कहा कि झाड़ू सरकार ने बड़े गर्व से किसानों से कहा था कि अब वे अधिकारियों की तरह सुबह 9 बजे समय पर खेतों में जाएंगे और शाम को घर लौटेंगे।
लेकिन आज वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। यह बदलाव नहीं बल्कि पंजाब के अन्नदाता के साथ किया गया सबसे बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि सरकार की विफलता का सबसे बड़ा खामियाजा पंजाब का किसान भुगत रहा है। अपनी मेहनत से तैयार की गई धान की फसल को सूखने से बचाने के लिए किसान दिन-रात जनरेटर चलाने को मजबूर हैं।
बिजली आपूर्ति लगातार बाधित होने के कारण एक हाई-पावर ट्यूबवेल या मोटर चलाने के लिए प्रतिदिन लगभग 60 से 70 लीटर डीजल की खपत हो रही है। डीजल की मौजूदा कीमतों के अनुसार किसानों को रोजाना लगभग 5,000 से 7,000 रुपये तक अतिरिक्त खर्च अपनी जेब से करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त बोझ किसानों की आर्थिक कमर तोड़ रहा है और सरकार की लापरवाही का सीधा नुकसान अन्नदाता को उठाना पड़ रहा है। सिद्धू ने सवाल उठाया कि यदि खेती पर रोजाना इतना भारी अतिरिक्त खर्च थोपा जाएगा तो किसान के हाथ क्या बचेगा?
इस अनावश्यक खर्च ने खेती की पूरी लाभप्रदता समाप्त कर दी है। हालात यह हैं कि किसानों के लिए अब फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। यह सरकार केवल किसान हितैषी होने का दिखावा कर रही है, जबकि वास्तव में अपनी विफलता का बोझ किसानों पर डालकर उन्हें कर्ज और आर्थिक संकट की ओर धकेल रही है।
उन्होंने कहा कि इस विफल सरकार के शासन में केवल किसान ही नहीं, बल्कि शहरों के व्यापारी, दुकानदार, उद्योगपति और आम नागरिक भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी में लंबे बिजली कटौती के कारण उद्योग प्रभावित हो रहे हैं, छोटे कारोबार ठप पड़े हैं, अस्पतालों में मरीज परेशान हैं और घरों में बच्चे, महिलाएं तथा बुजुर्ग बेहाल हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के लोगों के टैक्स का करोड़ों रुपये अन्य राज्यों में चुनाव प्रचार और सरकारी विज्ञापनों पर खर्च किया जा रहा है, जबकि पंजाब के बिजली और सिंचाई ढांचे को मजबूत करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। अंत में सिद्धू ने मांग की कि बिजली विभाग तत्काल सभी अघोषित बिजली कटौती बंद करे और कृषि तथा घरेलू उपयोग के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करे।
साथ ही सिंचाई विभाग को निर्देश दिए जाएं कि नहरों के अंतिम छोर तक तुरंत पानी पहुंचाया जाए ताकि किसानों की धान की फसल को बचाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो पंजाब कांग्रेस पूरे राज्य में सड़कों पर उतरकर बिजली ग्रिडों, सिंचाई विभाग के कार्यालयों और अन्य सरकारी दफ्तरों का घेराव करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी।