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भारत-यूके सीईटीए से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और इनोवेशन में साझेदारी होगी मजबूत : पीयूष गोयल

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लंदन 28-Jun-2026

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) के 15 जुलाई से लागू होने के चलते यहां भारतीय समुदाय के साथ बैठक की और उन्हें इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते के फायदों के बारे में अवगत कराया और कहा कि इससे दोनों देश के बीच व्यापार, निवेश और इनोवेशन में साझेदारी मजबूत होगी।

गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि बैठक में भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच एक जीवंत पुल के तौर पर प्रवासी समुदाय की अहम भूमिका के बारे में बात की, जो आर्थिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करते हैं। गोयल ने आईसीएआई यूके चैप्टर के सदस्यों से भी बातचीत की और भारत-यूके के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में सीए समुदाय की अहम भूमिका पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि भारत-यूके सीईटीए पेशेवरों के लिए नए रास्ते खोलेगा। इस कारण सभी पेशेवर इस समझौते से मिलने वाले मौकों का अधिक से अधिक फायदा उठाने के लिए अपने कौशल, ज्ञान और पेशेवर विशेषज्ञता का इस्तेमाल करें और दोनों देशों की साझा तरक्की में योगदान दें। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के वारविक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप (डब्ल्यूएमजी) में 'सेफ ऑटोनॉमी' के प्रमुख, प्रोफेसर सिद्धार्थ खस्तगीर के साथ इंडस्ट्री और एकेडेमिया के बीच सहयोग को और मजबूत करने और रिसर्च पर आधारित इनोवेशन को आगे बढ़ाने पर भी अहम चर्चा की।

गोयल ने कहा, "एक मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम क्रांतिकारी विचारों को बढ़ावा देने, ग्लोबल स्तर पर कॉम्पिटिटिव इंडस्ट्रीज बनाने और भारत व दुनिया के लिए भविष्य की टेक्नोलॉजी को आकार देने में अहम भूमिका निभाता है।" जीईडीयू ग्लोबल एजुकेशन के ग्रुप सीईओ डॉ. विश्वजीत राणा के साथ एक बैठक में, गोयल ने उच्च शिक्षा, स्किल्स और इनोवेशन के क्षेत्र में भारत-यूके सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।

इससे पहले, गोयल ने भारतीय कंपनियों से कहा कि वे यूके की कंपनियों के साथ अपने संबंध मजबूत करें और भारत-यूके सीईटीए के तहत मिलने वाले मौकों को लगातार बिजनेस ग्रोथ में बदलें। लंदन में 'भारत-यूके: पार्टनर्स इन प्रोग्रेस बिजनेस प्लेनरी' को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि यह अहम ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप, इनोवेशन और मजबूत सप्लाई चेन को बढ़ावा देने के बड़े मौके देता है।