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डॉक्टर दिवस की पूर्व संध्या पर डॉ. जितेंद्र सिंह भविष्य में सटीक चिकित्सा पद्धति पर प्रकाश डालते हैं

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया जीनोम इंडिया मिशन भारत में व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा की नींव रख रहा है

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नई दिल्ली 27-Jun-2026

डॉक्टर दिवस की पूर्व संध्या पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, जो स्वयं एक प्रख्यात चिकित्सक और मधुमेह विशेषज्ञ हैं उन्होंने भविष्य में "सटीक चिकित्सा" के उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा  कि भारत जीन थेरेपी, परमाणु चिकित्सा और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए स्वदेशी समाधान विकसित कर रहा है जिससे वह अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवा नवाचार के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की विशाल आनुवंशिक विविधता, विभिन्न प्रकार की बीमारियों का स्वरूप और तेजी से विस्तार करने वाली वैज्ञानिक क्षमताएं भारतीय रोगियों के लिए भारतीय उपचार हेतु भारतीय डेटा विकसित करने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करती हैं, साथ ही किफायती और विश्व स्तर पर प्रासंगिक स्वास्थ्य देखभाल समाधानों में योगदान देती हैं।

डॉक्टर दिवस के विशेष सम्मेलन में  हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा एक परिवर्तनकारी युग में प्रवेश कर रही है जहां उपचार को व्यक्ति की आनुवंशिक प्रोफाइल, जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों के अनुरूप बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सटीक चिकित्सा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा अधिक सटीक निदान, लक्षित उपचार और बेहतर रोगी परिणामों को सक्षम बनाकर चिकित्सा पद्धति के भविष्य को पुनर्परिभाषित करेंगे।

श्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की विविधता ही इसकी सबसे बड़ी वैज्ञानिक शक्तियों में से एक बन गई है। अपेक्षाकृत समरूप जनसंख्या वाले देशों के विपरीत, भारत में विभिन्न क्षेत्रों में आनुवंशिक विविधताओं और रोगों के विभिन्न रूपों की असाधारण विविधता पाई जाती है जिससे जैव चिकित्सा अनुसंधान के अपार अवसर उत्पन्न होते हैं।

उन्होंने कहा कि इस अद्वितीय लाभ के कारण भारत न केवल अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान कर सकता है बल्कि ऐसे समाधान भी विकसित कर सकता है जिनसे वैश्विक समुदाय को लाभ हो सके। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जीनोम इंडिया मिशन ने 10,000 से अधिक व्यक्तियों के जीनोम अनुक्रमण का कार्य पूरा कर लिया है और दुनिया के सबसे बड़े जीनोमिक डेटाबेस में से एक के निर्माण की दिशा में प्रगति कर रहा है।

उन्होंने कहा कि यह वैज्ञानिक आधार देश को सटीक चिकित्सा की ओर अग्रसर करने में तेजी लाएगा और साथ ही आनुवंशिक विकारों, दुर्लभ बीमारियों और व्यक्तिगत उपचारों पर शोध को मजबूत करेगा। हाल की वैज्ञानिक उपलब्धियों का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय शोधकर्ताओं ने हीमोफीलिया के लिए जीन थेरेपी का सफल प्रदर्शन किया है, जो स्वदेशी चिकित्सा नवाचार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने आगे कहा कि जीन चिकित्सा और परमाणु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा के कुछ सबसे आशाजनक क्षेत्रों के रूप में उभर रहे हैं और आने वाले वर्षों में अत्यधिक लक्षित और रोगी-विशिष्ट उपचार के माध्यम से रोग प्रबंधन में मौलिक परिवर्तन लाएंगे। मंत्री जी ने कहा कि अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान के माध्यम से भारत के अनुसंधान तंत्र को एक मजबूत संस्थागत ढांचा प्राप्त हुआ है, जो आधुनिक विज्ञान को सामाजिक विज्ञान, मानविकी और भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के साथ एकीकृत करता है।

उन्होंने कहा कि यह बहुविषयक दृष्टिकोण भारत के वैज्ञानिक विकास के अपने मॉडल को दर्शाता है, साथ ही राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने वाले नवाचार को प्रोत्साहित करता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में एक शक्तिशाली सहायक के रूप में उभरी है।

जीनोम अनुक्रमण और जैव चिकित्सा अनुसंधान से लेकर रोग निदान, चिकित्सा शिक्षा और टेलीमेडिसिन तक, एआई जटिल चिकित्सा डेटा के विश्लेषण में लगने वाले समय को काफी कम कर रहा है और साथ ही नैदानिक ​​निर्णय लेने की गुणवत्ता को बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी-आधारित हाइब्रिड स्वास्थ्य सेवा मॉडल दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले रोगियों को विशेषज्ञों से जोड़ रहे हैं, जिससे पूरे देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की पहुंच बढ़ रही है।

श्री जितेंद्र सिंह ने  कहा कि हालिया नीतिगत सुधारों ने सरकारी संस्थानों, शैक्षणिक जगत और निजी क्षेत्र के बीच अधिक सहयोग को प्रोत्साहित करते हुए परमाणु चिकित्सा और संबंधित विषयों में उन्नत अनुसंधान के नए अवसर खोले हैं। उन्होंने कहा कि टाटा मेमोरियल सेंटर जैसे संस्थान कैंसर और अन्य जानलेवा बीमारियों के लिए परमाणु चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी कार्य कर रहे हैं, जिससे सुरक्षित और अधिक सटीक उपचार की नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में औषधि नवाचार के क्षेत्र में भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों तक मुख्य रूप से अन्य देशों में खोजी गई दवाओं के निर्माण के बाद, देश ने अब स्वदेशी अनुसंधान, नैदानिक ​​परीक्षणों और नवाचार के माध्यम से नई दवाओं का विकास शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि दवा प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए भारत में पहली स्वदेशी रूप से विकसित एंटीबायोटिक दवा का सफल विकास वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक स्वास्थ्य सेवा समाधान प्रदान करने की देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

भारत के जैव प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र की तीव्र वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि बायोई3 नीति और बायो-राइड मिशन जैसी पहलें अनुसंधान, जैव-विनिर्माण और स्वास्थ्य सेवा नवाचार को गति प्रदान कर रही हैं, साथ ही अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों, स्टार्टअप और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी को बढ़ावा दे रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारत का चिकित्सा उपकरण क्षेत्र भी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकियों का उत्पादन कर रहा है जो देश और विदेश दोनों में किफायती स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत कर रही हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने आयुष्मान भारत को विश्व के सबसे समावेशी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रमों में से एक बताया जो गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को भी वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों, डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना और टेलीमेडिसिन के तेजी से विस्तार के साथ-साथ ये पहलें भारत के स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क को लगातार मजबूत कर रही हैं और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच में सुधार ला रही हैं। निवारक स्वास्थ्य देखभाल को अगली प्रमुख राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में मधुमेह, कैंसर और फैटी लिवर रोग जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जिनमें से कई बीमारियां युवा आयु वर्ग को तेजी से प्रभावित कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि शीघ्र निदान, नियमित जांच, जन जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप देश के युवाओं के स्वास्थ्य की रक्षा करने और 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। श्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हुए बदलावों को वैश्विक स्तर पर बढ़ती मान्यता मिल रही है।

स्वदेशी टीकों और जीनोमिक्स से लेकर सटीक चिकित्सा, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत चिकित्सा अनुसंधान तक, भारत किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक विश्वसनीय गंतव्य के रूप में तेजी से पहचाना जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश दुनिया भर से मरीजों को आकर्षित कर रहा है और साथ ही वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए नवोन्मेषी और लागत प्रभावी समाधान प्रदान कर रहा है। 

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि विज्ञान, नवाचार और सहयोगात्मक अनुसंधान में निरंतर निवेश, सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच घनिष्ठ साझेदारी के समर्थन से, भारत को अगली पीढ़ी की स्वास्थ्य सेवा में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्व बंधु भारत के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जहां देश स्वदेशी नवाचार द्वारा संचालित सुलभ, किफायती और विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से मानवता की सेवा करता है।