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गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बठिंडा में पंजाब की पहली बायो-फर्टिलाइज़र क्वालिटी कंट्रोल लैब का उद्घाटन किया

2 करोड़ रुपये की लागत से जल्द बनेगी सीड टेस्टिंग लैब: खुड्डियां

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बठिंडा 26-Jun-2026

राज्य में कृषि संबंधी उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा कृषि बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने आज बठिंडा में राज्य की पहली बायो-फर्टिलाइज़र क्वालिटी कंट्रोल प्रयोगशाला का उद्घाटन किया तथा डबवाली रोड स्थित कृषि भवन में सीड टेस्टिंग लैब का शिलान्यास किया।

स.गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि 1.5 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस बायो-फर्टिलाइज़र लैब की वार्षिक परीक्षण क्षमता कम से कम 1,000 नमूनों की है। उन्होंने कहा कि यह प्रयोगशाला इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब के किसान रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक उर्वरकों (बायो-फर्टिलाइज़र) की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। 

यह लैब बाजार में उपलब्ध बायो-फर्टिलाइज़र उत्पादों की गुणवत्ता की जांच कर किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराने में सहायक होगी। उन्होंने बताया कि 2 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली सीड टेस्टिंग लैब वैज्ञानिक तरीके से बीजों की गुणवत्ता जांच की सुविधा उपलब्ध कराएगी तथा किसानों को प्रमाणित (सर्टिफाइड) बीज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 

बायो-फर्टिलाइज़र क्वालिटी कंट्रोल लैब के साथ मिलकर यह सीड टेस्टिंग लैब कृषि आदानों के लिए सख्त गुणवत्ता मानक लागू करेगी तथा नकली एवं घटिया उत्पादों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाएगी। कृषि मंत्री ने कहा, "इन प्रयोगशालाओं के शुरू होने से किसानों को जांच के लिए नमूने दूसरे राज्यों में भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। 

अब पूरी परीक्षण प्रक्रिया पंजाब में ही पूरी होगी, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।" उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक तथा अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कृषि निदेशक डॉ. गुरजीत सिंह बराड़ ने कहा कि दोनों प्रयोगशालाएं विभाग की तकनीकी क्षमता को मजबूत करेंगी तथा बीजों एवं जैविक उर्वरकों की समयबद्ध और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य के भीतर ही परीक्षण सुविधा उपलब्ध होने से गुणवत्ता मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन, जांच परिणामों में होने वाली देरी को कम करने तथा किसानों को बुवाई से पहले सही निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर विधायक जगरूप सिंह गिल और मास्टर जगसीर सिंह, संयुक्त निदेशक (प्लांट प्रोटेक्शन) नरिंदर पाल सिंह बेनीपाल सहित कृषि विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।