5 Dariya News

मंत्रिमंडल ने हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा नियम, 2007 में संशोधन को दी मंजूरी

उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप किए गए नियमों में बदलाव

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चंडीगढ़ 22-Jun-2026

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा नियम, 2007 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। यह संशोधन भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 19 मई, 2023 को ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में दिए गए निर्णय के अनुपालन में किया गया है।पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा राज्य की न्यायिक सेवा से जुड़े नियमों को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप बनाने के लिए यह संशोधन प्रस्तावित किए गए थे। 

इनका उद्देश्य उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारियों की सेवा शर्तों और कैरियर प्रगति को और बेहतर बनाना है।स्वीकृत संशोधनों के तहत हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा नियम, 2007 के नियम 16(1), 16(2) और 17 में बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा नियमों में एक नया परिशिष्ट (एपेंडिक्स) जोड़ा गया है तथा नियमों के साथ संलग्न अनुसूची (शेड्यूल) में भी आवश्यक संशोधन किए गए हैं।नई व्यवस्था के तहत हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारियों के लिए संशोधित वेतन संरचना लागू की जाएगी। 

इसमें प्रवेश स्तर (एंट्री लेवल), चयन ग्रेड (सेलेक्शन ग्रेड) और सुपर टाइम स्केल पर कार्यरत जिला न्यायाधीशों के वेतनमान और वार्षिक वेतन वृद्धि से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं।मंत्रिमंडल ने चयन ग्रेड और सुपर टाइम स्केल पदों से संबंधित प्रावधानों को भी मंजूरी दी है। संशोधित नियमों के अनुसार, 1 जनवरी 2020 से जिला न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों में से 35 प्रतिशत पद चयन ग्रेड के लिए निर्धारित होंगे।

यह ग्रेड उन अधिकारियों को दिया जाएगा, जिन्होंने जिला न्यायाधीश संवर्ग में लगातार कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो। चयन मेरिट और वरिष्ठता के आधार पर किया जाएगा।इसी प्रकार, जिला न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों में से 15 प्रतिशत पद सुपर टाइम स्केल के लिए निर्धारित होंगे। यह लाभ उन अधिकारियों को मिलेगा, जिन्होंने चयन ग्रेड में लगातार कम से कम तीन वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो। 

इसके लिए भी मेरिट और वरिष्ठता को आधार बनाया जाएगा।संशोधित प्रावधानों के अनुसार, वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) की गणना 3 प्रतिशत की दर से की जाएगी। प्रत्येक वर्ष की वेतन वृद्धि पिछले वर्ष के मूल वेतन के आधार पर जोड़ी जाएगी। इन संशोधनों से हरियाणा की उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारियों को बेहतर सेवा लाभ मिलेंगे तथा न्यायिक सेवा में कैरियर उन्नति की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होगी।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास (एच०पी०एस०एन०) की दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालू-Ⅰ) में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। योजना में संशोधन के अनुसार दावा प्रस्तुत करने की अवधि का विस्तार तथा पूर्वव्यापी राहत देते हुए अब सभी भविष्य के दावों के लिए दावा भरने की अवधि को मृत्यु / विकलांगता की तारीख से 3 महीने से बढ़ाकर 6 महीने करना और आज तक दायर किए गए सभी दावों के लिए 3 महीने की पूर्वव्यापी छूट (यानी मृत्यु / विकलांगता की तारीख से 6 महीने तक) की अवधि होगी।

इसके साथ ही स्तरीकृत विलालम्ब क्षमा तंत्र में अब भविष्य के सभी दावों के लिए निम्नानुसार प्रत्यायोजित शक्तियों के साथ एस स्तरित विलम्ब क्षमा तंत्र होगा। इसके तहत 6 महीने से अधिक और 7 महीने तक की देरी के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एचपीएसएन और 7 महीने से अधिक और 9 महीने तक की देरी के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त विभाग तथा 9 महीने से अधिक और 12 महीने तक की देरी के लिए वित्तमंत्री को शक्तियां दी गई है।

योजना में अब एक संरचित शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाएगा जिसमें उपायुक्त (डीसी) क्षेत्र स्तर के अधिकारियों के रूप में कार्य करेंगे और मुख्यालय स्तर पर मौजूदा अधिकारियों के अतिरिक्त अ०सां०का०वि० के जिला सांख्यिकीय अधिकारी (जि०स०अ०) जिला स्तर पर दयालू-1 योजना के नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की सहायता योजना के तहत राज्य के एनसीआर जिलों में पुराने ट्रकों एवं बसों (बीएस-IV अथवा उससे पूर्व उत्सर्जन मानकों वाले) के प्रतिस्थापन पर मोटर वाहन कर में छूट प्रदान करने को मंजूरी दी गई।ट्रकों एवं बसों के लिए पात्र लाभार्थियों को नए बीएस-VI अथवा उससे कड़े उत्सर्जन मानकों वाले, इलेक्ट्रिक (EV) तथा सीएनजी ट्रकों एवं बसों की खरीद पर मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, ट्रकों एवं बसों के लिए योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को पुराने (Used) बीएस-VI अथवा उससे कड़े उत्सर्जन मानकों वाले, इलेक्ट्रिक (EV) तथा सीएनजी ट्रकों एवं बसों की खरीद पर मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी। दोनों ही मामलों में मोटर वाहन कर में यह छूट 10 वर्ष की अवधि के लिए मान्य होगी।इसके अलावा, योजना के तहत खरीदे गए नए वाहनों के पंजीकरण पर पंजीकरण शुल्क में भी छूट प्रदान की जाएगी। 

साथ ही, योजना में पुराने ट्रकों एवं बसों के साथ भाग लेने वाले लाभार्थियों को एक वर्ष से अधिक समय से लंबित देनदारियों में छूट प्रदान की जाएगी।उल्लेखनीय है कि हरियाणा के राज्यपाल ने भी राज्य के एनसीआर जिलों में पंजीकृत पुराने बीएस-IV अथवा उससे पूर्व उत्सर्जन मानकों के अनुरूप ट्रकों एवं बसों के संबंध में एक वर्ष से अधिक समय से लंबित बकाया देनदारियों में छूट प्रदान की है।इस प्रोत्साहन से वाहन बेड़े के आधुनिकीकरण में तेजी आने, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने तथा राज्य के एनसीआर जिलों में वायु गुणवत्ता में सुधार होने की अपेक्षा है, जिसमें 93458 ट्रक और 16329 बसें शामिल है।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा बागवानी नर्सरी अधिनियम, 2025 (2025 का हरियाणा अधिनियम संख्या 17) की धारा 22(1) के तहत हरियाणा बागवानी नर्सरी नियम, 2026 को मंजूरी दी गई।नए स्वीकृत हरियाणा बागवानी नर्सरी नियम, 2026 राज्य में बागवानी नर्सरियों के प्रबंधन और निगरानी के लिए एक पूर्ण नियामक प्रणाली प्रदान करते हैं।

ये नियम नर्सरी लाइसेंस के आवेदन, अनुदान, नवीनीकरण और श्रेणियों को जोड़ने की प्रक्रिया को निर्दिष्ट करते हैं। वे न्यूनतम नर्सरी मानकों, रिकॉर्ड रखने और बेची जाने वाली रोपण सामग्री के क्यूआर-आधारित प्रकटीकरण को भी परिभाषित करते हैं।यह नियम फलदार पौधों, सब्जियों, कंद, मसालों, सीज़निंग, फूलों, सजावटी पौधों, औषधीय और सुगंधित फसलों, तथा सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से बागवानी पौधों के रूप में घोषित किए जाने वाले अन्य पौधों से संबंधित बागवानी नर्सरियों पर लागू होंगे। 

इन नियमों का उद्देश्य प्रदेश में सभी प्रमुख बागवानी फसलों के लिए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का उत्पादन और उपलब्धता सुनिश्चित करना है।किसानों को अपनी किस्म के अच्छी गुणवता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। ये पौधे बीमारी और कृमि से मुक्त होंगे। अगर विक्रेता (नर्सरी संचालक) खरीदार को खराब क्वालिटी, घटिया निम्न गुणवता वाले पौधे बेचता है, तो किसानों को खेती की लागत से दोगुना मुआवजा देने का प्रावधान है।

नियमों में नर्सरियों के नियमित निरीक्षण, लाइसेंस निलंबन या रद्दीकरण सहित उल्लंघन के मामले में कार्रवाई  और कीटों व बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए संक्रमित या अवैध रोपण स्टॉक को अनिवार्य रूप से नष्ट करने का भी प्रावधान है। इसके अलावा  शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए एक समयबद्ध अपील प्रणाली का प्रस्ताव किया गया है।अधिनियम को लागू करने, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने, नर्सरी संचालन में जवाबदेही बनाए रखने, पौधों के माध्यम से कीट-जनित बीमारियों के प्रसार को रोकने और किसानों व खरीदारों के हितों की रक्षा करने के लिए ये नियम अति आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में  हरियाणा नगर पालिका संशोधन अध्यादेश 2026 और हरियाणा नगर निगम संशोधन अध्यादेश 2026 को मंजूरी दी है। इस अध्यादेशों के माध्यम से मंत्रिमंडल ने हरियाणा नगर पालिका अधिनियम, 1973 की धारा 200 की उपधारा (1) तथा हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 329 की उपधारा (1) में संशोधन को मंजूरी दी है। 

भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय के डी-रेगुलेशन सेल द्वारा दोहरे लाइसेंस समाप्त करने के निर्देशानुसार यह निर्णय लिया गया है। संशोधन में उन प्रावधानों को हटाया गया है, जिनमें मीट की दुकानों और बूचड़खानों के लिए लाइसेंस की आवश्यकता है, क्योंकि इसी तरह के व्यवसायों को खाद्य और औषधि प्रशासन हरियाणा द्वारा भी विनियमित (रेगुलेटिड) किया जा रहा है। इन संशोधनों से दोहरे लाइसेंस समाप्त होंगे, तथा आम जनता को नियमों की अनुपालना  में राहत होगी।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में  हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अध्यादेश, 2026 जारी करके हरियाणा ग्राम शामलात भूम (विनियमन) अधिनियम, 1961 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। मौजूदा प्रावधानों के तहत, निदेशक, विकास और पंचायत विभाग, हरियाणा के पास उन योग्य आवेदकों को शामलात देह बेचने की मंजूरी देने का अधिकार है, जिन्होंने 31 मार्च 2004 या उससे पहले ऐसी जमीन पर अपने घर बनाए थे। 

अभी बड़ी संख्या में आवेदन अलग-अलग स्तरों पर लंबित हैं और मंजूरी अपेक्षित हैं। ऐसे मामलों के निपटारे की प्रक्रिया में तेजी लाने और योग्य आवेदकों को समय पर राहत देने के लिए स्वीकृति देने का अधिकार  सम्बन्धित जिला उपायुक्त को दिया गया है।चंडीगढ़, 22 जून – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 (हरियाणा अधिनियम संख्या 27, 2012) की धारा 3(2)(b) में संशोधन के लिए हरियाणा राज्य महिला आयोग (संशोधन) अध्यादेश, 2026 जारी करने को मंजूरी दी गई। 

इस संशोधन के तहत हरियाणा राज्य महिला आयोग में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या 5 से बढ़ाकर 7 की जाएगी।कानूनी जागरूकता में वृद्धि, आयोग तक पहुंच में आसानी तथा संस्था के प्रति बढ़ते जनविश्वास के कारण आयोग के कार्यक्षेत्र और कार्यभार में भी काफी विस्तार हुआ है। ऐसे में कुछ समय से आयोग को घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, साइबर अपराध तथा महिलाओं से जुड़े अन्य मामलों से संबंधित मिलने वाली शिकायतों और अभ्यावेदनों की संख्या बढ़ी है।

हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 की धारा 3(2)(b) के तहत निर्धारित 5 गैर-सरकारी सदस्यों की वर्तमान संख्या आयोग को सौंपे गए वैधानिक दायित्वों के प्रभावी निर्वहन के लिए अपर्याप्त हो गई है। इसलिए आयोग की संस्थागत क्षमता को मजबूत करने, शिकायतों के त्वरित निपटान, व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने तथा वैधानिक दायित्वों के प्रभावी निर्वहन के उद्देश्य से हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 की धारा 3(2)(b) में संशोधन कर गैर-सरकारी सदस्यों की अधिकतम संख्या 5 से बढ़ाकर 7 करने को मंजूरी दी गई है।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में नगर परिषद यमुनानगर और नगर परिषद जगाधरी के अंतर्गत आने वाली उन कॉलोनियों के संबंध में निर्देश जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जहां 1996 में सरकार द्वारा भवनों को नियमित किया गया था।यह मामला साल 2021-22 के दौरान तब प्रकाश में आया जब शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जीआईएस-मैप्ड संपत्ति डेटा के साथ एकीकृत एक ऑनलाइन 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' (एनडीसी) पोर्टल की शुरुआत की। 

डिजिटल पोर्टल में किसी भी स्वीकृत क्षेत्र को शामिल करने के लिए स्पष्ट रूप से परिभाषित जियो-रेफरेन्स्ड सीमाओं की आवश्यकता होती है। हालांकि, साल 2005 से पहले नियमित की गई कॉलोनियों के पास प्रामाणिक लेआउट प्लान और खसरा नंबरों का विवरण नहीं था, जिससे जीआईएस प्लेटफॉर्म पर उनकी सीमाओं को सटीक रूप से मैप करना असंभव हो गया। इसके परिणामस्वरूप, इन कॉलोनियों के भीतर खाली या गैर-मानचित्रित (unmapped) भूखंडों को सिस्टम द्वारा स्वचालित रूप से "अस्वीकृत" के रूप में वर्गीकृत कर दिया गया था।

नतीजतन, धारा 203ए के तहत अधिसूचित क्षेत्रों में साल 2004 से पहले नियमित की गई संपत्तियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन कॉलोनियों के लिए स्पष्ट रूप से सीमाएं तय न होने के कारण विकास कार्य बाधित हुए हैं, जबकि प्रॉपर्टी आईडी को एनडीसी पोर्टल के साथ एकीकृत नहीं किया जा सका। इससे भवन योजना की मंजूरी प्राप्त करने और संपत्ति की खरीद-बिक्री के लेन-देन को निष्पादित करने में कठिनाइयाँ आ रही हैं।

इन समस्याओं के समाधान के लिए, कैबिनेट ने शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक को नगर निगम, यमुनानगर में एक समिति गठित करने के निर्देश जारी करने को मंजूरी दी है। इस समिति की अध्यक्षता आयुक्त करेंगे और इसमें मुख्य नगर योजनाकार या जिला नगर योजनाकार, नगर निगम के मुख्य अभियंता या अधीक्षक अभियंता, अतिरिक्त नगर आयुक्त/संयुक्त आयुक्त/कार्यकारी अधिकारी, मेयर के नामांकित व्यक्ति, कार्यकारी अभियंता, राजस्व अधिकारी और जोनल कराधान अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे।

यह समिति उन कॉलोनियों की पहचान करेगी जहां हरियाणा नागरिक सुविधाएं और बुनियादी ढांचा कमी वाले नगर पालिका क्षेत्र प्रबंधन अधिनियम, 2013 के 26 सितंबर, 2013 को लागू होने से पहले, धारा 203ए के तहत भवनों को नियमित किया गया था और आधिकारिक राजपत्र अधिसूचनाओं या औपचारिक सरकारी आदेशों के माध्यम से अधिसूचित किया गया था। ये ऐसी कॉलोनियां हैं जिनके लिए न तो खसरा नंबर का विवरण और न ही स्वीकृत लेआउट प्लान उपलब्ध हैं। 

समिति ऐसी कॉलोनियों के लिए प्रस्ताव तैयार कर उन्हें अंतिम रूप देगी और उन क्षेत्रों को घेरते हुए बाहरी सीमा रेखाएं खींचेगी जहां भवनों को नियमित किया गया था। इस कवायद से संपत्ति के रिकॉर्ड को एनडीसी पोर्टल के साथ एकीकृत करने में मदद मिलेगी और इन क्षेत्रों में सुनियोजित विकास संभव हो सकेगा।इसके साथ ही कैबिनेट ने विकास शुल्क (डेवलपमेंट चार्ज) के भुगतान के संबंध में भी प्रावधानों को मंजूरी दी है। 

जिन संपत्ति मालिकों ने साल 1996 में कॉलोनी की अधिसूचना की तारीख या उससे पहले भवनों का निर्माण किया था, लेकिन पहले विकास शुल्क का भुगतान नहीं किया था, उन्हें अधिसूचना के समय लागू शुल्क का भुगतान करना होगा। वहीं जिन मालिकों ने पहले ही आवश्यक विकास शुल्क का भुगतान कर दिया है, उन्हें पोर्टल पर दिखाए जा रहे शुल्क से छूट प्राप्त करने के लिए भुगतान का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।