5 Dariya News

आईसीएमआर ने भारत के सबसे बड़े बायोमेडिकल इनोवेशन-टेक ट्रांसफर इवेंट की मेज़बानी की

मजबूत विज्ञान-उद्योग साझेदारी के माध्यम से भारत किफायती स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकियों के वैश्विक स्रोत के रूप में उभर रहा है : प्रतापराव जाधव

5 Dariya News

नई दिल्ली 25-May-2026

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने आज नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में भारत के सबसे बड़े जैव चिकित्सा एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुविधा कार्यक्रम "मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री कनेक्ट" का आयोजन किया।

इस अवसर पर आईसीएमआर मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र पहल के तहत जैव चिकित्सा नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए समर्पित देश के पहले संरचित प्लेटफार्म की शुरूआत की गई। इस पहल का उद्देश्य मजबूत उद्योग साझेदारी के माध्यम से स्वदेशी जैव चिकित्सा अनुसंधान को सुलभ, वास्तविक दुनिया के स्वास्थ्य सेवा समाधानों में परिवर्तित करना है।

आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर गोबरधन दास भी उपस्थि‍त थे। राज्य मंत्री श्री जाधव ने कहा कि यह पहल भारतीय विज्ञान को उद्योग से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हमारी प्रयोगशालाओं में विकसित नवाचार ऐसी प्रौद्योगिकियों में तब्दील हों जो जन स्वास्थ्य को मजबूत करें और विकसित भारत को आगे बढ़ाएं।

भारत स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का उपभोक्ता होने से आगे बढ़कर किफायती और नवोन्मेषी स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक स्रोत बनने की ओर अग्रसर है,। इसमें आईसीएमआर जैसे संस्थानों और उद्योग क्षेत्र की मजबूत साझेदारी शामिल है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबरधन दास ने कहा कि भारत के पास स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार इकोसिस्टम के पास मौजूद है।

मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र बौद्धिक संपदा की रक्षा करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सक्षम बनाने और स्वदेशी नवाचारों को प्रयोगशालाओं से समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा, "मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र आईसीएमआर की अत्याधुनिक अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से आगे बढ़कर उद्योग क्षेत्र की साझेदारी और प्रभावशाली प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम के दौरान, 'इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट' और 'टेक्नोलॉजी कंपेंडियम' भी जारी किए गए। यह देश के बायोमेडिकल नवाचार, बौद्धिक संपदा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आईसीएमआर संस्थानों और नवप्रवर्तकों द्वारा उद्योग भागीदारों को 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का सौंपा जाना इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण रहा।

इससे उनके विकास, उत्पादन और व्यावसायीकरण बढ़ावा मिलेगा। इन प्रौद्योगिकियों में उन्नत निदान, टीके, चिकित्सा उपकरण और जैव चिकित्सा समाधान शामिल हैं जो सार्वजनिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं पर बल देते है। हस्तांतरित प्रौद्योगिकियों में टाइफाइड और पैराटाइफाइड के लिए ग्लाइकोकॉन्जुगेट और रिकॉम्बिनेंट टीके, साथ ही जापानी एन्सेफलाइटिस, तपेदिक और चेचक जैसी बीमारियों के लिए निदान प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।

कार्यक्रम के दौरान निष्क्रिय केएफडी और चांदीपुरा वायरस सहित जैव सामग्री को उद्योग क्षेत्र के भागीदारों को सौंपा गया। इससे देश के जैव चिकित्सा अनुसंधान और विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। इस आयोजन में आईसीएमआर संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स द्वारा विकसित निदान, उपचार और चिकित्सा उपकरणों में 100 से अधिक प्रौद्योगिकियों को दर्शाया गया।

साथ ही नवप्रवर्तकों और उद्योग हितधारकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को सुगम बनाया गया। इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री कनेक्ट" पहल मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के साथ विकसित भारत 2047 के लिए भारत के बायोमेडिकल क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।