ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु चंडीगढ़ प्रशासन ने जनभागीदारी का किया आह्वान
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चंडीगढ़ 20-May-2026
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं निगरानी हेतु गठित राज्य स्तरीय समिति की प्रथम बैठक श्री एच राजेश प्रसाद, मुख्य सचिव, चंडीगढ़ प्रशासन की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेष रूप से स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण, अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण, कचरा उत्पादन में कमी, कचरा संग्रहण प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा नागरिकों, बल्क वेस्ट जनरेटर्स, लीड फैसिलिटेटर्स, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, गेटेड कम्युनिटीज़ एवं शहरी स्थानीय निकायों सहित सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
समिति ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 6174/2023 में दिनांक 19.02.2026, 29.04.2026 एवं 05.05.2026 को पारित आदेशों के अनुपालन में विभिन्न हितधारकों द्वारा की गई कार्यवाही की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिए कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए तथा निर्धारित समयावधि में अनुपालन किया जाए।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि स्वच्छता एवं वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रत्येक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन एवं जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अंतर्गत अपने कर्तव्यों का पालन करें तथा दैनिक जीवन में जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन की आदतें अपनाएं।
नागरिकों से आग्रह किया गया कि वे :
* गीले कचरे, सूखे कचरे, सैनिटरी अपशिष्ट एवं विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट को स्रोत स्तर पर अलग-अलग करें।
* पृथक किए गए कचरे को केवल अधिकृत कचरा संग्राहकों/नामित एजेंसियों को ही सौंपें।
* सड़कों, नालों, पार्कों, खाली प्लॉटों एवं जल स्रोतों में कचरा फेंकने से बचें।
* पत्तियों, प्लास्टिक एवं अन्य कचरे को खुले में जलाने से परहेज करें।
* पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण एवं सिंगल-यूज प्लास्टिक के कम उपयोग के माध्यम से कचरा उत्पादन कम करें।
* जहां संभव हो, घर अथवा सामुदायिक स्तर पर जैविक कचरे की कम्पोस्टिंग को बढ़ावा दें।
* स्वच्छता कर्मियों एवं शहरी स्थानीय निकायों के साथ स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें।
समिति ने कहा कि स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण, प्रभावी पुनर्चक्रण एवं वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है तथा प्रत्येक परिवार को इसमें गंभीरता से भाग लेना चाहिए।
समिति ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अंतर्गत बल्क वेस्ट जनरेटर्स की संशोधित परिभाषा एवं बढ़ी हुई जिम्मेदारियों पर भी विचार-विमर्श किया। संशोधित प्रावधानों के अनुसार निम्नलिखित में से किसी एक मानदंड को पूरा करने वाली इकाई अब बल्क वेस्ट जनरेटर मानी जाएगी :
* प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक जल उपभोग;
* प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पादन; अथवा
* 20,000 वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र का उपयोग।
पूर्व में यह वर्गीकरण केवल प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करने वाली इकाइयों तक सीमित था।
इसके अतिरिक्त, नए नियमों के तहत 5,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली गेटेड कम्युनिटीज़ एवं बड़ी आवासीय सोसायटियों को विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना तथा स्रोत स्तर पर पृथक्करण एवं अपशिष्ट प्रसंस्करण संबंधी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है।
समिति ने सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स को निर्देश दिए कि वे :
* स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण एवं पृथक भंडारण सुनिश्चित करें।
* जैविक कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण कम्पोस्टिंग अथवा बायो-मीथनेशन के माध्यम से करें।
* पुनर्चक्रण योग्य कचरे को अधिकृत संग्राहकों/रिसाइक्लर्स को ही सौंपें।
* आयोजनों, समारोहों एवं व्यावसायिक गतिविधियों से उत्पन्न कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित करें।
* अपने परिसरों के भीतर एवं आसपास स्वच्छता बनाए रखें।
* शहरी स्थानीय निकायों एवं प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरणों द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।
* केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संबंधित शहरी स्थानीय निकाय के साथ पंजीकरण कराएं।
मुख्य सचिव ने नगर निगम, चंडीगढ़ को निर्देश दिए कि वह प्राथमिकता के आधार पर सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स, गेटेड कम्युनिटीज़ एवं संस्थानों की व्यापक पहचान एवं मैपिंग सुनिश्चित करे ताकि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन एवं अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
समिति ने लीड फैसिलिटेटर्स अर्थात पार्षदों/महापौरों एवं उनके अध्यक्षों, कॉरपोरेटर्स अथवा वार्ड सदस्यों की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया, जिन्हें माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 19.02.2026 के आदेश में जनता के प्राथमिक निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में मान्यता दी गई है।
बैठक में कहा गया कि अपने-अपने वार्डों में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है। लीड फैसिलिटेटर्स रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, बाजार संघों, संस्थानों, अपशिष्ट उत्पादकों एवं शहरी स्थानीय निकायों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे ताकि स्रोत स्तर पर पृथक्करण, जन-जागरूकता, शिकायत निवारण एवं अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं के अनुपालन की निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
वे सामुदायिक भागीदारी को भी प्रोत्साहित करेंगे तथा क्रियान्वयन संबंधी कमियों एवं क्षेत्रीय समस्याओं से संबंधित प्राधिकरणों को अवगत कराएंगे ताकि समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।
समिति ने शहरी स्थानीय निकायों की जिम्मेदारियों की भी समीक्षा की। नए नियमों के तहत शहरी स्थानीय निकाय :
* पृथक किए गए कचरे का 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर संग्रहण सुनिश्चित करेंगे।
* अपशिष्ट प्रसंस्करण, सामग्री पुनर्प्राप्ति एवं निस्तारण सुविधाओं को सुदृढ़ करेंगे।
* खुले में कचरा फेंकने एवं जलाने पर रोक लगाएंगे।
* सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई सुनिश्चित करेंगे।
* व्यापक जन-जागरूकता एवं आईईसी अभियान चलाएंगे।
* उल्लंघनों पर यूजर चार्ज, स्पॉट फाइन एवं पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लागू करेंगे।
* पुराने कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण एवं डंप साइट्स के सुधार कार्य सुनिश्चित करेंगे।
* स्वच्छता कर्मियों एवं कचरा बीनने वालों के कल्याण एवं एकीकरण को बढ़ावा देंगे।
* बल्क वेस्ट जनरेटर्स, गेटेड कम्युनिटीज़ एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा नियमों के अनुपालन की निगरानी करेंगे।
समिति ने जिला प्रशासन/उपायुक्त की भूमिका पर भी बल दिया। नए नियमों के तहत उपायुक्त :
* सभी हितधारकों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करेंगे।
* नियमों के फील्ड स्तर पर अनुपालन की निगरानी करेंगे।
* विभिन्न विभागों एवं प्राधिकरणों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे।
* अनधिकृत डंपिंग स्थलों को हटाने एवं खुले में कचरा जलाने की रोकथाम सुनिश्चित करेंगे।
* अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी जन शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करेंगे।
* प्रवर्तन अभियान चलाकर उल्लंघनकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे।
* जागरूकता गतिविधियों की निगरानी करेंगे तथा संस्थानों, बाजार संघों एवं रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
नगर निगम, चंडीगढ़ को निर्देश दिए गए कि वह जागरूकता अभियानों को और तेज करे, कचरा संग्रहण एवं प्रसंस्करण अवसंरचना को मजबूत बनाए तथा नियमों के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे।
समिति ने चेतावनी दी कि कचरा फैलाना, स्रोत स्तर पर पृथक्करण न करना, खुले में कचरा डालना एवं जलाना जैसे उल्लंघनों पर जुर्माना, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्य सचिव ने सभी नागरिकों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, बाजार संघों, संस्थानों, गेटेड कम्युनिटीज़ एवं बल्क वेस्ट जनरेटर्स से चंडीगढ़ को स्वच्छ, स्वस्थ एवं पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ बनाने में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
चंडीगढ़ प्रशासन ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रत्येक नागरिक से स्वच्छता एवं उचित अपशिष्ट प्रबंधन को साझा नागरिक दायित्व के रूप में अपनाने का आह्वान किया।